
२४ चैत, काठमाडौं। श्रम संस्कृति पार्टी के अध्यक्ष एवं प्रतिनिधि सभा सदस्य हर्क साम्पाङ द्वारा दार्चुला में झोलुङ्गे तुइन के विस्थापन हेतु दान संकलन करने की घोषणा के बाद कई लोगों ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अकेला पुल बनाने पर आपत्ति जताई है। दार्चुला से निर्वाचित प्रतिनिधि सभा सदस्य गणेश ठगुन्ना ने साम्पाङ की पहल को ‘स्टंटबाजी और हवा-हवाई बातें’ बताते हुए आलोचना की है। नेपाल सरकार के पूर्व सचिव भीम उपाध्याय ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय नदियों पर पुल निर्माण करते समय कूटनीति, सीमा सुरक्षा तथा भूगोल जैसे विषयों का ध्यान रखना आवश्यक है। उपाध्याय ने फेसबुक पर लिखा, “ऐसे असंभव कार्यों में भी बिना सोचे-समझे दौड़ना, और अन्य लोग भावुक होकर उनका अनुसरण करते देख रहा हूँ।”
मंगलवार को दार्चुला पहुंचकर साम्पाङ ने झोलुङ्गे पुल कि शिलान्यास की है। दार्चुला के प्रमुख जिल्ला अधिकारी अनिल पौडेल ने बताया, “माननीय ने ब्यास गाउँपालिकाको वडा नम्बर २ स्थित दुम्लिङकाठामा पुल शिलान्यास किया है, जो नेपाल-भारत की सीमा नदी नहीं है।” महाकाली नदी में न होकर घट्टे खोलामा पुल बनने की जानकारी ब्यास गाउँपालिका के अध्यक्ष मंगलसिंह धामी ने दी है। ब्यास गाउँपालिका-१ के वडा अध्यक्ष अशोक ब्यासी ने कहा, “स्थानीय भूगोल को न जानने वाले लोग महाकाली नदी पर पुल बनेगा ऐसा गलत अफवाह फैला रहे हैं।”
दार्चुला के सांसद ठगुन्ना ने कहा कि वहां झोलुङ्गे पुल की आवश्यकता जरूर है, लेकिन साम्पाङ अनावश्यक प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “उनका प्रयास सकारात्मक है। देश-विदेश में रह रहे नेपालीजनों को महाकाली नदी में पुल बनाने तथा तुइन विस्थापित करने का आश्वासन देना केवल स्टंटबाजी है।” श्रम संस्कृति पार्टी के महासचिव आरेन राई ने कहा कि दार्चुला के लोगों की सुविधा के लिए स्वैच्छिक सहयोग से झोलुङ्गे पुल बनाने की योजना है। साम्पाङ ने भी अपने किसी राजनीतिक स्वार्थ की बात से इनकार किया। उन्होंने फेसबुक में लिखा, “दार्चुला के पुल के निर्माण में मेरा कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है।”
लगभग १२० मीटर लंबे पुल के निर्माण में अनुमानतः एक करोड़ रुपैयाँ खर्च आने का अनुमान ब्यास गाउँपालिका के निप्तित प्रमुख प्रशासकीय अधिकृत कृष्णानन्द बडुले दिया है। बडुले बताया कि साम्पाङ ने पुल निर्माण हेतु पालिका से अनुमति भी प्राप्त कर ली है।





