
जेनेवा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने शरीर के अंदर एक छोटे कंप्यूटर की तरह कार्य करने वाली ‘स्मार्ट’ औषधि प्रणाली विकसित की है। सिंथेटिक डीएनए से बनी यह औषधि केवल कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करती है और स्वस्थ कोशिकाओं को सुरक्षित रखती है। यह शोध हाल ही में प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल ‘नेचर बायोटेक्नोलॉजी’ में प्रकाशित हुआ है।
यह प्रणाली कंप्यूटर के ‘लॉजिक गेट’ सिद्धांत पर आधारित है। डिजिटल बैंकिंग में ‘टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन’ की तरह, यह औषधि भी डबल स्विच प्रणाली से सक्रिय होती है। औषधि में विभिन्न प्रकार की डीएनए लाइनों होती हैं। जब यह कैंसर कोशिका की सतह पर मौजूद दो विशिष्ट ‘मार्कर’ को पहचानती है, तभी यह सक्रिय होती है। यदि इन दो में से केवल एक संकेत मिलता है या कोई संकेत नहीं मिलता, तो औषधि निष्क्रिय रहती है। इस तरह, कैंसर से मुक्त स्वस्थ कोशिकाएं सुरक्षित रहती हैं।
जैसे ही कैंसर कोशिका मिलती है, यह एक चेन प्रतिक्रिया शुरू कर देती है, जिससे ट्यूमर वाली जगह पर औषधि की मात्रा बढ़ती है और उपचार अधिक प्रभावी बनता है। पारंपरिक केमोथेरपी में कैंसर के साथ-साथ स्वस्थ कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचाया जाता है, लेकिन यह स्मार्ट औषधि स्वस्थ भागों को नुकसान नहीं पहुंचाती। यह एक साथ कई प्रकार की औषधियाँ ले जा सकती है, जो कैंसर द्वारा विकसित औषधि प्रतिरोध को तोड़ने में मदद करती है।
इस अध्ययन के प्रमुख लेखक प्रोफेसर निकोलस विन्सिन्जर के अनुसार, अब नई औषधि डिजाइन करने में कंप्यूटर और एआई का सहारा लेने की जरूरत नहीं रहेगी। यह औषधि स्वयं जैविक संकेत समझकर बुद्धिमानी से प्रतिक्रिया देने में सक्षम है। यह तकनीक भविष्य में ‘पर्सनलाइज्ड मेडिसिन’ का नया रास्ता खोलेगी। वैज्ञानिक इसे और भी विकसित करते हुए और जटिल ‘स्मार्ट’ औषधियाँ बनाने पर काम कर रहे हैं, जो शरीर के अंदर ही निर्णय लेने में सक्षम होंगी।





