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महिला उद्यमशीलता को प्रस्तुत करते हुए नाटक टोली ने पश्चिम नेपाल में प्रदर्शन किया

सुन्तला और भूरे रंग के संयोजन वाले कपड़े और कैप पहने ८ सदस्य संगीत में झूमते नजर आते हैं। वे ग्रामीण परिवेश में हैं, सड़क पर हैं, चौतारी पर हैं। संगीत बजाते हुए गा रहे हैं, नाच रहे हैं। और, उन्हें देखने/सुनने वाले दर्शकों की संख्या भी उल्लेखनीय है। यह दृश्य कथाघेरा के ‘बाटै बाटो’ नामक सड़क नाटक का मंचन है। कथा घेरा काठमाडौं में स्थित नाटकघर है। इसी नाटकघर की टोली गत ११ चैत से पश्चिम नेपाल में है। वर्तमान में इनके नाटक के क्लिप सोशल मीडिया पर अच्छी खासी साझा हो रहे हैं।

कथाघेरा की निर्देशक व नाटक टोली की नेतृत्वकर्ता आकांक्षा कार्की के अनुसार इस नाटक में महिला उद्यमशीलता को मुख्य विषय बनाया गया है। उन्होंने बताया कि अगर महिला के हाथ में कौशल हो तो सभी का कल्याण होता है, महिला से कुछ भी असंभव नहीं है, केवल समान अवसर न मिलने के कारण महिलाएं पीछे हैं, जैसे विषय नाटक में शामिल किए गए हैं। वर्तमान में यह टोली सल्यान के सली बाजार में अपना अंतिम प्रदर्शन करने को तैयार है। निर्देशक कार्की ने बताया कि इस नाटक में घर के अंदर और बाहर काम करने वाले अथवा स्वयं कुछ करना चाहने पर समाज और परिवार से समर्थन न पाकर संघर्षरत पात्रों की कहानी है।

उनका यह भी कहना है कि नाटक लैंगिक समानता और अवसर की बातें करता है। अब तक कथाघेरा की टोली ने सुदूरपश्चिम प्रदेश में ६ स्थानों और कर्णाली प्रदेश में ५ स्थानों सहित कुल ११ स्थानों पर नाटक प्रस्तुत किया है। आज के प्रदर्शन के बाद टोली काठमाडौं लौटने की तैयारी में है। कथाघेरा के इस नाटक की सोशल मीडिया पर काफी प्रशंसा हो रही है, वहीं कुछ आलोचनात्मक टिप्पणियां भी सामने आई हैं। खासकर नाटक में प्रयुक्त ‘नपूज, नढोग’ शब्द को ‘धर्म और परंपरा पर हमला’ बताते हुए नकारात्मक टिप्पणी की जा रही है। इस विषय में कार्की ने बताया कि इन शब्दों को तोड़-मरोड़ कर गलत अर्थ देने की कोशिश की गई है। यह शब्द प्रतीकात्मक ही हैं, ऐसा उनका कहना है। सड़क पर मंचित यह नाटक २ वैशाख को यूट्यूब पर भी उपलब्ध कराया जाएगा, निर्देशक कार्की ने जानकारी दी।