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सरकार की 100 कार्ययोजना: ‘कार्यान्वयन कठिन है लेकिन संभव है’

नया मंत्रिमंडल

तस्वीर स्रोत, RSS

प्रधानमंत्री वलिन्द्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा जारी ‘शासकीय सुधार संबंधी कार्ययोजना’ को लागू करना कठिन और चुनौतीपूर्ण है, लेकिन नामुमकिन नहीं, ऐसा विभिन्न संबंधित पक्षों ने प्रतिक्रिया दी है।

यह कार्ययोजना जनता से सीधे जुड़ी कई महत्वपूर्ण विषयों को समेटे हुए है, इसलिए अब इसका क्रियान्वयन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही, वैदेशिक रोजगार और द्वंद्व पीड़ितों के मामले जिनकी सुनवाई अब तक बाकी है, उन्हें कार्ययोजना में शामिल न किए जाने की चर्चा भी हो रही है।

नई मंत्रिपरिषद की पहली बैठक में शुक्रवार को पारित इस कार्ययोजना को सरकार ने शनिवार को सार्वजनिक किया है। इसमें प्रशासनिक, राजनीतिक, सामाजिक न्याय तथा नागरिक सेवा क्षेत्र के सुधार के मुद्दे शामिल हैं।

कार्ययोजना में क्या-क्या है?

100 बिंदुओं वाली इस कार्ययोजना में दलित और वंचित समुदायों से 15 दिनों के अंदर राज्य की ओर से औपचारिक माफी मांगने और सुधारमुखी कार्यक्रम की घोषणा करने का उल्लेख है।

सभी राजनीतिक दलों के घोषणापत्र में शामिल क्रियान्वयन योग्य विषयों को मिलाकर एक राष्ट्रीय प्रतिबद्धता तैयार करने और उसमें सरकार की साझा स्वामित्व स्थापित करने, राजनीतिक व संस्थागत सुधार और चुनावी प्रणाली से संबंधित आवश्यक संविधान संशोधन के लिए राष्ट्रीय सहमति बनाने हेतु ‘संविधान संशोधन बहस पत्र’ तैयार करने के लिए कार्यदल बनाने जैसे प्रावधान कार्ययोजना में हैं।