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सरकार की केले के आयात पर रोक से किसानों और व्यापारियों में विवाद उत्पन्न

सरकार ने टीआर–४ रोग के खतरे को ध्यान में रखते हुए भारत से केले के आयात पर रोक लगा दी है, जिससे बाजार में केले की कमी और कीमतों में वृद्धि हुई है। नेपाल फलफूल थोक व्यवसायी संघ ने अवैध केले की तस्करी बढ़ने और जनस्वास्थ्य के जोखिम को लेकर रोकथाम की मांग की है। नेपाल केले उत्पादक महासंघ ने आयात रोकने को जैविक सुरक्षा का उपाय बताते हुए इसका समर्थन किया और कहा कि इससे किसानों को राहत मिली है।

३० चैत, काठमांडू। सरकार द्वारा भारत से केले के आयात पर लगाई गई रोक के कारण नेपाली बाजार में कमियां देखने को मिली हैं। इस कमी ने किसानों और व्यापारियों के बीच गहरा विवाद पैदा कर दिया है। इस विवाद में सरकार की मौनता का सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ा है। काठमांडू उपत्यका में केले की कीमत आसमान छू रही है, होलसेल बाजार में प्रतिदर्जन २३० रुपए तक पहुँच गई है जबकि खुदरा बाजार में उपभोक्ताओं को ३३० रुपए तक देने पड़ रहे हैं।

कालीमाटी तरकारी तथा फलफूल बाजार विकास समिति के आंकड़े दिखाते हैं कि एक वर्ष में केले की कीमत दोगुनी हो गई है। पिछले वर्ष २९ चैत २०८१ को एक दर्जन केले का औसत मूल्य १५० रुपए था, जो अब २९ चैत २०८२ को २२५ रुपए पहुंच गया है।

एक ओर, नेपाल फलफूल थोक व्यवसायी संघ ने सरकारी नीति के बहाने अवैध तस्करी बढ़ने और केला बाजार में मंहगाई होने की बात करते हुए अवैध केला बिक्री रोकने की बात कही है। वहीं, नेपाल केले उत्पादक महासंघ ने आयात खोलने के किसी भी प्रयास को नेपाली किसानों के अस्तित्व के लिए खतरा बताते हुए इस पर कड़ा विरोध जताया है।

इस विवाद का केंद्र सरकार द्वारा २ असोज को ‘टीआर–४’ नामक रोग के खतरे का हवाला देते हुए केले के आयात पर रोक लगाना है। व्यापारी इसे तस्करी को बढ़ावा देने वाला अव्यवहारिक निर्णय मानते हैं, जबकि किसान इसे ‘‘वैज्ञानिक और राष्ट्रीय हित के अनुकूल’’ बताते हुए रोक जारी रखने की मांग कर रहे हैं।