
२८ चैत, स्याङ्जा। चैत-वैशाख के सूखे मौसम के दौरान हर वर्ष वन डढेलो का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन इस वर्ष स्याङ्जा में इस खतरे में उल्लेखनीय कमी आई है। पूर्व में सामान्य लापरवाही के कारण बड़े पैमाने पर वन क्षेत्र प्रभावित होते थे, जिससे वन्य जीव और स्थानीय बस्तियों को जोखिम होता था, परंतु अब स्थिति में सुधार दिखाई दे रहा है। डिवीजन वन कार्यालय स्याङ्जा के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष २०७९/८० में लगभग ४९७.२ हेक्टेयर वन क्षेत्र में आग लगी थी, जबकि वित्तीय वर्ष २०८०/८१ में यह संख्या घटकर केवल २४ हेक्टेयर तक सीमित रह गई। इस वर्ष आँधीखोला गाउँपालिका के राम्चे क्षेत्र में मामूली डढेलो के अलावा कोई बड़ी क्षति की घटना सार्वजनिक नहीं हुई है।
डिवीजन वन अधिकारी नवराज बराल ने बताया कि समय-समय पर हुई वर्षा, जागरूकता कार्यक्रम और पूर्व तैयारी ने वन डढेलो नियंत्रण में सकारात्मक भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, ‘इस वर्ष पिछले वर्षों की तुलना में डढेलो बहुत कम देखी गई है।’ उन्होंने आगे कहा कि स्थानीय लोगों की सक्रियता और समय पर किए गए प्रबंधन ने जोखिम को कम करने में मदद की है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जोखिम पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है, इसलिए सभी पक्षों को सतर्क रहना आवश्यक है। फागुन-चैत के शुष्क मौसम के बावजूद बीच-बीच में हुई वर्षा ने वन क्षेत्र की हरियाली बनाए रखने में सहायता की है। इसके अलावा, वन कार्यालय द्वारा संचालित जनजागरूकता अभियान और डढेलो नियंत्रण की पूर्व तैयारी ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
पतझड़ के मौसम में जोखिम में आने वाले पाखापखेरा क्षेत्रों में भी वन संरक्षण होना सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। जिले भर में मौजूद ५२५ सामुदायिक वन सुरक्षित हैं, जिससे “हरियो वन नेपालको धन” का नारा यथार्थ रूप में प्रतीत होता है। फिर भी, वैशाख तक संवेदनशील समय बाकी है, इसलिए लगातार सतर्कता बनाए रखने से स्याङ्जा की यह उपलब्धि अन्य जिलों के लिए एक मिसाल बन सकती है।





