
भरतपुर महानगरपालिका–४ रामघाट स्थित नारायणधाम आश्रम ने १८ वर्षों के लिए वार्षिक रु ७२ हजार में जमीन किराए पर लेकर कुरिलो खेती कर रहा है। आश्रम के व्यवस्थापक तारानाथ पौडेल के अनुसार, कुरिलो खेती पूरी तरह जैविक तरीके से की जा रही है और यह आश्रम के संचालन में आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। पौडेल के अनुसार, कुरिलो का मुख्य मौसम चैत, वैशाख और जेठ महीने में होता है और इसके औषधीय गुण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।
आश्रम के अंतर्गत संचालित पशु एवं कृषि फार्म के माध्यम से कुरिलो, आम्बा, भुइंकटहर सहित अन्य फसलों का पूर्ण रूप से जैविक उत्पादन किया जाता है। इनमें से लगभग १५ कट्ठा जमीन पर कुरिलो की खेती की जाती है। इस खेती से प्राप्त आय आश्रम के संचालन में आर्थिक सहयोग प्रदान करती है, पौडेल ने बताया। जैविक उत्पादन होने के कारण बाजार खोजने की आवश्यकता नहीं पड़ती और फार्म तथा आश्रम से ही सहज रूप से बिक्री होती है, उन्होंने आगे बताया।
कुरिलो एक औषधीय गुणयुक्त फसल है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। इसमें किसी प्रकार का रासायनिक उर्वरक या कीटनाशक का प्रयोग नहीं होता है और गाय के गोबर तथा गौमूत्र से तैयार की गई खाद का उपयोग किया जाता है। कुरिलो खेती में लगभग आठ लाख रुपए का निवेश किया गया है। उत्पादन से प्राप्त आय में से खर्च निकालकर आश्रम के संचालन में मदद मिल रही है, पौडेल ने जानकारी दी। मौसम के अनुसार कुरिलो का मूल्य प्रति किलो ५०० से १२०० रुपए तक होता है और प्रतिदिन लगभग २० किलो बिक्री होती है।
व्यवस्थापक पौडेल के अनुसार कुरिलो का मुख्य फसलकाल चैत, वैशाख और जेठ महीने हैं। यहां यह फसल पिछले चार वर्षों से निरंतर उगाई जा रही है और उचित देखभाल से यह १०–१२ वर्षों तक उत्पादन दे सकती है। जैविक खेती में रोग, कीट और खरपतवार की समस्या अधिक होती है, इसलिए समय-समय पर कृषि विकास कार्यालय चितवन के तकनीकी सहयोग से खेती को व्यवस्थित किया जाता है। कुरिलो की फसल लगाने के लगभग ६ माह बाद उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। इसकी बीज बाजार में आसानी से उपलब्ध होती है और माघ, फागुन एवं चैत महीनों में इसकी रोपाई उपयुक्त मानी जाती है। वर्तमान में आश्रम में लगभग २० आश्रित एवं आगंतुकों के लिए नि:शुल्क भोजन का प्रबंध है। इसके साथ ही आश्रम में पालन किये जा रहे गाय जैविक खाद उत्पादन में सहायता कर रहे हैं।





