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देउवा दंपति के खिलाफ कौन से सबूत मिलने पर जांच शुरू हुई?

समाचार सारांश

संपादकीय रूप से समीक्षा किया गया।

  • सम्पत्ति शुद्धिकरण अनुसंधान विभाग ने पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउवा और उनकी पत्नी डॉ. आरजु राणा देउवा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।
  • जिला अदालत काठमांडू से गिरफ्तारी की अनुमति लेकर देउवा दंपती की चल-अचल संपत्ति में असामान्य लेन-देन पाए जाने पर जांच जारी है।
  • देउवा दंपती के पुत्र जयवीर द्वारा खरीदे गए लगभग ७३ रोपनी जमीन के स्रोत संदिग्ध पाए जाने पर विभाग ने अतिरिक्त जांच शुरू की है।

२५ चैत, काठमांडू। पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउवा, उनकी पत्नी एवं पूर्व विदेश मंत्री डॉ. आरजु राणा देउवा तथा उनके परिवार में असामान्य लेन-देन पाए जाने के बाद संपत्ति शुद्धिकरण अनुसंधान विभाग ने देउवा दंपती के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।

संपत्ति शुद्धिकरण अनुसंधान विभाग ने जिला अदालत काठमांडू से शेरबहादुर और आरजु के खिलाफ गिरफ्तारी की अनुमति प्राप्त की है।

जिला अदालत से जुड़े सूत्रों के अनुसार, ‘उनकी चल-अचल संपत्ति की जांच के दौरान असामान्य अर्जन पाए जाने के कारण संपत्ति शुद्धिकरण के आरोप में जांच शुरू की गई है।’

सम्पत्ति शुद्धिकरण विभाग तथा नेपाल पुलिस के केंद्रीय अनुसन्धान ब्यूरो के कुछ अधिकारी देउवा दंपती की छुपाई गई संपत्ति से संबंधित जानकारी इकट्ठा कर रहे थे। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘इस प्रक्रिया के दौरान कुछ अचल संपत्ति मिलने के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया है।’

विभाग के एक सूत्र ने बताया कि पिछले एक-डेढ़ साल में शेरबहादुर और आरजु के अकेले पुत्र जयवीर ने काठमांडू उपत्यका और आसपास लगभग ७३ रोपनी ज़मीन खरीदी, जिसका स्रोत सबसे ज्यादा संदिग्ध है। सूत्र ने कहा, ‘यहीं से आगे की जाँच के दौरान और भी संदिग्ध लेन-देन सामने आए हैं।’

कुछ दिन पहले विभाग ने बुढानिलकण्ठ स्थित देउवा निवास पर सुरक्षा कर्मी भेजकर आगजनी के अवशेष को तोड़ने से रोक दिया था

शाही शासनकाल के कुछ सीमित दौर को छोड़कर, प्रजातंत्र पुनर्स्थापना के बाद से निरंतर सार्वजनिक पदों पर रहे शेरबहादुर देउवा कई बार सत्ता में आ चुके हैं और पाँच बार प्रधानमंत्री रहे हैं।

२०७० के दशक के बाद कांग्रेस के राजनीति में डॉ. आरजु देउवा ने भी सक्रिय रूप से प्रवेश किया। वे दो बार संसद में पहुंचीं और एक बार विदेश मंत्री रहीं।

राजनीति के अलावा अन्य क्षेत्र में कम देखे गए देउवा दंपती पर अवैध संपत्ति अर्जन के आरोप सहित दर्जनों शिकायत अख्तियार तथा संपत्ति शुद्धिकरण विभाग में दर्ज हैं। सूत्रों के अनुसार अब तक मामले में उचित जांच नहीं हो सकी है।

संपत्ति शुद्धिकरण अनुसंधान विभाग के सूत्रों के अनुसार, फिलहाल जयवीर द्वारा खरीदी गई जमीन, देउवा दंपती की घर-जमीन और बैंक खातों की जांच हो रही है। विभाग ने कहा कि जांच के दौरान यह भी पता चला कि विदेश में रहने वाले जयवीर जेनजी आंदोलन के बाद नेपाल हवाई अड्डे पर कानूनी रास्ते से नहीं आए।

विभाग बुढानिलकण्ठ की जमीन और वहां बने घर की भी जांच करने की तैयारी कर रहा है। उनकी सचिवालय की तरफ से दावा किया गया है कि यह जमीन डॉ. आरजु के मायके ने खरीदी और देउवा परिवार को दी गई।

देउवा दंपती फिलहाल ‘उपचार के लिए’ हांगकांग में हैं। पूर्व प्रधानमंत्री देउवा के निजी सचिव भानु देउवा ने कहा कि उन्हें सरकार द्वारा हो रही जांच की कोई जानकारी नहीं है और गिरफ्तारी अनुमति के बारे में भी पता नहीं है। उन्होंने कहा, ‘वे दोनों उपचार के सिलसिले में बाहर हैं, इसके अलावा कोई खबर नहीं है।’

कदम-कदम पर संपत्ति शुद्धिकरण क्यों?

