
पिछले दो वर्षों में श्रम मंत्रालय में मंत्रियों के परिवर्तन के बावजूद हर मंत्री ने सुधार के लिए नए कार्यदल गठित किए हैं। लेकिन कार्यदल द्वारा दिए गए सुझावों का क्रियान्वयन न होने के कारण वैदेशिक रोजगार क्षेत्र में सुधार की गति रुकावट का सामना कर रही है। विशेषज्ञों ने नए अध्ययन की बजाय पुराने रिपोर्टों के कार्यान्वयन और इच्छाशक्ति पर जोर देने की आवश्यकता बताई है। १ वैशाख, काठमाडौं।
पिछले दो वर्षों में श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्रालय में मंत्रियों के लगातार बदलने के साथ एक स्थायी रुझान उभर कर आया है – हर नए मंत्री द्वारा सुधार का नारा दिए जाने और इसके लिए नए कार्यदल के गठन की प्रक्रिया। हालांकि, इन कार्यदल की रिपोर्टों के क्रियान्वयन में गंभीर कमज़ोरियाँ देखी गई हैं। २०७९ से २०८२ साल तक शरतसिंह भण्डारी से लेकर दीपककुमार साह और रामजी यादव तक कई मंत्री बने, जिन्होंने सभी ने श्रम और वैदेशिक रोजगार क्षेत्र में सुधार हेतु कार्यदल गठित किए।
एक मंत्री द्वारा गठित कार्यदल की सिफारिशों को दूसरे मंत्री ने निरंतरता देने के बजाय हटाने या नए कार्यदल गठित करने की प्रवृत्ति से सुधार की गति बाधित हुई है। २०७९ साल में १३वीं बार श्रम मंत्री बनने वाले शरतसिंह भण्डारी ने वैदेशिक रोजगार क्षेत्र सुधार का काम शुरू करने की बात कही थी और इस उद्देश्य से एक कार्यदल भी गठित किया था। उसके बाद मंत्री बने डीपी अर्याल ने भण्डारी द्वारा लिए गए निर्णयों को निरस्त कर एक और नया कार्यदल बनाया।
विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या कार्यदल के गठन में नहीं बल्कि “क्रियान्वयन की इच्छाशक्ति” में है। श्रम तथा प्रवासन विशेषज्ञ रामेश्वर नेपाल के अनुसार, वैदेशिक रोजगार क्षेत्र में सुधार के लिए नए अध्ययनों की बजाय पुराने रिपोर्टों का क्रियान्वयन अभी सबसे ज़रूरी है। ‘‘बहुत से अध्ययन हो चुके हैं और उन रिपोर्टों को दोबारा देखने पर अनेक समाधान मिलते हैं,’’ उन्होंने कहा।
नेपाल ने बताया कि अब सबसे बड़ी आवश्यकता “नए कार्यदल बनाने” की नहीं, बल्कि “रिपोर्टों के क्रियान्वयन” की है। विशेष रूप से श्रमिकों के खर्च में कमी लाना, ठगी पर नियंत्रण, एजेंटों का विनियमन और सेवा प्रदान करने की गुणवत्ता सुधार जैसी विषयों पर ठोस कार्रवाई के लिए देरी हो चुकी है। मंत्रियों के बाद नए कार्यदल गठित करने की परंपरा ने सुधार की आभासी छवि तो बनाई है, लेकिन वास्तविक सुधार तो कार्यान्वयन पर निर्भर है, यह नेपाल ने स्पष्ट किया।





