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आम के चेहरे पर झलकता एक दिन

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा के बाद तैयार किया गया।

  • यह कविता अंगी की आँखों में खोए हुए सपनों की कहानी बताती है और कैसे उनके दृष्टिकोण का रंग समय के साथ नहीं बदला।
  • आस्योंग द्वारा छोड़ा गया फूलों वाले पैटर्न वाला झोला आंसुओं, अपमान और संघर्ष से भरा हुआ है और आज अंतिम विदाई के रूप में अंतिम संस्कार स्थल की ओर जा रहा है।
  • नया साल और मौसमी बदलाव से प्रकृति में नया जीवन आता है, पर कविता बताती है कि अंगी की आँखों का रंग अपरिवर्तित रहा।

अपने ही प्रकाश में

नामहीन,

आशा की एक झलक—

अचानक बुझ गई,

नाजुक

रात!

 

अंगी की धुंधली

आँखों के भीतर,

नमकीले सपने,

पार्टी जैसे एकाकी चाँद,

बादलों के बीच खोया हुआ,

खो चुका,

ठंडे, अनजाने गांवों में

वापसी का रास्ता नहीं,

हवाओं के झोंकों ने उठा लिया!

हर साल,

नया साल,

पृथ्वी की परिक्रमा पूरी करते हुए,

अंगी के घर के आंगन में आता है,

मौसम बदलते हैं,

बसंत खेतों में घूमता है,

आकाश के बादल,

दीर्घ श्वास छोड़ते हैं,

पृथ्वी से मिलने आते हैं,

दूध जैसे

और जीरा फूल के गुच्छे भी

अपने नए पत्ते बदलते हैं,

पर अपरिवर्तित,

अटूट है

अंगी की आँखों का रंग!

कौन सा वर्ष, कौन सा मौसम?

इतना लंबा समय बीत चुका है,

आस्योंग— वह

खो जाना,

फूलों की पैटर्न वाला

झोला छोड़ा गया!

आंसू, अपमान, संघर्ष से भरा,

वह कड़वा

फूलों का पैटर्न झोला,

रुकावट न छोड़ते हुए—

पहाड़ चढ़ता, नीचे जाता,

बीस कोस की यात्रा करता,

आज अचरज के साथ आया है,

अंगी को छोड़कर—

अंतिम संस्कार स्थल की ओर चला,

कभी वापस नहीं आएगा,

और विदाई दी!

आज मां के चेहरे पर देखने का दिन है!

(जिला पुलिस कार्यालय प्रमुख, सिजुवा)