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मिनी संसद् सभापतियों की पृष्ठभूमि कैसी है?

४ वैशाख, काठमाडौं । शुक्रवार को १२ संसदीय समितियों ने सभापतियों का चयन किया। मिनी संसद के रूप में जानी जाने वाली संसदीय समितियों के नए सभापतियों में से ९ पहली बार सांसद बने हैं, जबकि ३ प्रतिनिधि पहले से संसदीय अनुभव रखते हैं।

राज्य व्यवस्था तथा सुशासन समिति के सभापति हरि ढकाल, कृषि, सहकारी तथा प्राकृतिक स्रोत समिति के सभापति अशोककुमार चौधरी और सार्वजनिक लेखा समिति के सभापति भरतबहादुर खड्काले पूर्व संसद में विभिन्न समितियों में काम करने का अनुभव प्राप्त किया है।

बाकी ९ समितियों के सभापति पहली बार संघीय संसद में प्रवेश कर रहे हैं। कानूनी न्याय तथा मानव अधिकार समिति की सभापति समीक्षा बास्कोटा, पूर्वाधार विकास समिति के सभापति आशिष गजुरेल और महिला तथा सामाजिक मामलों की समिति की सभापति आकृति अवस्थी हैं। संसदीय सुनवाई समिति के सभापति बोधनारायण श्रेष्ठ हैं, जबकि अंतर्राष्ट्रीय संबंध और पर्यटन समिति की सभापति सुम्निमा उदास और अर्थ समिति के सभापति कृष्णहरी बुढाथोकी हैं।

राज्य के निर्देशक सिद्धांत, नीति और दायित्व कार्यान्वयन अनुश्रवण एवं मूल्यांकन समिति के सभापति गणेश कार्की, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा सूचना प्रौद्योगिकी समिति के सभापति ओजस्वी शेरचन और उद्योग, वाणिज्य तथा श्रम एवं उपभोक्ता हित समिति के सभापति रहबर अंसारी हैं।

उद्योग, वाणिज्य तथा श्रम एवं उपभोक्ता हित समिति के सभापति अंसारी पहले से मधेस प्रदेश के सभासद रह चुके हैं तथा प्रतिनिधि सभा के चुनाव में विजयी हुए हैं।

चार दशकों से अधिक राजनीतिक अनुभव के साथ सार्वजनिक लेखा समिति का नेतृत्व

सार्वजनिक लेखा समिति संसद का अत्यंत महत्वपूर्ण विषयगत समूह है। यह समिति सरकारी कोष के खर्च के आवश्यक मितव्ययिता और प्रभावशीलता की जांच करती है, और इसे सरकार की जांच एवं संतुलन की भूमिका दी जाती है।

सार्वजनिक लेखा समिति का सभापति आमतौर पर प्रमुख विपक्षी दल को दिया जाता है। इस बार नेपाली कांग्रेस के भरतबहादुर खड्का सर्वसम्मति से सभापति चुने गए हैं।

सन् २०१६ में डोटी के खिरसैन गाविस में जन्मे खड्का २०३२ साल से राजनीति में सक्रिय हैं। स्नातक स्तर तक की शिक्षा हासिल करने वाले उन्होंने २०३९ साल में खिरसैन गाँव पंचायत के प्रधान पंचायत के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी।

२०४३ साल में डोटी जिला पंचायत के उपसभापति, २०४४ साल में जिला पंचायत के सभापति और २०४९ साल के स्थानीय निकाय चुनाव के बाद जिला विकास समिति के उपसभापति बने। इसके बाद २०५४ साल में पुनः जिला विकास समिति के सभापति नियुक्त किए गए थे।

२०६२/०६३ साल के गणतांत्रिक व्यवस्था के बाद भी राजनीतिक रूप से सुदृढ़ रहे। २०७० के संविधान सभा चुनाव से संसद सदस्य बने खड्के ने २०७४ के प्रदेश सभा चुनाव में सुदूरपश्चिम प्रदेश से सदस्यता हासिल की।

२०८२ साल में डोटी क्षेत्र से प्रतिनिधि सभा सदस्य प्रत्यक्ष निर्वाचित हुए खड्के को कांग्रेस ने सार्वजनिक लेखा समिति का नेतृत्व सौंपा है।

अनुभवी युवाओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

राज्य व्यवस्था और सुशासन समिति एक ऐसी समिति है जिसमें पार्टी के शीर्ष नेता भी सदस्य होते हैं। यह समिति सरकार को संसद के प्रति जिम्मेदार और जवाबदेह बनाती है।

इस समिति का नेतृत्व रास्वपा के हरि ढकाल के हाथ में है। वे २०७९ साल के चुनाव में चितवन-१ से नेपाली कांग्रेस के डा. विश्व पौडेल और एमाले के सुरेन्द्र पाण्डे को पराजित कर लोकप्रिय हुए।

