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अमेरिका-ईरान युद्ध: चार संभावित परिदृश्य

ईरान के साथ युद्धविराम के दूसरे चरण की वार्ता के लिए अमेरिका संवाद कर रहा माना जाता है। पिछली रविवार को हुए 20 घंटे के वार्ता में कोई निष्कर्ष नहीं निकला, फिर भी वर्तमान में दो सप्ताह का युद्धविराम बना हुआ है। निष्कर्षहीन वार्ता के एक दिन बाद ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ होर्मुज जलसंधि के आस-पास समुद्री नाकाबंदी की घोषणा की। इस प्रारंभिक वार्ता की विफलता को कैसे समझा जाए और आने वाली वार्ता की संभावनाएं क्या हो सकती हैं? क्या ईरान और अमेरिका नियंत्रित संघर्ष की ओर हैं या असंभव बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं? नीचे संभावित चार परिदृश्य चर्चा किए गए हैं।

१. कमजोर युद्धविराम के “रणनीतिक कदम”
कुछ सप्ताहों की लड़ाई के बाद आए इस युद्धविराम ने दोनों पक्षों में संकट नियंत्रण की इच्छा दिखाई। लेकिन शुरू से ही इसकी शर्तें, भौगोलिक दायरा और संघर्ष विराम में शामिल लक्षित क्षेत्र में विभाजन देखा गया है। युद्धविराम उल्लंघन की व्याख्या में भी कई विश्लेषक इसे टिकाऊ आधार नहीं, बल्कि लड़ाई में लागू एक रणनीतिक रोक समझते हैं। “लड़ाई शुरू होने पर सहमति की संभावना लगभग नहीं थी,” वाशिंगटन स्थित फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के वरिष्ठ शोधकर्ता बेहनाम बेन तालेब्लू ने कहा। “यह सभी सिद्धांत, रुख और नीतियां हैं जिनमें अमेरिका और ईरान के बीच वर्षों से मतभेद थे। युद्ध ने तुरंत उन मतभेदों को कम नहीं किया, बल्कि वे और बढ़ गए,” उन्होंने बताया।

२. “छद्मयुद्ध”
एक संभावित और सबसे संभव परिदृश्य है “नियंत्रित लड़ाई” की ओर लौटना। इसका मतलब है कि दोनों पक्ष पूर्ण स्तर के युद्ध में नहीं उतरेंगे, लेकिन सैन्य कार्रवाई पूरी तरह से बंद नहीं करेंगे। इसमें सीमित स्वरूप के हमले सैन्य संरचना, लक्ष्य और आपूर्ति मार्गों पर जारी रह सकते हैं। इस स्थिति में छद्म (‘प्रॉक्सी’) समूहों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। ईराक या अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में ईरान समर्थित समूहों की गतिविधि बढ़ सकती है। युद्ध की तीव्रता सीधे तौर पर नहीं बढ़ेगी, परंतु युद्ध का भौगोलिक दायरा फैल सकता है।

३. शांतिपूर्ण कूटनीतिक निरंतरता
पाकिस्तान में वार्ता के विफल होने के बाद कूटनीतिक प्रयास ठप या वार्ता बंद होने की बात नहीं कही जा सकती। पाकिस्तान की मध्यस्थता के कारण आने वाले दिनों में तेहरान और वाशिंगटन के बीच संदेशों का आदान-प्रदान होता रहेगा और प्रयास जारी रह सकते हैं।

४. समुद्री नाकाबंदी की निरंतरता
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अमेरिकी नौसेना को होर्मुज जलसंधि में जलयान आवागमन को रोकने और ईरान पर नाकाबंदी करने का आदेश दिया है। यह कदम ईरान के तेल व्यापार को संकट में डालकर अर्थव्यवस्था को भारी क्षति पहुंचा सकता है और ईरानी तेल के मुख्य खरीदार चीन पर भी दबाव बना सकता है।

अंततः इन परिदृश्यों से युद्ध और शांति के बीच अस्पष्ट रेखा वाली स्थिति विकसित हो सकती है। पाकिस्तान में वार्ता की विफलता कूटनीतिक अंत नहीं है, न ही व्यापक युद्ध की आवश्यकता को दर्शाती है। बल्कि यह एक अस्पष्ट स्थिति की निरंतरता को इंगित करती है।