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चट्‌याङ क्या है? जिसने 12 वर्षों में 1000 से अधिक लोगों की जान ली है

18 चैत, काठमांडू। गृह मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय आपातकालीन कार्य संचालन केंद्र द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, नेपाल में पिछले 12 वर्षों में चट्‌याङ के कारण भारी जनधन का नुकसान हुआ है। राष्ट्रीय विपद् जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के वरिष्ठ हाइड्रोलॉजिस्ट राजेंद्र शर्मा के अनुसार, विप्रति 2070 से 2082 फागुन मसान्त तक देशभर में 3,386 चट्‌याङ की घटनाएँ दर्ज हुई हैं। इनमें कुल 1,073 लोगों की मृत्यु हुई है। इनमें 460 पुरुष, 303 महिलाएं और 312 की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है। चट्‌याङ से 3,408 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 1,317 पुरुष और 1,633 महिलाएं शामिल हैं। चार हजार दो सौ नवासी परिवार चट्‌याङ से प्रभावित हुए हैं, बताया केंद्र ने। इसके अलावा 104 घरों को पूर्ण और 390 घरों को आंशिक क्षति पहुँची है। पूर्वाधार क्षेत्र में 114 गोठ और 4,849 पशुचौपायों को नुकसान हुआ है। केंद्र के अनुसार, चट्‌याङ की घटनाओं से कुल 11 करोड़ 82 लाख 18 हजार 260 की अनुमानित आर्थिक हानि हुई है, वरिष्ठ हाइड्रोलॉजिस्ट शर्मा ने जानकारी दी।

इस अवधि में मकवानपुर में सबसे अधिक 182 चट्‌याङ की घटनाएँ दर्ज हुई हैं, जहाँ 41 लोग मरे और 75 घायल हुए। साथ ही 300 परिवार प्रभावित हुए। झापा में 113, उदयपुर में 104, दैलेख में 105 और मोरंग में 95 घटनाएँ हुई हैं। मानवीय नुकसान की दृष्टि से मकवानपुर में सबसे अधिक 75, मोरंग में 42 और उदयपुर में 39 लोग मरे, राष्ट्रीय आपातकालीन कार्य संचालन केंद्र ने बताया। पूर्वी पहाड़ी इलाकों में भी चट्‌याङ का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा गया है। खोत्ताङ में 92, संखुवासभा में 86 और ओखलढुंगा में 76 घटनाएँ दर्ज हुईं, जिससे इन क्षेत्रों में चट्‌याङ का सतत जोखिम प्रदर्शित होता है।

मधेस प्रदेश के सप्तरी, सिराहा, धनुषा, पर्सा आदि जिलों में दर्जनों लोग चट्‌याङ के कारण मरे हैं, राष्ट्रीय आपातकालीन कार्य संचालन केंद्र के विवरण में उल्लेख है। पश्चिमी नेपाल के रोल्पा में 91, गुल्मी और प्युठान में 72-72 तथा अछाम में 73 घटनाएँ हुई हैं। आर्थिक नुकसान में झापा सबसे आगे है, लगभग एक करोड़ 7 लाख के बराबर की क्षति हुई है जबकि खोत्ताङ, उदयपुर और संखुवासभा में भी भारी नुकसान हुआ। विशेषज्ञों ने बताया कि मानसून और प्री-मानसून के दौरान चट्‌याङ की घटनाएँ अधिक होती हैं, इसलिए सुरक्षा उपाय और जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है।

पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर वार्षिक औसतन 67 लोगों की मौत चट्‌याङ के कारण होती है। गृह मंत्रालय के अनुसार, 2077 में 248 घटनाएँ हुईं, जिससे 70 लोग मरे और 248 घायल हुए। विप्रति 2078 में घटनाएँ कम होकर 203 हुईं, जिनमें 56 की मौत और 179 घायल हुए। वरिष्ठ हाइड्रोलॉजिस्ट शर्मा के अनुसार, 2079 में 290 घटनाएँ दर्ज हुईं, 84 मौतें और 238 घायल, 2080 में 247 घटनाएँ, 44 मौतें और 228 घायल, 2081 में 436 घटनाएँ, 79 मौतें और 322 घायल हुए। 2082 की वैशाख से चैत्र 14 तक 416 घटनाएँ हुईं, जिनमें 47 की मौत और 307 घायल बताया गया।

चट्‌याङ क्या है? राष्ट्रीय विपद् जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा प्रकाशित आपदा जोखिम न्यूनीकरण से संबंधित हाता पुस्तक के अनुसार, चट्‌याङ बादल से जमीन तक बहने वाली उच्च मात्रा की विद्युत धारा है। विभिन्न ऊंचाइयों पर विपरीत चार्ज वाले बादल जब पास आते हैं तो अचानक विद्युत प्रवाह होता है, जिससे अत्यधिक शक्ति उत्पन्न होकर तेज धमाका और आग के साथ विद्युत तरंग पृथ्वी की सतह पर आती है, जिससे चट्‌याङ का खतरा बनता है। बस्तियाँ, जंगल, वनस्पति और भौगोलिक परिवेश चट्‌याङ के जोखिम निर्धारण में भूमिका निभाते हैं, किंतु मूलतः यह एक दुर्घटना है। चट्‌याङ का सबसे ज्यादा खतरा खुले क्षेत्रों में काम करने वाले किसानों, मज़दूरों और पशुपालकों को होता है। ऊँची इमारतें, विद्यालय, अस्पताल, शॉपिंग मॉल, विद्युत और टेलीफोन लाइन में चट्‌याङ प्रतिबंधक तकनीक लगाकर जनधन की सुरक्षा की जा सकती है।