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प्रधानमंत्री से बागमती प्रदेश ने संवैधानिक अधिकारों की मांग की

२५ चैत, हेटौंडा। बागमती प्रदेश सरकार ने संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन) से मांगे हैं। प्रदेशसभा के १७वें अधिवेशन की पहली बैठक को मंगलवार को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री इन्द्रबहादुर बानियाँ ने प्रदेश सरकार के संविधान प्रदत्त अधिकारों की मांग की। चुनाव के समय जनकपुर से प्रधानमंत्री शाह द्वारा कहा गया था कि ‘काठमाडौं के अधिकार मांगने के लिए दौड़ना नहीं पड़ेगा, केवल पशुपतिनाथ के दर्शन के लिए जाऊंगा’। इस बात को याद दिलाते हुए मुख्यमंत्री बानियाँ ने प्रदेश को संविधान द्वारा दिए गए सभी अधिकार देने का अनुरोध किया।

‘प्रदेश को संविधान द्वारा मिले अधिकार हमें तब भी नहीं मिले जब कांग्रेस, एमाले और माओवादी जैसे लोकतांत्रिक दल सरकार चला रहे थे, पर अब यह जनतादत्त सरकार है, जो संघवाद के प्रति प्रतिबद्ध है। हमें भरोसा है कि चुनाव से पहले जो कहा गया था, उसी आधार पर ये अधिकार प्रदेश को मिलेंगे,’ बानियाँ ने कहा। उन्होंने संघीय सरकार द्वारा नियुक्त प्रमुख सचिव और सचिवों के कार्यसम्पादन और असामयिक फेरबदल पर असंतोष भी जताया।

मुख्यमंत्री बानियाँ ने कहा कि समय पूरा होने से पहले कर्मचारियों के फेरबदल से कार्य में हमेशा बाधा आती है। प्रमुख सचिव और सचिवों के फेरबदल से पहले मुख्यमंत्री की सलाह लेना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रमुख सचिव को प्रदेश में आने के बाद कम से कम दो वर्ष तक नहीं हटाया जाना चाहिए। ‘प्रधानमंत्री महोदय जब मेयर थे तब प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी के कारण काम नहीं हो पाया था, यह हम सभी के लिए दुर्भाग्य की बात थी। हमें विश्वास है कि वह इसे समझते हुए कार्य करेंगे,’ उन्होंने कहा।

मुख्यमंत्री बानियाँ ने बताया कि बागमती प्रदेश भ्रष्टाचार मुक्त, सुशासनयुक्त, पारदर्शी, जवाबदेह और जिम्मेदार सरकार के रूप में जनता के प्रति उत्तरदायी होकर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि नागरिकों की आशाओं के अनुरूप काम करने के लिए संघीय सरकार के साथ सहयोग करते हुए प्रदेश सरकार आगे बढ़ना चाहती है।