
दिर्घकाल से स्थिरता और महत्वाकांक्षा का केंद्र रहे सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, क़तर, ओमान और बहरीन जैसे खाड़ी राष्ट्र बड़ी संख्या में निवेशकों, बड़ी कंपनियों और कुशल श्रमिकों को आकर्षित करते रहे हैं। इन देशों के हवाई अड्डे विश्वव्यापी ‘हब’ के रूप में विकसित हुए हैं, जबकि उनके शहर वित्तीय और पर्यटन केंद्र बनने में सफल रहे हैं। लेकिन, अमेरिका पर इज़राइल द्वारा इरान के खिलाफ छेड़े गए युद्ध ने इस प्रभाव को गहरी चुनौती दी है। इरानी मिसाइलें और ड्रोन इस क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं, साथ ही वहां की गैर-सैन्य और ऊर्जा संरचनाओं पर भी हमले हो रहे हैं। कुछ देशों ने जल्दी से जनजीवन को सामान्य करने के प्रयास शुरू किए हैं। उदाहरण के तौर पर, क़तर सरकार ने घर से काम करने की अनुमति वापस लेकर विश्वविद्यालयों में कक्षाएं पुनः संचालित की हैं। फिर भी, कई विश्लेषकों के अनुसार, खाड़ी देशों को भले ही युद्ध से कुछ झटका लगे, यह उन्हें अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करेगा। वाशिंगटन स्थित मिडिल ईस्ट इंस्टिट्यूट के एलेक्स व्हैटन ने कहा, “आप इरान से होने वाले हमलों को रोक नहीं सकते क्योंकि यह भू-राजनीति और समीपता से जुड़ा मुद्दा है। जिन देशों का उसमें सीधे कोई हिस्सा नहीं था, वे भी अग्रिम मोर्चे पर आ गए हैं और बड़ी आर्थिक क्षति झेल रहे हैं।”