ढकाल अब राष्ट्रीय प्रमुख नेताओं का नेतृत्व भी करेंगे। वह समिति में रास्वपा के सभापति रवि लामिछाने, नेकपा एमाले के संयोजक और पूर्व प्रधानमंत्री पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचण्ड’, श्रम संस्कृति पार्टी के अध्यक्ष हर्कराज राई और राष्ट्रिय प्रजातन्त्र पार्टी (राप्रपा) के संसदीय दल के नेता ज्ञानबहादुर शाही के साथ हैं।

इसी तरह अमरेश कुमार सिंह, अर्जुननरसिंह के.सी., पद्माकुमारी अर्याल, भीष्मराज आँग्देम्बे, मोहम्मद इश्तियाक राई और युवराज दुलाल जैसे अनुभवी नेता भी इसी समिति में शामिल हैं।

राज्य व्यवस्था समिति के सदस्यों में कविंद्र बुर्लाकोटी, कमल सुवेदी, करिश्मा कठरिया, गजला शमीम मिकरानी, निश्कल राई, पुरुषोत्तम शुप्रभात यादव, आफसाना बानु, विश्वराज पोखरेल, रमेश प्रसाईं, रविन्द्र पटेल, राम लामा, रुबिना आचार्य, रेखा कुमारी यादव, विष्णुमाया बिक और श्रद्धा कुवँर क्षेत्री भी हैं।

४२ वर्षीय ढकाल एमाले पृष्टभूमि के युवा नेता हैं। विद्यालय और विश्वविद्यालय के समय वे एमाले के विद्यार्थी संगठन अनेरास्ववियु के सदस्य और सचिव भी रहे।

व्यवसाय में कुछ उतार-चढ़ाव के बाद उन्होंने आध्यात्मिक मार्ग अपनाया और योग, ध्यान तथा तपस्या के विभिन्न कार्यक्रमों में सक्रिय हुए।

२०७९ साल से रास्वपा में सक्रिय ढकाल ने अपने नेतृत्व में मौजूद शीर्ष नेताओं का विश्वास अर्जित किया है और सरकार को संसद के प्रति जवाबदेह बनाने की चुनौती स्वीकार की है।

उच्च स्तरीय कानून निर्माण के अतिरिक्त यह समिति सरकार को सुशासन, शांति सुरक्षा और कानूनी शासन संबंधी कार्यक्रमों में आवश्यक सलाह एवं निर्देशन देती है।

इस समिति के अधिकार क्षेत्र में प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद कार्यालय, गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, संघीय मामिला एवं सामान्य प्रशासन मंत्रालय, अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग, लोक सेवा आयोग, निर्वाचन आयोग इत्यादि संस्थाएं आती हैं।

अन्य अनुभवी युवा सांसद अशोककुमार चौधरी कृषि, सहकारी एवं प्राकृतिक स्रोत समिति के सभापति हैं।

२०७९ साल समानुपातिक सूची से सांसद बने चौधरी इस बार सुनसरी-३ से प्रत्यक्ष चुनाव जीत चुके हैं। कांग्रेस के मुख्य प्रतिद्वंद्वी विजयकुमार गच्छदार और एमाले की भगवती चौधरी को पीछे छोड़ते हुए चौधरी को समिति नेतृत्व मिला।

यह समिति पूर्व में भी कांग्रेस नेतृत्व में थी। इस समिति के अधिकार क्षेत्र में कृषि, पशुपालन, भूमि व्यवस्था, सहकारी, गरीबी निवारण, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और संबंधित संस्थाएं शामिल हैं।

चूंकि यह समिति जनजीवन पर सीधे प्रभाव डालने वाले विषयों पर कार्य करती है, इसलिए इसके नेतृत्व के लिए अनुभवी नेताओं का प्रतिस्पर्धा होता है। ४२ वर्षीय चौधरी को इस बार नेतृत्व सौंपा गया है।

राजनीति में आने से पहले खेलकूद क्षेत्र में सक्रिय रहे चौधरी विश्व के प्राचीन डोरीतान खेल के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भी हैं। २०१९ में १४वें एशियन टग ऑफ वार चैंपियनशिप में वे नेपाल का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

नेपाल डोरीतान संघ के सलाहकार भी रह चुके चौधरी खेल क्षेत्र में खिलाड़ियों के अधिकार, पूर्वाधार और अवसर विस्तार के लिए लगातार आवाज उठा रहे हैं। पूर्व संसद में उन्होंने कृषि एवं कृषि सुधार के तहत मल, बीज और सिंचाई की सुविधाओं को प्राथमिकता दी थी।

उन्होंने कृषि वस्तुओं के न्यूनतम समर्थन मूल्य और बाजार गारंटी सुनिश्चित करने का वादा किया है, जिसके कारण वे कृषक समुदाय में लोकप्रिय हैं।

परीक्षात्मक प्रश्नकर्ता

राज्य निर्देशक सिद्धांत, नीति और दायित्व कार्यान्वयन अनुश्रवण समिति के सभापति गणेश कार्की प्रश्नकर्ता के रूप में परिचित हैं। अपनी पार्टी संयोजक रवि लामिछाने को भी प्रश्न करते हुए विद्रोही नेता कहे जाने वाले कार्की फिर से सरकार की संसद के प्रति जवाबदेही पर सवाल उठाएंगे।

