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गण्डकी कांग्रेस के चुनावी समीक्षा बैठक में गगन कुमार थापा घिरे सवालों में

२७ चैत, पोखरा। नेपाली कांग्रेस गण्डकी प्रदेश कार्यसमिति ने शुक्रवार पोखरा में ‘‘निर्वाचन समीक्षा तथा कांग्रेसको आगामी बाटो’’ विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में सभापति गगनकुमार थापा भी उपस्थित थे। लेकिन, पूरे कार्यक्रम के दौरान सभापति थापा का चेहरा न तो प्रसन्न दिखा और न ही कोई उत्साह प्रकट हुआ। समीक्षा कार्यक्रम में प्रदेश के जिला सभापति, प्रत्यक्ष एवं समानुपातिक उम्मीदवारों तथा केन्द्रीय पदाधिकारियों ने अपने विचार रखे। गगन ने सभी के विचार ध्यानपूर्वक सुने, फिर भी उनका उत्साह कम प्रतीत हुआ।

फागुन २१ को चुनाव से पहले माघ २३ को प्रदेश भेलामा भाग लेने पोखरा आए गगन की ‘‘भाषा’’ और ‘‘शरीर की भाषा’’ बिल्कुल अलग थी। चुनाव प्रचार के दौरान ‘‘अब कि बार, गगन सरकार’’ का नारा लगाकर कार्यकर्ताओं को उत्साहित करते हुए उन्होंने नया नारा दिया—‘‘अब की बार, सय पार’’। इस नारे को लेकर कांग्रेस के नेता-कार्यकर्ताओं ने जोरशोर से इसे दोहराया। फागुन १५ को चुनावी सभा करने पोखरा आने पर भी गगन का उत्साह उन्नत ही था। उन्होंने कहा था, ‘‘कांग्रेस को मतदाताओं को बदलाव का एहसास दिलाना होगा, तभी जीत संभव है’’ और आगे कहा, ‘‘बदलाव का संदेश प्रत्येक गांव तक पहुंचाना होगा, नया कहा जाना चाहिए क्योंकि कांग्रेस ताजा, विशेष महाधिवेशन के बाद सबसे नई पार्टी है।’’

लेकिन, गगन द्वारा पोखरा से दिया गया ‘‘अबकी बार, सय पार’’ नारा चुनाव में कोई सफलता नहीं ला पाया, न तो सौ सीटों का आधा भी जीत हुई। बल्कि, कांग्रेस की सीट संख्या ३८ पर सिमित रही। बालेन्द्र शाह (बालेन) को भावी प्रधानमंत्री घोषित कर चुनाव लड़े राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) ने लगभग दो तिहाई सीटें जीतकर बालेन को प्रधानमंत्री बनाया। बालेन के आने तक गगन का चेहरे का भाव भी नहीं बदला। गण्डकी प्रदेश के १८ सीटों में से मुस्ताङ और मनाङ की दो सीटों को छोड़ कांग्रेस किसी भी स्थान से जीत नहीं पाए।

निर्वाचन के खराब परिणाम के बाद समीक्षा बैठक में आए गगन का उत्साह स्वाभाविक रूप से कम था। समीक्षा के दौरान विभिन्न नेताओं ने परिणामों का भिन्न-भिन्न प्रकार से विश्लेषण किया, और गगन सवालों के घेरे से बच नहीं पाए। कुछ नेताओं ने विशेष महाधिवेशन के कारण कांग्रेस सरकार में एकजुट न हो पाने और चुनाव में सकारात्मक संदेश न पहुंच पाने को कारण बताया, जबकि कईयों ने जनमत को ‘‘हुरी’’ बताकर कांग्रेस की चुनावी रणनीति को अप्रभावी करार दिया। समीक्षा के दौरान कुछ नेताओं ने गगन के खिलाफ चेतावनीपूर्ण भाषा भी इस्तेमाल की।

स्याङ्जा के सभापति राजु थापाले सभापति गगन से निवर्तमान सभापति शेरबहादुर देउवा की तरह अन्य नेताओं के साथ मिलकर आगे बढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने याद दिलाया कि शुरुआत में उन्होंने कहा था कि वर्तमान सरकार और परिस्थिति कांग्रेस के पक्ष में नहीं है, इसलिए चुनाव में न जाना बेहतर होता। अब कांग्रेस को एकतावद्ध करने का विकल्प नहीं है, इसलिए गगन से इस पर ध्यान देने की गुजारिश की। उन्होंने कहा, ‘‘हिजो दाइयों ने प्रयास किया, अब आपको संभालकर आगे लेना है, ताकि हम फिर किसी और दाय के खिलाफ न उठें।’’

