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मधेश बाहेकका प्रदेशहरूमा २.५ देखि १० आना क्षेत्रफलका साना जग्गाहरूको कारोबार अधिक

समाचार सारांश

समीक्षा के बाद तैयार।

  • नेपाल राष्ट्र बैंक के अनुसार, मधेश के अलावा अन्य प्रदेशों में २.५ से १० आना क्षेत्रफल के छोटे-छोटे जमीन के टुकड़ों का कारोबार अधिक होता है।
  • मधेश प्रदेश में २० आना से बड़े क्षेत्र वाले बड़े प्लॉट्स का कारोबार अधिक होता है और कुल कारोबार क्षेत्रफल में मधेश प्रदेश अग्रणी है।
  • घरजग्गा कर्जा वित्तीय वर्ष २०७७/७८ से २०८१/८२ तक ७२.४१ प्रतिशत बढ़ चुका है तथा केन्द्रीय बैंक घरजग्गा मूल्य सूचकांक प्रकाशित करने की तैयारी में है।

चैत्र ३०, काठमाडौं – मधेश के अलावा प्रदेशों में छोटे टुकड़ों वाली जमीनों का कारोबार अधिक होने का आंकड़े दर्शाते हैं। मधेश प्रदेश में जमीन कृषि के लिए उपयुक्त होने के कारण बड़े क्षेत्रफल वाली जमीनों का कारोबार अधिक होता है।

नेपाल राष्ट्र बैंक के ताजा अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, जमीन के कारोबार के आधार पर मधेश को छोड़कर सभी प्रदेशों में २.५ से १० आना क्षेत्रफल के छोटे प्लॉट्स का कारोबार अधिक पाया गया है। लेकिन मधेश प्रदेश में २० आना से ऊपर के बड़े प्लॉट्स में कारोबार अधिक है। कुल कारोबार क्षेत्रफल के आधार पर मधेश प्रदेश का हिस्सा सबसे अधिक है, उसके बाद कोशी और लुम्बिनी प्रदेश रहते हैं।

कुल कारोबार मूल्य के आधार पर बागमती प्रदेश अग्रणी है। महानगर और उपमहानगरपालिकाओं में ५ से १० आना क्षेत्रफल वाले प्लॉट्स सबसे अधिक कारोबार में हैं।

केन्द्रीय बैंक भूमि व्यवस्था तथा अभिलेख विभाग और आन्तरिक राजस्व विभाग से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर रियल एस्टेट कारोबार सम्बंधित आंकड़े त्रैमासिक प्रकाशित करता रहा है। कुछ वर्षों पहले भी बैंक ने घरजग्गा कारोबार पर त्रैमासिक सूचनाएँ प्रकाशित करने और मूल्य नियंत्रण का प्रयास किया था, जिसे फिर से शुरू करने की योजना है।

केन्द्रीय बैंक रियल एस्टेट कारोबार की प्रवृत्ति का विश्लेषण कर रहा है जिसमें कारोबार संख्या, मूल्य, क्षेत्रफल, राजस्व संग्रहण तथा बैंक से रियल एस्टेट क्षेत्र को दिए गए कर्जे के आंकड़े शामिल हैं।

अध्ययन में रियल एस्टेट कारोबार को राष्ट्रीय, प्रादेशिक, महानगरपालिका और उपमहानगरपालिका स्तर पर विश्लेषित किया गया है। साथ ही व्यापार के क्षेत्रफल के आधार पर विभिन्न स्तरों पर कारोबार संख्या और राशि के आंकड़े भी प्रस्तुत किए गए हैं।

त्रैमासिक आंकड़ों के अनुसार घरजग्गा कारोबार में मौसमी प्रवृत्ति देखी जाती है। आर्थिक वर्ष के पहले त्रैमास में कारोबार कम होता है और तीसरे व चौथे त्रैमास में ऊँचा। कारोबार संख्या के आधार पर मधेश प्रदेश सबसे आगे है, उसके बाद लुम्बिनी और कोशी प्रदेश हैं। कर्णाली तथा सुदूरपश्चिम प्रदेशों में कारोबार सर्वाधिक न्यूनतम है।

आर्थिक वर्ष २०७७/७८ से २०८१/८२ तक घरजग्गा कर्जा ७२.४१ प्रतिशत और आवासीय कर्जा ६१.५५ प्रतिशत तक बढ़ा है। घरजग्गा क्षेत्र से प्राप्त सरकारी राजस्व आर्थिक वर्ष २०७८/७९ के पहले त्रैमास में २३.७ अरब रूपये तक था, जो घटकर २०७९/८० के पहले त्रैमास में ८.२ अरब हो गया था, लेकिन बाद में सुधार होकर २०८१/८२ में लगभग १५ अरब तक पहुंच गया है।

इन आंकड़ों के आधार पर केन्द्रीय बैंक घरजग्गा मूल्य सूचकांक के निर्माण और प्रकाशन के दूसरे चरण पर काम कर रहा है।