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एमाले नेता भट्टराई ने कहा – बादल की पुरानी शैली एमाले की नीति नहीं हो सकती

२६ चैत, बुटवल। नेकपा एमाले के कार्यवाहक अध्यक्ष एवं संसदीय दल के नेता रामबहादुर थापा बादल की अभिव्यक्तियों पर पार्टी केन्द्रीय सदस्य खिमलाल भट्टराई ने असंतोष व्यक्त करते हुए विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने सामाजिक संजाल के माध्यम से कहा है कि पार्टी संसदीय दल के नेता बादल द्वारा प्रयुक्त भाषा, शैली और दृष्टिकोण एमाले की नीति और परंपरा के अनुरूप नहीं है। भट्टराई ने बताया कि चैत २५ तारीख को पोखरा में जिला समिति द्वारा आयोजित बैठक में बादल द्वारा इस्तेमाल किए गए ‘कब्जा, आक्रमण, दुश्मन’ जैसे शब्दों का एमाले के विचार और अभ्यास से कोई मेल नहीं है।

बादल ने उपाध्यक्ष विष्णुप्रसाद पौडेल पर कटाक्ष करते हुए आरोप लगाया था कि पार्टी की नीति के बाहर नहीं जाना चाहिए और पार्टी के अंदर ही एमाले के खिलाफ सक्रियता की जा रही है। 이에 भट्टराई ने कहा, ‘हमारे पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष एवं प्रतिनिधि सभा दल के नेता कमरेड रामबहादुर थापा ‘‘बादल’’ ने चैत २५ तारीख को पोखरा में जिला समिति द्वारा आयोजित बैठक में जो भाषा, शैली और दृष्टिकोण अपनाए, वह पार्टी नीति और एमाले की प्राथमिक शिक्षा के विरुद्ध है।’ उन्होंने बताया कि हम लोगों की राजनीति जनतांत्रिक बहुदलीय जनवाद के मार्गदर्शन में होती है और कब्जा एवं आक्रमण जैसी भाषा पार्टी की नीति बिलकुल भी नहीं है।

भट्टराई ने स्पष्ट किया, ‘कब्जा, आक्रमण, दुश्मन जैसे शब्द कभी भी एमाले के नहीं रहे। जनतांत्रिक बहुदलीय जनवाद ऐसा बिल्कुल नहीं है। हम किसी चीज पर कब्जा करने की बजाय जनतंत्र का दिल जीतकर प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ते हैं। कब्जा हमारी नीति नहीं है। हम आक्रमण नहीं करते, बल्कि शांतिपूर्ण संघर्ष के माध्यम से जीत सुनिश्चित करते हैं। हम प्रतिस्पर्धा करते हैं, लेकिन शत्रुता नहीं। यह ही एमाले की लड़ाई की नीति है।’ उन्होंने कहा कि उनका कार्यवाहक अध्यक्ष को समझाना नहीं था, परन्तु युद्धकालीन शैली की भाषा को पार्टी की नीति बताना गलत होगा।

भट्टराई ने कहा, ‘कार्यवाहक अध्यक्ष को कोई सीख देने की कोशिश नहीं कर रहा। केवल इतना कहना चाहता हूँ कि उनकी पुरानी धड़धड़ाहट हमारे पार्टी की नीति नहीं हो सकती।’ उन्होंने बादल को पार्टी की वर्तमान स्थिति और कार्यकर्ताओं के परिचालन के विभिन्न तरीकों को समझने में असमर्थ बताया। उन्होंने कहा, ‘उन्होंने आज नेकपा एमाले किस स्थिति में है, उसका मूल्यांकन करने और किस प्रकार कार्यकर्ता और शुभचिंतकों को परिचालित करना है, यह समझने में असफल रहे। उन्हीं में पूरी तरह युद्धकालीन भाषा, शैली और सोच की प्रवृत्ति दिखाई दी।’

भट्टराई ने बताया कि वे पहले बादल को एक सिद्धांतवादी, कम बोलने वाले एवं सभ्य नेता के रूप में देखते थे, परन्तु हाल की अभिव्यक्तियों से उन्हें दुःख पहुंचा है। उन्होंने पार्टी की वर्तमान जटिल स्थिति में नेतृत्व की भूमिका कमजोर नजर आने पर शीर्ष नेतृत्व से भी ध्यान देने की अपील की। केपी ओली के निकटस्थ माने जाने वाले भट्टराई की इन अभिव्यक्तियों के बाद पार्टी के अंदर नेतृत्व शैली और भावी दिशा को लेकर बहस और अधिक तेज हो सकती है। बादल को पार्टी में काबा अध्यक्ष एवं समानुपातिक सांसद से दल के नेता बनाने को लेकर भी आंतरिक विवाद बढ़ रहा है। इससे पहले उपाध्यक्ष विष्णु पौडेल ने भी बादल की संसद में कही गई बातों की आलोचना की थी। पार्टी सचिवालय की बैठक में भी बादल की अभिव्यक्तियों पर चर्चा हुई और निष्कर्ष निकाला गया कि वे पार्टी के सिद्धांत और नीति के विरुद्ध हैं।