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‘आयोग की रिपोर्ट पर ही भरोसा करके गिरफ्तारी नहीं हो सकती’ – संविधान विशेषज्ञ नीलाम्बर आचार्य

पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को ‘जेन-जी’ आन्दोलन से संबंधित आरोपों में पुलिस ने गिरफ्तार किया है। संविधान विशेषज्ञ नीलाम्बर आचार्य ने आयोग की रिपोर्ट को पक्षपाती और एकतरफा बताते हुए कहा है कि इसे आधार बनाकर गिरफ्तारी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने भदौ २४ की घटनाओं की भी निष्पक्ष जांच कराए जाने और केवल कानून के अनुसार ही कार्रवाई करने पर ज़ोर दिया।

केपी शर्मा ओली और रमेश लेखक की गिरफ्तारी के बाद इस प्रक्रिया की न्यायसंगतता और प्रतिशोधात्मकता पर विवाद छिड़ा हुआ है। गौरीबहादुर कार्की आयोग की रिपोर्ट पर आरोप है कि इसमें भदौ २३ और २४ की घटनाओं को अलग-अलग कर पूर्वाग्रहपूर्ण प्रस्तुत किया गया है। आचार्य ने कहा, “आयोग की रिपोर्ट पर ही पकड़ बनाकर गिरफ्तारी नहीं हो सकती। सरकार को अपने जांच संस्थानों के माध्यम से जाँच करनी चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “जिन लोगों ने अपनी जान गंवाई, वह अत्यंत दुखद है। लेकिन क्या भदौ २४ की घटना में जान गंवाने वाले परिवारों को न्याय नहीं मिलेगा?” आचार्य ने भदौ २४ की घटनाओं में भी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, “घर जलाना, लोगों की हत्या करना, पुलिस की वर्दी छीनना जैसे मामलों में उचित कार्रवाई होनी चाहिए।”

आचार्य ने आयोग की रिपोर्ट को प्रमाण मानकर अदालत में मामला चलाने से मना किया। उन्होंने कहा, “यह रिपोर्ट पूर्वाग्रहपूर्ण, एकतरफा और तिरछी है।” उन्होंने निष्पक्ष आयोग गठन, निष्पक्ष जांच और दोष साबित होने पर ही कार्रवाई होने पर ज़ोर दिया।