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संघीय संसद नेपाल: क्या राष्ट्रीय सभा रास्वपा और सरकार को चुनौती देगी?

प्रतिनिधि सभा के चुनाव के बाद गुरुवार को संघीय संसद का नया अधिवेशन शुरू हो चुका है। राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के वरिष्ठ नेता वालेंद्र शाह ‘बालेन’ के नेतृत्व में नवगठित शक्तिशाली सरकार इस अधिवेशन से कई नए कानून बनाने का लक्ष्य रखती है। पिछले महीने संपन्न चुनाव से प्रतिनिधि सभा में रास्वपा के 182 सांसद चुने गए हैं। निचली सभा में दो-तिहाई बहुमत से दो सीट कम होने के बावजूद उस दल का उच्च सदन यानी राष्ट्रीय सभा में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। इस स्थिति को लेकर कई लोगों ने सवाल उठाया है कि क्या रास्वपा और उसकी नेतृत्व वाली सरकार अपनी इच्छा के अनुसार कानून पारित कर पाएगी?

शाह के प्रधानमंत्री बनने के साथ ही सरकार के शासकीय सुधार संबंधी सौबिंदु कार्यसूची में संघीय निजामती अधिनियम 45 दिनों के भीतर तैयार करने का उल्लेख किया गया है। सरकार ने डेटा नियमन, सदाचार प्रोत्साहन, सरकारी कार्यों की गति बढ़ाने जैसे विषयों पर नए कानून बनाने या मौजूदा कानून संशोधित करने की योजना सार्वजनिक कर दी है। लेकिन क्या इसके लिए केवल प्रतिनिधि सभा में बहुमत पर्याप्त होगा? राष्ट्रीय सभा के पूर्व सांसद एवं संविधान सभा के सदस्य राधेश्याम अधिकारी ने विश्वास व्यक्त किया है कि 182 सांसदों वाले प्रतिनिधि सभा के प्रतिनिधित्व वाली सरकार दोनों सदनों में बहुमत मिलने पर कानून निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है।

संविधान के धारा 111 के अनुसार प्रतिनिधि सभा से पारित होने वाला कोई भी विधेयक राष्ट्रीय सभा में भी प्रस्तुत किया जाना आवश्यक है। राष्ट्रीय सभा उन विधेयकों पर दो निर्णय कर सकती है: स्वीकृत करना, या सुझावों के साथ विधेयक को वापस भेजना, या संशोधन के साथ स्वीकृत कर भेजना। लेकिन यदि प्रतिनिधि सभा द्वारा राष्ट्रीय सभा से प्राप्त विधेयक में कोई संशोधन किया जाता है, तो राष्ट्रीय सभा वह संशोधन अस्वीकार कर सकती है। राष्ट्रीय सभा को अपने निर्णय में बजट से संबंधित विधेयक के मामले में 15 दिनों के भीतर और अन्य प्रकार के विधेयकों के मामले में प्राप्ति के दो माह के भीतर लागू करने का प्रावधान संविधान में निर्धारित है।