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बादल को बधाई देते हुए सुहांग ने कहा- मेरी उम्मीदवारी विद्रोह नहीं, बल्कि आंदोलन के प्रति कर्तव्य है

समाचार सारांश। नेकपा एमाले के युवा नेता सुहांग नेमवांग ने संसदीय दल में अपनी उम्मीदवारी को विद्रोह के रूप में न लेने के लिए नेताओं से आग्रह किया है। उन्होंने बताया कि उनकी उम्मीदवारी समय की मांग और आंदोलन के प्रति कर्तव्य-बोध पर आधारित है। उन्होंने कहा कि उन्हें पार्टी के मूल्य, मान्यताएँ और परंपराओं का पूर्ण ज्ञान है। सुहांग ने पार्टी के भीतर निराशा को तोड़ने और आंदोलन को पुनर्जीवित करने के लिए अपनी उम्मीदवारी आवश्यक बताई। १८ चैत, काठमांडू।

नेकपा एमाले के युवा नेता सुहांग नेमवांग ने संसदीय दल में अपनी उम्मीदवारी को विद्रोह के रूप में न लेने की अपील की। रामबहादुर थापा के संसदीय दल के नेता निर्वाचित होने पर बधाई देते हुए सुहांग ने अग्रज नेताओं के प्रति सदा सम्मान व्यक्त किया। ‘मुझे अपनी पार्टी के गौरवशाली मूल्य, मान्यताएँ और परंपराओं की पूरी जानकारी है। अग्रज नेताओं के प्रति मेरा सदैव उच्च सम्मान है,’ नेमवांग ने कहा।

‘मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मेरी उम्मीदवारी कोई विद्रोह नहीं है। यह समय की मांग और आंदोलन के प्रति मेरा कर्तव्य बोध है। यह पार्टी और आंदोलन के प्रति मेरी जिम्मेदारी भी है।’ उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर युवा पीढ़ी में व्याप्त निराशा को खत्म करने और आंदोलन को पुनर्जीवित करने के लिए उनकी उम्मीदवारी आवश्यक है। ‘अग्रजों के योगदान की मैं हमेशा कदर करता हूँ। लेकिन पार्टी के भीतर निराशा और हताशा को खत्म करने के लिए मुझे चाहे विष पीना पड़े, यह साहस दिखाना पड़ा,’ सुहांग के बयान का एक सांसद ने हवाला देते हुए कहा।

अग्रज नेता मौजूद होने के बावजूद दल के नेता के लिए उम्मीदवारी देने पर पार्टी के मूल्य, मान्यताएँ और परंपराएँ भुलाने का अर्थ न निकाला जाए, इस आशय का आग्रह उन्होंने किया। ‘मैंने पार्टी की प्रथाएँ, मूल्य और मान्यताएँ गहराई से समझी हैं। इन मूल्य, मान्यताओं और प्रथाओं के प्रति मेरा गहरा सम्मान है,’ सुहांग ने कहा। ‘लेकिन मुख्य बात पार्टी का भविष्य है, आंदोलन का भविष्य भी। इसी के लिए यह मेरा प्रयास है।’