थापाले विशेष महाधिवेशन के कारण वोट बढ़ने या घटने का कोई असर नहीं होने की बात कही और कहा, ‘‘विशेष के कारण वोट न तो बढ़े हैं, न घटे हैं। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय परिस्थिति हमारे पक्ष में नहीं थी।’’ उन्होंने बताया कि विश्वव्यापी तरीके से पॉपुलिज्म का उदय हो रहा है और नेपाल में भी ऐसी ही स्थिति आई है।

समीक्षा कर रहे नेताओं की बातें सुनते हुए गगन अधिकतर समय सिर हिलाते हुए डायरी में नोट्स बना रहे थे। कभी-कभी वे वक्ताओं के जिक्र पर उपसभापति विश्वप्रकाश शर्मा से चर्चा भी कर रहे थे। हमेशा हँसमुख और कुशल दिखने वाले गगन के उत्साहहीन होने पर एक महिला नेता ने उनकी चिंता व्यक्त की तो गगन ने कहा कि वे चिन्तन में हैं।

गण्डकी के नेताओं की समीक्षा और चेतावनी सुनने के बाद गगन ने कहा कि वे चिन्तित नहीं, ‘चिन्तन’ की अवस्था में हैं। ‘‘चिन्ता और चिन्तन में बड़ा फर्क है। चिन्ता डर और प्रतिक्रिया से जुड़ी होती है, वहीं चिन्तन आत्मसमीक्षा और विश्लेषण से संबंधित है,’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं थोड़ा अधिक चिन्तन में हूँ।’’

उन्होंने बताया कि ‘‘चिन्तन का प्रमुख भाग स्वयं और दूसरों को सुनना है। इस समय मैं कम बोलने और अधिक सुनने की नीति अपना रहा हूँ।’’

पूर्व में कांग्रेस प्रवक्ता देवराज चालिसे ने युद्ध और लड़ाई में फर्क बताते हुए चुनाव जीत-हार को लेकर निराश न होने का सुझाव दिया था। उसी भावना से सहमत होकर गगन ने बताया कि वे चुनाव के नतीजे को गलती की तरह नहीं, बल्कि संदेश के रूप में लेकर आगे बढ़ेंगे। ‘‘चिन्तन का मुख्य आधार खुद को और दूसरों को सुनना है, कम बोलना है, और मैं इसी अभियान में हूँ,’’ उन्होंने कहा।

आने वाले असोज के अंदर नियमित महाधिवेशन की योजना बताते हुए गगन ने कहा कि वे केंद्र में प्रमुख विपक्षी दल और प्रदेश तथा स्थानीय तह में सत्तारूढ़ के रूप में काम करने की शैली पर भी काम करेंगे। ‘‘पार्टी की जिम्मेदारी मेरी है, दल को सबसे अधिक लचीला होना चाहिए और सभी को जोड़ने का प्रयास करना चाहिए। मैं उस जिम्मेदारी को निभाऊंगा,’’ उन्होंने कहा, ‘‘अब मैं सभी जगह जाऊंगा, संवाद करूंगा, और सभी को जोड़ने की कोशिश करूंगा।’’

आगामी प्रदेश और स्थानीय स्तर के चुनावों तक प्रथम पार्टी बनने का लक्ष्य है। उपसभापति विश्वप्रकाश शर्मा ने संसदीय दल के नेता के जल्द चयन की जानकारी दी। उन्होंने निवर्तमान सभापति देउवा से नेपाल लौट कर जांच में सहयोग करने का आग्रह भी किया।

विशेष महाधिवेशन के कार्यसमिति से संबंधित सर्वोच्च अदालत में मामला विचाराधीन है और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार निर्णय पक्ष में आने का दावा गगन ने किया है। महामंत्री प्रदीप पौडेल ने चुनावी शैली और प्रचार तकनीक में बदलाव पर बल देते हुए अब तकनीकी दक्षता और परिशुद्धता के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता बताई।