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सिन्धु घाटी सभ्यता के रहस्य और विशेषताएँ

सिन्धु घाटी सभ्यता ईसापूर्व 2600 से 1900 वर्षों तक फैली हुई थी और इसमें 1400 से अधिक शहर और बस्तियाँ थीं। इस सभ्यता ने ईंटों से बने घरों, सुव्यवस्थित गलियों, शौचालयों और नाली निकास प्रणाली के माध्यम से स्वच्छता में आधुनिकता का परिचय दिया था। सिन्धु सभ्यता की शासन व्यवस्था सामूहिक नेतृत्व पर आधारित थी और वहाँ कोई शासक या कुलीन वर्ग नहीं था, जिससे यह अन्य सभ्यताओं से अलग थी।

ईंटों से बने दो से तीन मंजिला घर, सीधी और साफ सुथरी गलियाँ, उत्कृष्ट नाली निकासी व्यवस्था और आधुनिक प्रकार के शौचालय इन खासियतों से आज के किसी विकसित शहर की याद दिलाते हैं। लेकिन ये सभी हजारों साल पहले की सिन्धु घाटी सभ्यता की विशेषताएँ हैं। डॉ. संगारालिंगम रमेश के अनुसार, इस सभ्यता का अस्तित्व चार हजार वर्षों से भी पहले था। इसका केंद्र सिन्धु नदी के आसपास का क्षेत्र था, जो वर्तमान में पाकिस्तान और भारत में विभाजित है।

सिन्धु घाटी सभ्यता की जीवनशैली अन्य सभ्यताओं से अलग और विशिष्ट होने के अनेक प्रमाण मौजूद हैं। डॉ. रमेश बताते हैं कि इस सभ्यता ने ईंटों से घर बनाने की प्रक्रिया शुरू की थी और यहाँ के लोग घर बनाने के लिए एक ही आकार की ईंटों का प्रयोग करते थे। शहरों को सुव्यवस्थित रूप से बनाया जाता था और प्रत्येक घर में शौचालय और नाली निकासी की व्यवस्था होती थी, जो इसके सफाई में आधुनिकता को दर्शाता है।

सिन्धु घाटी सभ्यता के भवनों के अवशेष उत्कृष्ट नागरिक सरकार के प्रमाण हैं। प्रत्येक शहर में एक निकाय (अथॉरिटी) होता था जो शहर और बस्तियों के अवसंरचना संरक्षण और निर्माण की जिम्मेदारी संभालता था। हालांकि शासन किसी एक व्यक्ति के अधीन नहीं था, लेकिन सामूहिक नेतृत्व के संकेत मिलते हैं। डॉ. रमेश के अनुसार, सिन्धु घाटी सभ्यता अन्य सभ्यताओं की तुलना में बहुत शांति प्रिय थी। अब तक यहाँ कोई बड़े युद्ध के संकेत नहीं मिले हैं।