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अमेरिकी मध्यस्थता में इजरायल और लेबनान के बीच प्रत्यक्ष वार्ता शुरू

२ वैशाख, काठमाडौं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मध्यस्थता में इजरायल और लेबनान के राजदूतों के बीच वाशिंगटन में दो घंटे लंबी ऐतिहासिक बैठक संपन्न हुई है। सन् १९९३ के बाद से यह उच्च स्तरीय प्रत्यक्ष संवाद है, जिसमें दोनों देशों ने शांति समझौते के लिए और अधिक प्रत्यक्ष वार्ता आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजरायली प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतन्याहू पर युद्ध कम करने के लिए दबाव डाला, जिसके बाद इस वार्ता का मार्ग खुल पाया। इससे पहले नेतन्याहू लेबनान के साथ प्रत्यक्ष वार्ता के प्रस्ताव को अस्वीकार करते रहे थे।

अमेरिका, इजरायल और लेबनान के अधिकारियों के अनुसार इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य लेबनान में हिज़बुल्लाह के प्रभाव को कम करना और उसे निशस्त्रीकरण कर लेबनानी सरकार को सशक्त बनाना है। लेबनानी राजदूत नादा हमादेह ने बैठक में तत्काल युद्धविराम की आवश्यकता पर जोर देते हुए सन् २०२४ के नवंबर में हुए समझौते के पूर्ण कार्यान्वयन पर बल दिया। उन्होंने लेबनान में जारी मानवीय संकट के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह भी किया।

इजरायली राजदूत येचियल लेइटर ने कहा कि इजरायल हिज़बुल्लाह के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि लेबनान को हिज़बुल्लाह के नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए दोनों पक्ष “समीकरण के एक ही पक्ष” पर हैं और इसे एक सकारात्मक उपलब्धि के रूप में देखा जाना चाहिए। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने जारी संयुक्त विज्ञप्ति में स्पष्ट किया कि कोई भी युद्धविराम समझौता इरान के दबाव में नहीं बल्कि दोनों सरकारों के बीच अमेरिकी मध्यस्थता में होना चाहिए।

इरान और पाकिस्तानी मध्यस्थकर्ता हाल ही में हुए इरान-इजरायल युद्धविराम को लेबनान में भी लागू करने का दावा कर रहे हैं, लेकिन अमेरिका और इजरायल इसे निरस्त करते आए हैं। इस वार्ता को इजरायल और लेबनान के बीच सीमा विवाद सुलझाने, सुरक्षा समझौता करने, और अंततः पूर्ण शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के दीर्घकालीन योजना के रूप में माना जा रहा है। दशकों पुराने तनाव और हाल की भीषण लड़ाई के बीच शुरू हुआ यह प्रत्यक्ष संवाद मध्यपूर्व की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।