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इज़रायल और तुर्की के बीच तीव्र विवाद क्यों?

३० चैत, काठमाडौं । पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ द्वारा की गई अभिव्यक्ति के जवाब में कुछ दिन पहले इज़रायल ने कड़ा प्रत्युत्तर दिया था, जिसके बाद तुर्की और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपतियों को भी इज़रायल की तीव्र टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर इज़रायली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहु और अन्य नेताओं ने तुर्की के राष्ट्रपति की उक्त अभिव्यक्ति पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा था, ‘अगर पाकिस्तान ने मध्यस्थता नहीं की होती तो तुर्की इज़रायल के खिलाफ युद्ध में शामिल हो जाता।’ इज़रायल ने तुर्की के राष्ट्रपति के साथ-साथ दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति के सोशल मीडिया पोस्ट की भी कड़ी आलोचना की है।

इसी संदर्भ में, सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर यूजीआई के निदेशक प्रोफेसर फ्रांकोइस बेलो ने लिखा है, ‘पिछले सप्ताह से इज़रायल स्पेन, फ्रांस, इटली, दक्षिण कोरिया, पाकिस्तान और तुर्की के साथ कूटनीतिक विवाद में फंसा हुआ है। यह स्थिति दीर्घकालिक नहीं होगी और इसके और बिगड़ने की संभावना अधिक है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘विश्वव्यापी जनमत काफी हद तक इज़रायल के विरुद्ध गया है और लोकतांत्रिक सरकारों को अंततः अपने जनता की राय का आदर करना होगा।’

दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की आलोचना उस समय हुई जब दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युँग ने सोशल मीडिया पर इज़रायली सैनिकों द्वारा कथित मानवाधिकार उल्लंघन का वीडियो पोस्ट किया था, जिसके बाद इज़रायल ने गुस्सा जताया। जवाब में इज़रायली विदेश मंत्री ने एक विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा, ‘राष्ट्रपति ली जे-म्युँग द्वारा इज़रायल में “होलोकास्ट रिमेम्बरेंस डे” से एक दिन पहले यहूदी नरसंहार को सामान्य घटना के रूप में प्रस्तुत करना अस्वीकार्य और कड़ाई से निंदनीय है।’

विज्ञप्ति के अनुसार, ‘राष्ट्रपति ली जे-म्युँग ने २०२४ की एक कहानी को रीट्वीट किया था और एक नकली खाते का हवाला दिया था, जो वर्तमान घटनाओं को गलत तरीके से प्रस्तुत करता है। वह खाता इज़रायल विरोधी गलत सूचना और झूठ फैलाने के लिए कुख्यात है।’

तुर्की ने इज़रायली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहु को ‘आधुनिक युग का हिटलर’ कहा है और उन पर ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता को विघटित करने का आरोप लगाया है। तुर्की के विदेश मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा है, ‘इज़रायली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहु, जिन्हें उनके अपराधों के कारण हमारे समय के हिटलर के रूप में जाना जाता है, का अतीत सभी के सामने स्पष्ट है।’

विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) ने नेतन्याहु के खिलाफ युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध के आरोप में गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। नेतन्याहु की सरकार पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में नरसंहार का आरोप भी लग चुका है।’

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने जवाब में कहा है कि इज़रायली विदेश मंत्रालय ने दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की अभिव्यक्ति का गलत अर्थ लगाया है, जो उनके मौलिक मानवाधिकारों के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती थी। दक्षिण कोरिया ने हिंसात्मक कार्यों की निंदा करने की भी स्पष्ट बात कर दी है।

ख्वाजा आसिफ की अभिव्यक्ति के कारण विवाद पहले भी बढ़ चुका है, जब इज़रायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की उस अभिव्यक्ति की कड़ी निंदा की थी, जिसमें उन्होंने इज़रायली सरकार को ‘कैंसर’ बताया था।

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया था कि ‘जब इस्लामवाद पर वार्ता जारी है, तब लेबनान में नरसंहार हो रहा है। इज़रायली ऑपरेशन में निर्दोष नागरिक मारे गए हैं, पहले गाज़ा में, फिर ईरान में और अब लेबनान में, इस तरह का रक्तपात जारी है जिसे रोका नहीं जा सकता।’ उस अभिव्यक्ति में ख्वाजा आसिफ ने इज़रायली सरकार को ‘कैंसर’ कहा था और कड़े शब्दों में आलोचना की थी। हालांकि, अब वह पोस्ट एक्स पर उपलब्ध नहीं है।