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मंत्रालयों की संख्या घटाई जा रही है, सचिवों का प्रबंधन कैसे होगा?

समाचार सारांश: प्रधानमंत्री बालेन शाह ने मंत्री परिषद् के सदस्यों की संख्या २२ से घटाकर १७ करने की योजना बनाई है। इसी क्रम में, सरकार सचिवालय की पदसंख्या में भी कटौती करने की तैयारी में है। पुनर्संरचना व्यवस्थापन सचिवालय की स्थापना कर कर्मचारी प्रबंधन और सेवा की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए संक्रमण मार्गचित्र बनाने की योजना है। २३ चैत्र, काठमांडू। प्रधानमंत्री पद ग्रहण के बाद लगभग डेढ़ सप्ताह पहले बालेन शाह ने १५ सदस्यीय मंत्रिपरिषद् का गठन किया था। वर्तमान में मंत्रालयों की संख्या २२ है, जिसमें सरकार कुछ मंत्रियों को विपरीत क्षेत्रों से जुड़े दो मंत्रालयों की जिम्मेदारी देकर पुनर्गठन कर रही है। मंत्रिपरिषद् गठन के कुछ समय बाद ही १०० बिंदुओं वाली कार्ययोजना तैयार की गई थी, जिसमें ‘प्रशासन सुधार, पुनर्संरचना और मितव्ययिता’ के तहत मंत्रालयों की संख्या घटाकर १७ करने का लक्ष्य रखा गया है।

उद्योग, वाणिज्य तथा आपूर्ति मंत्रालय और प्रधानमंत्री तथा मंत्री परिषद् कार्यालय को मंत्रालय जैसी भूमिका दी गई है, जिससे ये मंत्रालय मिलाकर मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। एक महीने के भीतर मंत्रालयों की संख्या घटाने की योजना के साथ पदसंख्या में भी प्रबंधन किया जाएगा। इसके लिए पुनर्संरचना व्यवस्थापन सचिवालय का गठन होगा। प्रधानमंत्री और मंत्री परिषद् कार्यालय में स्थित यह सचिवालय दो मुख्य कार्य करेगा: एक, सेवा में किसी भी बाधा को रोकने के लिए कर्मचारियों के प्रमोशन का प्रबंधन; दो, सेवा की निरंतरता सुनिश्चित करने हेतु संक्रमण मार्गचित्र तैयार करना। मंत्रालयों की संख्या कम करने की योजना के साथ ही सचिवों की संख्या में भी बड़ी कटौती होने की संभावना है। वर्तमान में प्रधानमंत्री और मंत्री परिषद् कार्यालय में मुख्य सचिव के अलावा चार सचिव कार्यरत हैं।

प्रधानमंत्री कार्यालय से सम्बद्ध नेपाल ट्रस्ट, सार्वजनिक खरीद अनुश्रवण कार्यालय, सतर्कता केंद्र जैसे छोटे क्षेत्र वाले निकायों में भी सचिव पद निर्धारित हैं। अर्थ मंत्रालय के पास अर्थ और राजस्व संभालने हेतु दो सचिव हैं, जबकि महालेखा नियंत्रक कार्यालय के पास भी अलग सचिव पद है। स्वास्थ्य मंत्रालय में स्वास्थ्य और प्रशासन की जिम्मेदारी के अनुसार सचिव व्यवस्था है। मंत्रालयों के अलावा विभिन्न आयोग, निकाय और संवैधानिक अंगों में भी एक से अधिक सचिवों की व्यवस्था है। जल तथा ऊर्जा आयोग, अक्षर, निर्वाचन आयोग, लोक सेवा आयोग जैसे निकायों के पास सचिव पद निर्धारित हैं। महालेखा परीक्षक कार्यालय, महान्यायाधिवक्ता कार्यालय और संघीय संसद सचिवालय में चार-चार सचिव हैं। इन निकायों की तुलना में कार्यपालिका अन्तर्गत निकायों के सचिवों की संख्या पुनः समीक्षा के प्राथमिकता में होगी, प्रधानमंत्री कार्यालय के एक उप सचिव ने बताया। अब पदसंख्या कटौती के दौरान विलय किए गए मंत्रालयों से केवल एक सचिव ही रहेगा। जिन मंत्रालयों में दो या अधिक सचिव हैं, उनकी संख्या भी घटेगी। जिन निकायों के लिए सचिव पद आवश्यक नहीं होगा, उनके पद भी पुनः समीक्षा के दायरे में आएंगे।