दो साल पहले संशोधित संपत्ति शुद्धिकरण अनुसंधान कानून के तहत, बिना किसी अपराध में संलिप्तता के कोई व्यक्ति संपत्ति शुद्धिकरण के आरोप में जांच के दायरे में नहीं लाया जा सकता।

यदि प्रारंभिक आरोप मिलते हैं, तभी उसकी अतिरिक्त संपत्ति अर्जन की शंका के आधार पर संपत्ति शुद्धिकरण के आरोप में जांच की जा सकती है।

लेकिन अब तक देउवा दंपती के विरुद्ध किसी आपराधिक आरोप के तहत जांच या मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। दंपती पर राजनीतिक शक्ति और सत्ता के दुरुपयोग से संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगते रहे हैं।

शेरबहादुर देउवा के प्रधानमंत्री काल में समानांतर भूमिगत गिरोह संचालित करने के आरोप झेलने वाली आरजु पर सार्वजनिक पद पर नियुक्ति से लेकर सरकारी पद के दुरुपयोग तक के आरोप लगे हैं।

नकली शरणार्थी प्रकरण में भी नाम जुड़ने वाली आरजु पर अवैध संपत्ति अर्जन के आरोप लगे हैं। जेनजी आंदोलन के बाद आगजनी से प्रभावित देउवा के घर के कुछ अवशेष विभाग ने प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे थे।

दर्जनों शिकायतें लंबित

सचिव नारायण दुवाड़ी से मिलने अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग पहुंचे गृहमंत्री सुदन गुरूङ ने पिछले सप्ताह अख्तियार के कार्यस्थल में प्रमुख आयुक्त प्रेमकुमार राई से मुलाकात कर वहाँ दर्ज संवेदनशील शिकायतों की जांच में रुचि जताई और जरूरत पड़ने पर सहयोग का आश्वासन दिया।

प्रधानमंत्री कार्यालय और गृह मंत्रालय के उच्च अधिकारियों ने कहा कि नेपाल टेलिकॉम के बिलिंग प्रणाली की वार्षिक मरम्मत ठेका (एएमसी) के दौरान टेलिकॉम अधिकारी और देउवा परिवार के बीच लेन-देन से संबंधित विवरण अख्तियार को दिए गए थे।

सिंगापुर स्थित एक सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के आपूर्तिकर्ता ने भी विस्तृत कारोबारी दस्तावेज़ों के साथ शिकायतें दीं, मगर अख्तियार ने मामले में व्यापक जांच और कार्रवाई नहीं की है।

उस ठेके में सहजीकरण करने वाले तत्कालीन संचार सचिव डॉ. बैकुण्ठ अर्याल बाद में मुख्य सचिव बने। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शंकरदास बैरागी को सत्ता में लाकर तत्कालीन सरकार ने दो दिन बाद अवकाश निपटाने वाले बैकुण्ठ अर्याल को मुख्य सचिव पद पर नियुक्त किया था। कहा जाता है, इस मामले में देउवा परिवार की भूमिका रही।

अर्याल को मुख्य सचिव बनाने में सक्रिय रहे सुनिल पौडेल और विकल पौडेल भ्रष्टाचार के आरोपों में हिरासत में हैं। इनके खिलाफ लगभग दर्जन भर भ्रष्टाचार के मामले सर्वोच्च अदालत और विशेष अदालत में विचाराधीन हैं। बिलिंग प्रणाली के ठेका अनियमितता मामले के शुरू होने के बाद अख्तियार ने बाकी शिकायतों पर जांच नहीं की।

देउवा दंपती के पुत्र जयवीर पर भी राज्य शक्ति के दुरुपयोग से कई सरकारी निर्णयों पर प्रभाव डालने के आरोप हैं। वे सुरक्षा मुद्रण केंद्र, पेमेंट गेटवे और नेपाल टेलिकॉम की बिलिंग प्रणाली से जुड़े हैं।

अख्तियार ने ऐसी अनियमितताओं पर कुछ व्यक्तियों और राजनेताओं के खिलाफ औपचारिक पत्राचार कर जांच शुरू की थी। नेपाल टेलिकॉम के पूर्व प्रबंध निदेशक सुनिल पौडेल और सुरक्षा मुद्रण केंद्र के पूर्व कार्यकारी निदेशक विकल पौडेल के खिलाफ मुकदमों में यह विवरण शामिल हैं।

सुनिल पौडेल के खिलाफ अख्तियार ने कहा था कि उनके विभिन्न सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों तथा देशी और विदेशी राजनैतिक और व्यापारिक व्यक्तियों से जुड़े होने की जानकारी मिली है, इसलिए उन्हें अलग से जांच अधिकारी सौंपा गया है।

विकल पौडेल के मामले में अख्तियार ने विशेष अदालत में कहा था कि उनके अनेक सरकारी, गैर सरकारी संस्थानों तथा देशी-विदेशी राजनैतिक और व्यापारिक व्यक्तियों से जुड़े होने की जानकारी मिलने के कारण उन्हें अलग जांच अधिकारी नियुक्त कर के जांच की जाती रही है।

दोनों मामलों में अख्तियार ने अन्य लोगों की जांच का आश्वासन दिया, पर नाम सार्वजनिक नहीं किया। विभाग के अनुसार, इन अनियमितताओं में डॉ. आरजु देउवा और जयवीर का भी नाम जुड़ा है। सूत्र ने कहा, ‘अतिरिक्त जांच से और भी तथ्य सामने आए हैं।’