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विद्यालयों को छात्रवृत्ति विवरण सार्वजनिक करने के लिए शिक्षा मंत्रालय का निर्देश

समाचार सारांश: शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने नियमों के अनुसार छात्रवृत्ति प्रदान न करने वाले विद्यालयों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए स्थानीय निकायों से अनुरोध किया है। मंत्रालय ने निजी और सार्वजनिक विद्यालयों से कहा है कि वे छात्रवृत्ति के १० प्रतिशत आवंटन का विवरण आईएमआईएस में तत्काल अपडेट करें। विद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे छात्रवृत्ति प्राप्त छात्रों की जानकारी माता-पिता के लिए आसानी से उपलब्ध कराने हेतु सार्वजनिक करें और इसे नियमित रूप से अपडेट करें।

३० चैत्र, काठमांडू। शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने नियम के अनुरूप छात्रवृत्ति न देने वाले विद्यालयों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कदम उठाने हेतु सभी स्थानीय निकायों से समन्वय और सहयोग करने का अनुरोध किया है।

आज मंत्रालय ने संघीय मामले तथा सामान्य प्रशासन मंत्रालय को पत्र लिखकर शिक्षा अधिनियम और नियमावली के अनुसार निजी तथा सार्वजनिक विद्यालयों द्वारा छात्र संख्या के आधार पर निर्धारित १० प्रतिशत छात्रवृत्ति उपलब्ध कराए जाने की जानकारी आईएमआईएस में अपडेट की गई है या नहीं, इस पर निगरानी एवं सहायता करने के लिए स्थानीय निकायों से आग्रह किया है।

अनिवार्य एवं निशुल्क शिक्षा संबंधित अधिनियम, २०७५ के तहत निजी निवेशित विद्यालयों तथा सार्वजनिक शैक्षिक गुठी के अंतर्गत संचालित विद्यालयों को छात्र संख्या के अनुपात में निशुल्क शिक्षा और स्थान आरक्षण प्रदान करना आवश्यक है। शिक्षा नियमावली, २०५९ के अनुसार संस्थागत विद्यालयों को कुल छात्र संख्या का कम से कम १० प्रतिशत गरीब, विकलांग, महिला, दलित एवं आदिवासी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति देनी होती है। इस प्रावधान के तहत सभी विद्यालयों को निर्धारित प्रतिशत के अनुसार छात्रवृत्ति प्रदान करना अनिवार्य है।

मंत्रालय ने छात्रवृत्ति प्राप्त छात्रों का विवरण विद्यालयों से निर्धारित प्रक्रिया के तहत संग्रह करने और आईएमआईएस में शीघ्र अपडेट करने का अनुरोध किया है। साथ ही, छात्रवृत्ति प्राप्त छात्रों का विवरण अभिभावकों द्वारा आसानी से देखे जाने के लिए विद्यालयों को सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया है। यदि कोई विद्यालय इस जानकारी को अपडेट नहीं करता है तो उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई कर अपडेट करवाने का प्रावधान भी पत्र में उल्लिखित है।