
खगोलविदों ने हब्बल-इबर्ली टेलीस्कोप डार्क एनर्जी एक्सपेरिमेंट से 33 हजार से अधिक हाइड्रोजन गैस के प्रभावक्षेत्रों को खोजा है। ये प्रभावक्षेत्र प्रारंभिक ब्रह्मांड के 10 से 12 अरब वर्ष पुराने संरचनाएं हैं जो गैलेक्सी के आसपास फैली हुई हैं। इस अध्ययन ने प्रारंभिक ब्रह्मांड में हाइड्रोजन गैस की विशाल संरचनाओं की सामान्य उपस्थिति और गैलेक्सी विकास में उनकी भूमिका को समझने के लिए नया आधार तैयार किया है।
खगोलविदों ने ब्रह्मांड के व्यापक सर्वेक्षण के माध्यम से युवा गैलेक्सियों को घेरे हुए हाइड्रोजन गैस के विशाल प्रभावक्षेत्रों (हैलोज़) की खोज में बड़ी सफलता हासिल की है। हब्बल-इबर्ली टेलीस्कोप डार्क एनर्जी एक्सपेरिमेंट के डाटा का विश्लेषण करते हुए वैज्ञानिकों ने ‘लाइमन-अल्फा नेबुला’ नामक लगभग दसियों हजार हाइड्रोजन गैस के बादलों की पहचान की है। ये संरचनाएं आज से लगभग 10 से 12 अरब वर्ष पहले अस्तित्व में रहे गैलेक्सियों के आसपास फैली हुई हैं।
इस खोज ने ब्रह्मांड की प्रारंभिक अवस्था और गैलेक्सियों के विकासक्रम को समझने के लिए नए द्वार खोल दिए हैं। ब्रह्मांड के इतिहास में इस समय को ‘कॉस्मिक नून’ कहा जाता है, जब गैलेक्सियों में तारों का निर्माण अत्यधिक सक्रिय था। तारों के निर्माण के लिए आवश्यक प्राथमिक तत्व हाइड्रोजन गैस की विशाल आपूर्ति इन प्रभावक्षेत्रों द्वारा की जाती थी। ‘द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल’ में प्रकाशित इस अध्ययन ने पहले से ज्ञात ऐसी संरचनाओं की संख्या लगभग दस गुना बढ़ा दी है।
पहले लगभग 3 हजार ऐसे गैस के बादल ही ज्ञात थे, जबकि अब यह संख्या 33 हजार से अधिक हो गई है। इससे यह पुष्टि होती है कि प्रारंभिक ब्रह्मांड में हाइड्रोजन की ये विशाल संरचनाएं दुर्लभ नहीं बल्कि सामान्य थीं। हाइड्रोजन गैस स्वयं प्रकाश उत्सर्जित नहीं करती, लेकिन जब यह गैस विशेष रूप से सक्रिय गैलेक्सियों के निकट पहुंचती है जहाँ परावैजनी प्रकाश उत्सर्जन होता है, तब विकिरण के कारण यह चमकने लगती है।
HETDEX (हेटडेक्स) परियोजना ने मैकडोनाल्ड ऑब्जर्वेटरी में मौजूद हब्बल-इबर्ली टेलीस्कोप का उपयोग कर 10 लाख से अधिक गैलेक्सियों का मानचित्रण कर रहा है। इसका आँकड़ा इतना विशाल है कि यह आकाश के लगभग 2 हजार पूर्ण चंद्रमा के क्षेत्रफल के बराबर है। अध्ययन के प्रमुख लेखक एरिन मेन्टुच कूपर के अनुसार, पिछले 20 वर्षों से कुछ सीमित वस्तुओं का ही विश्लेषण हो रहा था, लेकिन यह विशाल डाटा वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ा अवसर प्रदान करता है।
नए पहचाने गए ये प्रभावक्षेत्र आकार में दसियों हजार से लेकर लाखों प्रकाश वर्ष तक फैले हुए हैं। कुछ संरचनाएं एक गैलेक्सी को घेरे हुए अंडाकार बादल जैसी दिखाई देती हैं जबकि कुछ और बड़ी तथा अनियमित आकृतियों में होती हैं, जिनमें कई गैलेक्सियां सम्मिलित होती हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये संरचनाएं अंतरिक्ष में फैले ‘विशाल अमीबा’ जैसे प्रतीत होती हैं। टेक्सास एडवांस्ड कंप्यूटिंग सेंटर के सुपरकंप्यूटरों के प्रयोग से किये गए विश्लेषण में लगभग आधे से ज्यादा गैलेक्सियों में ऐसी संरचनाएं पाई गई हैं।
यह शोध गैलेक्सी निर्माण के पुराने मॉडल की कमियों को सुधारने में सहायक माना जा रहा है। अब वैज्ञानिक इन संरचनाओं का स्थान खोजने के बजाय, उनके कार्य प्रणाली और ब्रह्मांड के विकास में उनकी भूमिका का विस्तृत अध्ययन कर सकेंगे। 33 हजार से अधिक प्रभावक्षेत्रों की यह सूची प्रारंभिक ब्रह्मांड में पदार्थ के वितरण, गैलेक्सियों की गतिशीलता और परस्पर क्रियाओं को समझने के लिए अभूतपूर्व आधार प्रदान करती है।





