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साहित्यकार श्रवण मुकारुङ के उपन्यास ‘सलह’ का लोकार्पण

श्रवण मुकारुङ ने अपने प्रथम आख्यान उपन्यास ‘सलह’ का लोकार्पण शनिवार को नेपालय के आरशाला में किया। मुकारुङ ने अपने चार दशकों लंबे साहित्यिक सफर में निबंध, नाटक, कविता, गीत, कहानी और चलचित्र में काम करने की बात याद दिलाई। ‘सलह’ उपन्यास ४३६ पृष्ठों का है और इसकी कीमत ९९५ रुपये निर्धारित है, जो मुख्य पुस्तक भंडारों और ऑनलाइन माध्यम से खरीदा जा सकता है। काठमाण्डू में शनिवार की सुबह नेपालय के आरशाला में भारी भीड़ थी। वहीं कवि और गीतकार के तौर पर विख्यात श्रवण मुकारुङ आख्यानकार के रूप में उपस्थित थे।

पहले आख्यान उपन्यास के रूप में ‘सलह’ प्रस्तुत करने वाले मुकारुङ ने शुरू में बाहर खड़े सभी को संबोधित करते हुए कहा, ‘मैं बाहरी लेखक, सीमांत के लेखक होने के नाते सबसे पहले आप सभी को अभिवादन करता हूँ, जो यहाँ बाहर खड़े होकर सुन रहे हैं।’ लोकार्पण समारोह में अग्रिम नामांकन कराये पाठकों और स्थल पर नामांकन कराने वाले पाठकों की अत्यधिक उपस्थिति के कारण आयोजकों को पहली बार कॉफी शॉप के दरवाज़े खोलने पड़े।

‘सलह’ के लोकार्पण समारोह में मुकारुङ अपने पिता को याद करते हुए भावुक हो उठे और अपने चार दशकों लंबे साहित्यिक अनुभव को स्मरण किया। उन्होंने कहा, ‘मैं कवि-गीतकार बनने से पहले निबंधकार और नाटककार रहा हूँ। कक्षा ७ में मैंने ‘हुलाकी बनने का सपना’ निबंध लिखा था और कक्षा ९ में ‘अस्तित्व’ नामक नाटक लिखा था।’ मुकारुङ ने बताया कि वे साहित्य के विभिन्न विधाओं में शुरू से ही सक्रिय रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘निबंध, नाटक, कविता, गीत, कहानी और चलचित्र के साथ-साथ मैं अब उपन्यास ‘सलह’ लेकर आया हूँ। लेखक जो विषय चुनता है, वह खुद विधा की मांग करता है। इस विषय ने मुझे ‘सलह’ लिखने के लिए प्रेरित किया।’