
समाचार सारांश
AI द्वारा तैयार किया गया। संपादकीय समीक्षा की गई।
- काभ्रेपलाञ्चोक के डेयरी किसान पांच महीनों से डेयरी विकास संस्थान से दूध का भुगतान नहीं पा सके हैं।
- संस्थान ने लगभग एक करोड़ रुपए का भुगतान पांच महीनों से लंबित रखा है जबकि किसान नियमित भुगतान की मांग कर रहे हैं।
- सरकार और किसानों के बीच भुगतान की सहमति के बावजूद क्रियान्वयन न होने से किसान आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।
20 चैत्र, काभ्रेपलाञ्चोक। काभ्रेपलाञ्चोक के डेयरी किसान सरकारी संस्थान से पांच महीनों से दूध का भुगतान प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। विभिन्न बार हुए समझौतों को तोड़ते हुए डेयरी विकास संस्थान ने किसानों द्वारा बेचे गए दूध का भुगतान पांच महीनों से बंद रखा है।
संस्थान राजधानी काठमांडू सहित अन्य बाजारों में दैनिक नकद दूध बेचता रहा है, किन्तु पांच महीनों से भुगतान न होने के कारण किसान आर्थिक तंगी में हैं।
मंडनदेउपुर नगरपालिका के आँपघारी डेयरी उत्पादक सहकारी संस्था, सरस्वती डेयरी उत्पादक सहकारी संस्था और इंद्रावती बहुउद्देश्यीय डेयरी सहकारी के माध्यम से संकलित दूध के लिए जोगिटार चिलिंग सेंटर में लगभग एक करोड़ रुपये का भुगतान बाकी है।
आँपघारी डेयरी उत्पादक सहकारी संस्था के अध्यक्ष सुरेन्द्र नेपाल के अनुसार संस्थान पर मात्र 48 लाख रुपये से अधिक का भुगतान बकाया है।
‘संस्थान पैसा नहीं देता, फिर भी हमें किसानों को 15 दिनों के अंतराल में दूध का भुगतान करना पड़ता है। हम भुगतान करते हैं, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण नियमित भुगतान में समस्या आ रही है,’ उन्होंने कहा।
यहां के किसान भुगतान के लिए कृषि मंत्री सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से मिल चुके हैं और मांग कर चुके हैं।
स्थानीय किसान सुंदर नेपाल के अनुसार, नेता किसानों को मीठे वादे तो देते हैं, पर वे व्यवहार में नहीं बदलते।
‘नियमित भुगतान न मिलने से किसान गंभीर समस्या में हैं। एक गाय और भैंस का दूध बेचकर जीवन चलाना पड़ता है। पांच महीनों से भुगतान न मिलने से परिवार पालना मुश्किल हो गया है और पशुओं के लिए दाना-चारा खरीदना नामुमकिन हो गया है,’ सुंदर ने शिकायत की।
संस्थान अनावश्यक कर्मचारी रखकर खर्च नियंत्रण नहीं कर पाने के कारण भुगतान रोक रहा है, जिससे स्थानीय किसान आक्रोधित हैं। डेयरी विकास संस्थान के भुगतान न करने पर कुछ किसान और सहकारी निजी डेयरी को दूध बेचने लगे हैं।
किसान इस समस्या को लेकर लैन्चौर स्थित डेयरी विकास संस्थान के कार्यालय पहुंचे तो संस्थान ने कोरोना महामारी और आर्थिक मंदी को भुगतान में देरी का कारण बताया।
आँपघारी डेयरी सहकारी के अध्यक्ष सुरेन्द्र नेपाल ने कहा कि संस्थान आगामी दिनों में समय पर दूध का भुगतान करने का प्रयास कर रहा है और यह समस्या पुनः नहीं होगी।
यदि भुगतान पुनः नियमित नहीं हुआ तो किसान सभी मिलकर केंद्र कार्यालय घेराव करने की चेतावनी दे रहे हैं।
सरकार और आंदोलनरत डेयरी किसान तथा डेरी उद्योग के बीच दशहरा से पहले बकाया भुगतान करने का समझौता हुआ था। कृषि और पशुपालन विकास मंत्रालय के सह सचिव पशुपति ढुंगाना तथा केन्द्रीय डेयरी सहकारी संघ, डेरी उद्योग संघ और नेपाल डेयरी एसोसिएशन के अधिकारियों के साथ हुई सहमति के बाद किसान आंदोलन स्थगित कर चुके थे।
डेयरी उत्पादक किसानों को 2082 साल असार अंत तक का भुगतान असोज 5 तक, साउन अंत तक का भुगतान असोज 30 तक और भदौ अंत तक का भुगतान कात्तिक अंत तक करने की सहमति हुई थी, लेकिन क्रियान्वयन नहीं हो सका। इस वजह से किसान पुनः आंदोलन की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
मंडनदेउपुर में दूध उत्पादक किसानों की संख्या 10,000 से अधिक है और दैनिक लगभग 25,000 लीटर दूध उपत्यका के बाजार में भेजा जाता है। काभ्रेपलाञ्चोक से ही उपत्यका को 3 लाख लीटर से अधिक दूध भेजा जाता है, पशु सेवा कार्यालय काभ्रेपलाञ्चोक के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. ब्रजकिशोर ठाकुर ने बताया।





