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आमाके नाम पर नागरिकता मिलने में अब भी कठिनाइयां, पीड़ितों की शिकायतें

समाचार संक्षेप

समीक्षा किया गया।

  • कानूनी तौर पर आमाके नाम से नागरिकता ली जा सकती है, लेकिन लागू करने में कठिनाइयों के कारण कई नागरिक अभी भी बिना नागरिकता के हैं।

१७ चैत्र, काठमांडू। कानूनी रूप से आमाके नाम से नागरिकता लेने का प्रावधान मौजूद होने के बावजूद इसके सही संचालन में समस्याओं के कारण कई नेपाली नागरिक अब भी नागरिकता विहीन रहकर जीवन बिताने को मजबूर हैं।

मंगलवार को सिटिजनशिप अफेक्टेड पीपल्स नेटवर्क (सीएपीएन), नेशनलिटी फॉर ऑल (एनएफए) और ग्लोबल चैम्पियन फॉर इक्वल नेशनलिटी राइट्स (जीसीईएनआर) की संयुक्त आयोजन में “आमाके नाम से नागरिकता प्राप्त करने की कानूनी व्यवस्था, चुनौतियां और आवश्यक संवैधानिक संशोधन” विषय पर चर्चा संपन्न हुई।

चर्चा में शामिल लोगों ने बताया कि कानून में संशोधन के बाद भी व्यवहार में आमाके नाम से नागरिकता लेने में अब भी समस्या और परेशानियां बनी हुई हैं।

कार्यक्रम में एक पीड़ित ने अपनी शिकायत व्यक्त की कि उनकी मां नेपाली हैं और पिता भारतीय, फिर भी वे नेपाल में रहकर ३६ वर्षों तक नागरिकता प्राप्त नहीं कर पाए।

वह कहते हैं, ‘१६ वर्षों से प्रयास कर रहा हूँ, पर अभी भी अनागरिक ही हूँ। नागरिकता न मिलने के कारण पढ़ाई और रोजगार पर असर पड़ा, मानसिक समस्याएं भी झेलनी पड़ीं।’

इसी तरह एक अन्य प्रतिभागी ने भी कहा कि एकल मां के नाम से नागरिकता बनाते समय मां के चरित्र पर सवाल उठाए जाते हैं और अपमानजनक सवालों का सामना करना पड़ता है।

दुनिया के १९५ देशों में से १७२ देशों में बिना किसी शर्त के आमाके नाम से नागरिकता मिल सकती है। अभी भी २४ देशों में आमाके नाम से नागरिकता पाने में समस्या है जबकि एशिया के चार देश आमाके नाम से नागरिकता प्रदान नहीं करते।

दक्षिण एशिया में अकेले नेपाल ही है जहां आमाके नाम पर नागरिकता लेना कठिन है। संविधान में इसे मान्यता देने के बाद भी विभिन्न शर्तों के साथ नागरिकता नियमावली में संशोधन किया गया है। पीड़ित और संबंधित समूहों ने इसका विरोध करते हुए ध्यानाकर्षण कराया है।

कार्यक्रम के प्रतिभागियों ने कानूनी व्यवस्था को प्रभावी बनाने, प्रक्रिया को सरल और सम्मानजनक बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।