हंगरी में 16 वर्षों तक ओर्बान का शासन खत्म, चीनी निवेश के भविष्य पर अनिश्चितता

३० चैत्र, काठमांडू। हंगरी में पिछले 16 वर्षों से एकल बहुमत में शासन करने वाले प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान की सत्ता समाप्त हो गई है। रविवार को हुए आम चुनाव में मतदाताओं ने ओर्बान की राष्ट्रवादी सरकार को पूर्ण रूप से खारिज करते हुए विपक्षी पार्टी तिज्जा पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाई है। ओर्बान ने बुडापेस्ट स्थित अपने चुनावी मुख्यालय से पराजय स्वीकार करते हुए विपक्षी नेता पीटर मगर को बधाई दी है। इस बार के चुनाव में साम्यवाद पतन के बाद सबसे अधिक, लगभग 80 प्रतिशत मतदान हुआ। 199 सदस्यीय संसद में पीटर मगर की तिज्जा पार्टी ने 138 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल किया है जबकि ओर्बान की फिडेज पार्टी मात्र 55 सीटों तक सीमित रही है।
ओर्बान की सत्ता के जाने के साथ ही हंगरी में मौजूद चीनी निवेशकों में बड़ी चिंता और अनिश्चितता उत्पन्न हो गई है। ओर्बान के शासनकाल में हंगरी ने अरबों डॉलर के चीनी निवेश को आकर्षित किया था, जिसमें देब्रेचेन में निर्माणाधीन बड़ा बैटरी कारखाना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। स्थानीय स्तर पर “चीनी घर वापस जाओ” जैसे नारों से विरोध जारी है, और नई यूरोप-मैत्री सरकार पुराने समझौतों को रद्द कर सकती है, इस भय को चीनी व्यवसायियों ने व्यक्त किया है। ओर्बान की विदेश नीति चीन, रूस और डोनाल्ड ट्रम्प के अमेरिका की ओर झुकी हुई थी, जिस पर मतदाताओं ने इस बार कड़ा जवाब दिया है।





