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भक्तपुर में बिस्का जात्रा का शानदार उत्सव

३० चैत, भक्तपुर। भक्तपुर पूरी तरह से जात्रमय हो गया है। नए वर्ष के आने से पहले भक्तपुर में नौ दिन आठ रात तक मनाए जाने वाले बिस्का जात्रा का उत्सव शुरू हो चुका है। नए वर्ष की पूर्व संध्या पर यहां बिस्का की खास रौनक फैली हुई है। इस उत्सव में विदेशी परिवार और रिश्तेदार ही नहीं, बल्कि विदेश में बसे परिवार और रिश्तेदार भी बिस्का जात्रा के अवसर पर घर लौटते हैं। भक्तपुर जिले भर में यह उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस जात्रा में ऐतिहासिक पहलू तो है ही, साथ ही यह पूरी तरह से तांत्रिक और धार्मिक विधि-व्यवहार के अनुसार आयोजित होता है, जिससे इसका अत्यधिक विशेष महत्व है।

पुरातनकाल में बिस्का जात्रा केवल दो दिन मनाई जाती थी, ऐसा जानकार बताते हैं। भक्तपुर के थिमी में पाए गए नेपाल संवत् ५०० के तामसुक पत्र में इस जात्रा को विश्वकेतु को स्मरण कराने वाला प्रतीक माना गया है। भक्तपुर टौमढी में यक्ष मल्ल के शासनकाल का शिलालेख इसे विश्व जात्रा के रूप में उल्लेख करता है। भक्तपुर के राजदरबार में नेपाल संवत् ८०८ और ८१८ के अभिलेखों में राजा जीतामित्र और भूपतिन्द्र मल्ल के काल में ‘विस्क्यात’ शब्द का उल्लेख भी पाया गया है, जो विशेषज्ञों के अनुसार बिस्का जात्रा को इंगित करता है।

बिस्का जात्रा की मुख्य परंपरा चैत्र महीने के अंतिम दिन विश्वकेतु सहित ‘योसीं द्य:(लिंगां)’ को उठाकर उस पर एक जोड़ी ध्वज फहराना और वैशाख सक्रान्ति के दिन उसे खोलना माना जाता है। इसी के अनुरूप आज शाम भक्तपुर में लिंगो स्थापित कर ध्वज फहराया गया है। जानकार बताते हैं कि किरातियों को पराजित करने के बाद लिच्छवी वंश के लोगों ने यह जात्रा मनाना शुरू किया था।