Skip to main content

आक्रमण रोकने की अपील के साथ कतार ने अमेरिका-ईरान युद्धविराम का स्वागत किया

कतार की मंत्रिपरिषद् ने अमेरिका-ईरान युद्धविराम का स्वागत करते हुए क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री मार्ग की सुरक्षा पर बल दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के १० बिंदु प्रस्ताव को आधार मानते हुए दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की है। ईरान ने अपने आणविक कार्यक्रम से जुड़ी पाबंदियों को हटाने, आर्थिक राहत, वित्तीय क्षतिपूर्ति और अमेरिकी लड़ाकू सेनाओं की वापसी की मांग की है। २५ चैत, काठमाडौं।

पाकिस्तान की मध्यस्थता में बुधवार सुबह जल्दी घोषित अमेरिका-ईरान युद्धविराम का कतार की मंत्रिपरिषद् ने स्वागत किया है। मंत्रिपरिषद् ने एक विज्ञप्ति जारी कर कहा, ‘‘क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर करने वाले सभी प्रकार के शत्रुतापूर्ण कार्य और गतिविधियां तत्काल रोकनी होंगी, राज्य की सार्वभौम सत्ता का सम्मान किया जाना आवश्यक है, और समुद्री मार्ग की सुरक्षा, जलयात्रा की स्वतंत्रता तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।’’

युद्धविराम की घोषणा के कुछ घंटे बाद भी बुधवार को बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत के खिलाफ हमले जारी थे, इसी बीच कतार की यह विज्ञप्ति आई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के १० बिंदु प्रस्ताव को आधार मानते हुए दो सप्ताह के लिए युद्धविराम की घोषणा की तथा ईरान पर चल रहे बमबारी और आक्रमण अभियानों को फिलहाल स्थगित कर दिया।

ईरान के जारी १० बिंदु प्रस्ताव में विश्व के महत्वपूर्ण तेल निर्यात मार्गों में से एक माना जाने वाला हर्मुज जलसंधि में अमेरिकी हस्तक्षेप के बिना ईरान के निरंतर नियंत्रण को शर्त के रूप में रखा गया है। ईरान के प्रस्ताव का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु उसका आणविक कार्यक्रम है, जो लंबे समय से दोनों देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच विवाद का केंद्र बना हुआ है। तेहरान ने अपने आणविक कार्यक्रम को लेकर लगाए गए सभी प्रतिबंध हटाने और तत्काल आर्थिक राहत देने की मांग की है। वर्षों पुराने अमेरिकी प्रतिबंधों ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाला है। इसी तरह, संघर्ष के दौरान हुए नुकसान की पूर्ति के लिए अमेरिका से वित्तीय क्षतिपूर्ति की भी ईरान ने मांग की है। साथ ही, अपने क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू सेनाओं की पूर्ण वापसी और लेबनान सहित मध्य पूर्व के क्षेत्रों में जारी युद्ध समाप्त करने की भी शर्त ईरान ने रखी है।