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१४ नाउर और १० झारल का शिकार जारी

समाचार सारांश

  • ढोरपाटन शिकार अभयारण्य में फागुन–वैशाख के दूसरे शिकार मौसम में विदेशी शिकारी नाउर, झारल और बँदेल का शिकार कर रहे हैं।
  • इस वर्ष 14 नाउर, 10 झारल और 13 बँदेल के शिकार की अनुमति दी गई है, और विदेशी शिकारी प्रतिस्पर्धा के आधार पर अनुमति प्राप्त कर रहे हैं।
  • अभयारण्य की सुरक्षा नेपाली सेना २०७३ साल से कर रही है, और शिकारी आमतौर पर करीब 30 से 35 लाख खर्च करते हैं।

23 चैत, बागलुङ। बागलुङ के ढोरपाटन में इस समय दूसरा शिकार मौसम चल रहा है। इस दौरान विदेशी पर्यटक सक्रिय रूप से शिकार में लगे हुए हैं।

नेपाल के एकमात्र शिकार अभयारण्य ढोरपाटन में विदेशी उच्च पहाड़ी क्षेत्रों के शिकार ब्लॉकों में हैं। इस वर्ष 14 नाउर और 10 झारल के शिकार की अनुमति दी गई है, जिसका जानकारी ढोरपाटन शिकार अभयारण्य के रेंजर सागर सुवेदी ने दी है।

फागुन–वैशाख के दूसरे शिकार मौसम में कई शिकारी ढोरपाटन में शिकार में व्यस्त हैं, जबकि कुछ विदेशी शिकारी नेपाल आने की तैयारी कर रहे हैं।

रेंजर सुवेदी के अनुसार, इस वर्ष के दूसरे मौसम में 13 बँदेल के शिकार की अनुमति भी दी गई थी। ढोरपाटन अभयारण्य ने विभिन्न शिकार ब्लॉकों में वन्य प्राणी विभाग के अनुमति से शिकार की अनुमति प्रदान की है।

ग्लोबल सफारी प्रालि के माध्यम से आए अमेरिकी नागरिकों ने एक नाउर और एक झारल का शिकार कर वापस लौट गए हैं, जबकि हिमालयन सफारी नेपाल के जरिए आए अमेरिकी और डेनिश नागरिक शिकार में लगे हुए हैं, जैसा कि सुवेदी ने बताया।

विदेशी शिकारी नाउर और झारल के शिकार के लिए प्रतिस्पर्धा के जरिए राजस्व चुका कर अनुमति प्राप्त करते हैं। दूसरे मौसम के दौरान अभयारण्य के कर्मचारी और नेपाली सेना शिकार ब्लॉक में शिकारी के साथ सक्रिय रहते हैं।

दूसरे मौसम में हिमालयन वाइल्ड लाइफ आउटफिटर के माध्यम से डेनिश नागरिक को फागुने ब्लॉक में एक नाउर, एक झारल और एक बँदेल का शिकार करने की अनुमति मिली है।

साथ ही, ओपन नेपाल वाइल्ड लाइफ सफारी एंड ट्रेक प्रालि के माध्यम से अमेरिका, बेल्जियम और फ्रांस के नागरिकों को सुनदह और सेङ ब्लॉक में तीन नाउर, दो झारल और एक बँदेल के शिकार की अनुमति मिली है।

इसी प्रकार, नेपाल ट्रैवल एक्सपिडिशन प्रालि के माध्यम से घुस्तुङ ब्लॉक में तीन नाउर, तीन झारल और तीन बँदेल के शिकार के लिए रूसी, अफ्रीकी और फ्रांसीसी नागरिक नेपाल आने की तैयारी में हैं।

राष्ट्रीय निकुंज एवं वन्य जीव संरक्षण विभाग के अनुसार, वर्ष का पहला शिकार मौसम अषाढ़–मंसिर और दूसरा शिकार मौसम फागुन–वैशाख होता है, जिसमें व्यवस्थित तरीके से दो चरणों में शिकार किया जाता है। विदेशी शिकारी सहित समूह को 15 दिनों में निर्धारित ब्लॉक में शिकार करना आवश्यक होता है।

जंगल में आवास करने वाले शिकारी अभयारण्य में प्रवेश के बाद केवल निर्धारित समय में ही शिकार कर सकते हैं। साहसिक यात्रा और रोमांचकारी शिकार अनुभव के लिए ढोरपाटन विदेशी पर्यटकों के बीच लोकप्रिय गंतव्य बनता जा रहा है।

राष्ट्रीय निकुंज एवं वन्य जीव संरक्षण विभाग हर मौसम में इलेक्ट्रॉनिक बोली के माध्यम से शिकार कोटा और राजस्व दर निर्धारित करता है।

ग्लोबल सफारी प्रालि के माध्यम से सुनदह और दोगाड़ी ब्लॉक में अमेरिकी और डेनिश नागरिकों को चार नाउर, दो झारल और चार बँदेल के शिकार की अनुमति मिली है।

हिमालयन सफारी नेपाल प्रालि के माध्यम से अमेरिकी नागरिकों को दो नाउर, एक झारल और दो बँदेल के शिकार की अनुमति मिली थी, जिसमें एक नाउर और एक झारल का शिकार हो चुका है। ट्रेक एंड डीलर्स प्रालि के जरिए स्पेनिश नागरिक को एक झारल, एक नाउर और एक बँदेल की अनुमति मिली है, जैसा कि सुवेदी ने बताया।

इस वर्ष के पहले शिकार मौसम में लगभग तीन करोड़ तीन लाख राजस्व संकलित हुआ है और दूसरे मौसम में शिकारी आने का सिलसिला जारी है, जिससे राजस्व संकलन हो रहा है।

शिकारी पिछले फागुन के दूसरे सप्ताह से बन्दोबस्ती सामग्री समेत नेपाल आना शुरू कर चुके हैं। विदेशी शिकारी अक्सर हेलीकॉप्टर के माध्यम से सीधे शिकार ब्लॉक पहुंचते हैं।

2044 साल में स्थापित यह शिकार अभयारण्य पूर्वी रुकुम, बागलुङ और म्याग्दी जिलों में फैला हुआ है, लेकिन इसका मुख्यालय बागलुङ के ढोरपाटन घाटी में स्थित है।

शिकार करते समय नेपाली सहयोगी और अभयारण्य के कर्मचारी भी विदेशी शिकारी के साथ कार्यरत होते हैं। विभाग हर वर्ष नाउर और झारल के शिकार कोटे का निर्धारण करता है।

नाउर और झारल के मूल्य, ब्लॉक रिजर्वेशन, लाइसेंस, हेलीकॉप्टर और अन्य बन्दोबस्ती सामग्री तैयार करने में एक व्यक्ति लगभग 30 से 35 लाख रुपये खर्च करता है।

शिकार का अवसर केवल विदेशी और धनाढ्य व्यक्तियों के लिए ही उपलब्ध है और नेपाली इस अवसर से वंचित हैं। अभयारण्य की सुरक्षा २०७३ साल से नेपाली सेना द्वारा की जा रही है।

ढोरपाटन में शिकार के बाद नाउर के साथ तस्वीरें लेते विदेशी पर्यटक। तस्वीर: ढोरपाटन शिकार अभयारण्य