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कामुक प्रधानन्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल द्वारा महिलाओं के इतिहास और समावेशिता के महत्व पर प्रकाश डाला गया

२३ चैत्र, काठमांडू। सर्वोच्च न्यायालय की कार्यकारी प्रधानन्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल ने स्पष्ट किया कि महिलाओं ने इतिहास रचा है, लेकिन इतिहास ने उन्हें उचित स्थान नहीं दिया। ऑनलाइनखबर द्वारा आयोजित ‘‘५०–प्रभावशाली महिला–२०८२’’ कार्यक्रम में अपने भाषण के दौरान उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम मूकता को तोड़ते हैं। ‘‘हमारे समाज में महिलाओं ने वर्षों तक योगदान दिया है, पर इतिहास ने उन्हें स्थान नहीं दिया है,’’ उन्होंने कहा, ‘‘उनके योगदान की आवाज़ कभी पर्याप्त रूप से बाहर नहीं आई है। इसी तरह के कार्यक्रम इतिहास की ऐसी मूकता को तोड़ते हैं।’’

साथ ही उन्होंने बताया कि समावेशिता किसी की कृपा या उपहार नहीं है बल्कि सभी का संवैधानिक अधिकार है। ‘‘समावेशिता कोई उपहार नहीं हैं, यह हमारे संविधान द्वारा सुनिश्चित व्यवस्था है जो समानता के अस्तित्व को स्वीकार करती है,’’ उन्होंने कहा, ‘‘परंतु परिवर्तन साहसिक कदमों से ही संभव है और यही इस पहल का उदाहरण है।’’ उन्होंने ऑनलाइनखबर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के महिलाओं की साहसिक कहानियों को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए आभार व्यक्त किया।