प्रधानमंत्री बालेन शाह के नीति, प्रशासन और सुशासन सलाहकार सुदिप ढकाल ने मंत्रालयों की संख्या घटाने हेतु समिति गठित होने की जानकारी दी है। उन्होंने कहा, ‘समिति बन चुकी है और काम कर रही होगी। अभी तक अतिरिक्त जानकारी नहीं मिली है।’ मंत्रालयों की संख्या घटाई जा रही है: ७ मंसिर २०७८ को सरकार ने कार्यविभाजन नियमावली संशोधित करते हुए २२ मंत्रालय बनाए थे, जिनमें सभी में सचिव पद थे। पाँच मंत्रालय घटाने के बाद कम से कम पाँच सचिव स्वतः हट जाएंगे। प्रधानमंत्री और मंत्री परिषद् कार्यालय के एक स्रोत के अनुसार फिलहाल तत्काल सचिवों की संख्या में कटौती नहीं की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, आगामी असार माह के अंत तक चार सचिव सेवानिवृत्त होंगे। सचिवों की संख्या घटाने की रणनीति के अनुसार, पद खाली होने पर नई नियुक्ति नहीं होगी। सचिव पद के लिए बढ़ोत्तरी की प्रतीक्षा कर रहे सहसचिवों पर कुछ समय तक इसका असर पड़ेगा और कई सहसचिव ५८ वर्ष की आयु सीमा तक पहुंचकर सचिव बने बिना ही सेवानिवृत्त हो जाएंगे।

संरचना में संभावित परिवर्तन: संघीय स्तर पर वर्तमान में ६३ और सात प्रदेशों में प्रमुख सचिव सहित कुल ७० सचिव पद हैं। प्रदेशों में तैनात प्रमुख सचिव भी संघीय निजामती सेवा के अंतर्गत आते हैं। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सचिव के समकक्ष १२वें स्तर पर चार अधिकृत हैं। सहसचिवों की संख्या लगभग ६५० है। अब तक सरकार ने मुख्य सचिव से सचिव तक की पदसंख्या निर्धारित नहीं की है। १०० बिंदुओं वाली कार्ययोजना के अनुसार पुनर्संरचना व्यवस्थापन सचिवालय शेष रूपरेखा तैयार करेगा। कुछ महीनों के भीतर संघीय संसद में पेश किया जाने वाला नियामक विधेयक कर्मचारी प्रबंधन के विभिन्न रूप और मानदंड निर्धारित करेगा।

पूर्व की रिपोर्ट उपयोगी हो सकती है: संघीय निजामती सेवा में कर्मचारी संख्या आवश्यकता से अधिक होने का प्रश्न बार-बार उठता रहा है। इसके अतिरिक्त, सचिव पद बढ़ाने में निजी स्वार्थ भी शामिल होने की शिकायतें हैं। तीन वर्ष पहले भी सचिवों की संख्या को लेकर यही प्रश्न उठे थे, जिसके बाद सरकार ने पुनः समीक्षा हेतु समिति बनाई थी। प्रधानमंत्री और मंत्री परिषद् कार्यालय के तत्कालीन सचिव लक्ष्मण अर्याल की अध्यक्षता में बनी समिति ने २०७९ में सचिवों की संख्या घटाने और कुछ जगहों पर सचिव और सहसचिव के व्यापक प्रबंधन के सुझाव दिए थे। समिति की रिपोर्ट के अनुसार, जिन मंत्रालयों में दो सचिव हैं वहां संख्या घटनी चाहिए। उद्योग, कृषि एवं पशुपालन, स्वास्थ्य, शिक्षा, विज्ञान प्रौद्योगिकी और ऊर्जा मंत्रालयों में वर्तमान में दो-दो सचिव हैं। समिति ने सचिवों की संख्या को ५० तक सीमित करने, अतिरिक्त सचिव पद बनाए रखने और सहसचिवों की संख्या को ६२८ तक सीमित करने की सिफारिश की थी। साथ ही कुछ आयोगों के अनावश्यक सचिव पद काटकर अतिरिक्त सचिव बनाए रखने का सुझाव भी दिया गया था। इसके अलावा, एक से अधिक सहसचिव वाले मंत्रालयों को छोड़कर अन्य निकायों में अतिरिक्त सचिव पदों का प्रावधान करने की सिफारिश की गई थी। इसी प्रकार संवैधानिक निकायों और दो से अधिक सहसचिव वाले निकायों में भी अतिरिक्त सचिव पद की व्यवस्था करने का सुझाव दिया गया था। सचिवों के पदोन्नति के लिए ५० वर्ष की उम्र पूरी करने वाले, कोई दंडात्मक कार्रवाई न होने वाले और स्वच्छ छवि वाले व्यक्तियों को प्राथमिकता देने के लिए कानूनी व नीतिगत व्यवस्था करने की बात भी कही गई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था, ‘राजपत्रांकित प्रथम श्रेणी या इसके समकक्ष कर्मचारियों को क्लस्टर पद्धति के अनुसार तैनात करना, प्रदेश मंत्रालयों की संख्या निर्धारित करना आदि सुधार आवश्यक हैं।’