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सामाजिक अभियन्ता से युवा प्रधानमंत्री: बालेन शाह की यात्रा

समाचार सारांश

  • २०७९ साल के स्थानीय चुनाव में काठमांडू महानगरपालिका के मेयर पद पर विजयी बालेन शाह अब नेपाल के युवा प्रधानमंत्री बने हैं।
  • २०७० में काठमांडू में लंबे बाल रखने वाले युवाओं को लक्षित कर पुलिस ने अभियान चलाया था, उसी दौरान बालेन ने ‘पुलिस प्रतिकार’ नामक रैप जारी किया था।
  • २०७२ के भूकंप के बाद बालेन शाह ने सिविल इंजीनियर के रूप में ३५ से अधिक जिलों में घर पुनर्निर्माण में तकनीकी सहायता प्रदान की।

१३ चैत, काठमांडू । ‘मैं भविष्य में मतदान करूंगा और खुद को ही मतदान करूंगा, क्योंकि मुझे पता है कि देश कैसे विकसित करना है।’

४ मार्च २०१७ को बालेन शाह ने अपने फेसबुक स्टेटस में ये शब्द लिखे थे। २०७४ के प्रतिनिधिसभा चुनाव में नागरिकों के उत्साह के बीच बालेन का नजरिया बिल्कुल अलग था।

वे यम बुद्ध के आरंभ किए हुए ‘रअ बार्ज’ से मुख्य रूप से रैपर के रूप में परिचित हुए। हालांकि उनके गीतों में युवा नागरिकों के आक्रोश झलकता था, वे इतने लोकप्रिय नहीं हुए कि यह उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत का संकेत दे सकें।

लेकिन २०७९ के स्थानीय चुनाव में काठमांडू महानगर के मेयर पद के लिए उनकी उम्मीदवारी ने ४ मार्च २०१७ के स्टेटस को फिर से चर्चा में ला दिया। उनके राजनीतिक पात्रता को लेकर खोजबीन और चर्चा शुरू हुई।

इसके बाद वे काठमांडू महानगर के मेयर बने और अब नेपाल के युवा प्रधानमंत्री के रूप में इतिहास रच चुके हैं।

प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद बालेन की राजनीति और रैप की खासियतों पर काफी चर्चा हो चुकी है। एक सामाजिक अभियन्ता के रूप में उनके चरित्र का अध्ययन भी आवश्यक है।

समय की आवश्यकता

२०७० में काठमांडू में अपराध और गुंडागर्दी को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लंबे बाल रखने वाले युवाओं पर अभियान चलाया। तत्कालीन महानगरीय पुलिस प्रमुख एसएसपी विक्रमसिंह थापा के नेतृत्व में कान में मुंद्रा लगाने, टैटू बनाने और लंबे बाल रखने वालों को ‘गुंडा’ माना गया और नियंत्रण किया गया।

पहले दिन ही ७११ युवाओं को हिरासत में लिया गया और कुछ के बाल अभिभावकों के सामने काटे गए। इस पर सामाजिक मीडिया में व्यापक विरोध हुआ और बालेन ने ‘पुलिस प्रतिकार’ नामक रैप जारी कर विरोध जताया।

उसी दौरान सत्तारूढ़ दल नेकपा एमाले के युवा संगठन ने सैकड़ों मोटरसाइकिलों के साथ रैली निकाली जिसे देखकर बालेन ने सोशल मीडिया पर कड़ी असंतुष्टि व्यक्त की।

इस दौर में नेपाल में वैकल्पिक राजनीतिक शुरुआत करने वाले उज्ज्वल थापा के विवेकशील नेपाली अभियान सक्रिय थे और बालेन ने एक रचनात्मक विद्रोही भूमिका निभाई।

‘मजदूरी पूरी ली, अब संविधान दो’

२०११ में उज्ज्वल थापा के नेतृत्व में ‘नेपाल यूनाइट्स’ अभियान ने संविधान पास न कराने वाले सांसदों के खिलाफ युवा दबाव बनाया। विरोध कार्यक्रम माइतीघर मण्डला और बानेश्वर में हुए, जहां ‘मजदूरी पूरी ली, अब संविधान दो’ नारा सबसे लोकप्रिय था।

तब बालेन इंजीनियरिंग पढ़ रहे थे और नेपाली हिपहॉप में उभर रहे थे। वे नियमित रूप से इस अभियान में हिस्सा लेते और अपनी रैप के माध्यम से भ्रष्टाचार और नेताओं की अकर्मण्यता की आलोचना करते।

२०७२ के वैशाख १२ के भूकंप ने बालेन की जिंदगी में नया मोड़ लाया। संविधान संकट और राजनीतिक अस्थिरता के बीच आई इस विपत्ति ने उन्हें रैपर से व्यावहारिक सिविल इंजीनियर और पुनर्निर्माण कार्यकर्ता बना दिया।

उन्होंने स्वयंसेवक के रूप में काभ्रे जिले में लगभग २५०० घरों का पुनर्निर्माण किया और ३५ से अधिक जिलों में सक्रिय भूमिका निभाई। वे भूकंप रोकथाम के डिजाइन बनाकर गोर्खा, बारपाक जैसे क्षेत्रों में पुनर्निर्माण में लगे।

बालेन ने कहा है, ‘२०७२ के भूकंप के बाद मैं सिविल इंजीनियर के तौर पर देश के विभिन्न हिस्सों में काम करता रहा, केवल काभ्रे में ही लगभग २५०० घर पुनर्निर्मित किए गए। इसके बाद मैं ३५ से अधिक जिलों में गया।’

उन्होंने स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर ‘ओनर ड्रिवन’ पुनर्निर्माण मॉडल के तहत मकान मालिकों को प्रशिक्षण दिया, जिससे पुनर्निर्माण तेज, सुरक्षित और प्रभावी हुआ।

इस प्रकार, बालेन शाह ने एक सामाजिक अभियन्ता से उठकर युवा प्रधानमंत्री बनने का सफर तय किया है।