नेपाल के संविधान के भाग ४ में राज्य संचालन में निर्देशक सिद्धांत, नीति एवं दायित्व को मार्गदर्शन के रूप में उल्लेख किया गया है। इसके कार्यान्वयन पर सुझाव देने की जिम्मेदारी कार्की पर है।

मोरङ क्षेत्र नं. ३ से निर्वाचित ४० वर्षीय कार्की एक चलचित्र लेखक भी हैं।

अर्थ समिति के सभापति कृष्णहरी बुढाथोकी दो दशक से अर्थशास्त्र अनुसंधान में सक्रिय अर्थ विशेषज्ञ हैं।

सार्वजनिक मंचों पर नेपाल के लिए उपयुक्त आर्थिक नीतियों की सलाह देते रहे उन्होंने संसदीय समिति का नेतृत्व प्राप्त किया है।

बुढाथोकी के नेतृत्व में सरकार द्वारा किए गए आर्थिक सुधारों की समीक्षा की जाएगी और आवश्यकतानुसार सुधारों की सिफारिश भी की जाएगी।

पूर्वाधार विकास समिति के सभापति आशिष गजुरेल ने सरकार के निवेश बोर्ड में ११ वर्ष से अधिक समय परामर्शदाता के रूप में काम किया है।

उनकी पृष्ठभूमि ट्रैफिक इंजीनियरिंग और यातायात प्रबंधन की है। वे सतत यातायात, सड़क सुरक्षा, पूर्वाधार षड्यंत्र और नीति कार्यान्वयन में सक्रिय रहे हैं।

जर्मनी से यातायात प्रणाली में स्नातकोत्तर किया गजुरेल आधुनिक और वैज्ञानिक पूर्वाधार विकास में विशेष योगदान देने की अपेक्षा रखते हैं।

संसदीय सुनवाई समिति के सभापति बोधनारायण श्रेष्ठ विकास नीतिगत सुधार और परिणाममुखी राजनीति के पक्षधर हैं।

सरकार को संवैधानिक निकायों की नियुक्ति में दक्षता, क्षमता और ईमानदारी सुनिश्चित करने के सुझाव देने के अलावा आवश्यक होने पर कड़ी चेतावनी भी देंगे।

प्रधान न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश, न्याय परिषद सदस्य, संवैधानिक निकाय प्रमुख, राजदूतों की नियुक्ति सिफारिश और निर्णय करना इस समिति के दायरे में आता है।

राजनीति शास्त्र में स्नातक और ग्रामीण विकास में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त ५६ वर्षीय श्रेष्ठ ‘सही जगह सही व्यक्ति’ की नियुक्ति सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

सड़क आंदोलन में सक्रिय नेता को संसदीय नेतृत्व

कानून न्याय और मानव अधिकार समिति की सभापति समीक्षा बास्कोटा विवेकशील साझा पार्टी की नेता हैं। अमेरिका से कानून में स्नातकोत्तर करने वाली उन्होंने गत मंसिर में विवेकशील साझा और रास्वपा के एकीकरण के बाद नेपाली संसद में प्रवेश किया था।

पहले सड़क से मूल अधिकारों की कार्यान्वयन के लिए आवाज उठाने वाली वे अब संसदीय माध्यम से सरकार से मांग करेंगी। कानून, मानव अधिकार और न्याय प्रणाली सुधार में सक्रिय वे सरकार को सकारात्मक बदलाव लाने के सुझाव देंगी।

उनकी समिति अंतरराष्ट्रीय संधि, शांति प्रक्रिया समेत अन्य विषयों में नेतृत्व करेगी। कानून, न्याय और संसदीय मामलों के मंत्रालय, न्याय परिषद, न्याय सेवा आयोग और महान्यायवादी कार्यालय की निगरानी भी उनकी जिम्मेदारी होगी।

अंतरराष्ट्रीय संबंधों और पर्यटन समिति की सभापति सुम्निमा उदास सीएनएन पर कई दशक तक काम कर चुकी पत्रकार हैं। द्वंद्ववग्रस्त क्षेत्रों से कठिन रिपोर्टिंग कर चुकीं उन्होंने अब नेपाल की विदेश नीति संबंधी बहस को आगे बढ़ाने का अवसर प्राप्त किया है।

शिक्षा, स्वास्थ्य और सूचना प्रौद्योगिकी समिति की सभापति ओजस्वी शेरचन चिकित्सकीय पृष्ठभूमि की सांसद हैं। वे बीपी कोइराला स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान धरान से बायोकेमिस्ट्री में विशेषज्ञता प्राप्त कर चुकी हैं।

उनकी समिति चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, स्वास्थ्य प्रणाली सुधार और महामारी प्रबंधन में नीति निर्माण में नेतृत्व देगी।

नई पीढ़ी की समर्थक महिला सामाजिक मामलों की समिति नेतृत्व में

महिला तथा सामाजिक मामलों की समिति की सभापति आकृति अवस्थी हैं जो जेनजी आंदोलन के घायल मुकेश अवस्थी की दीदी हैं। समानुपातिक सांसद रह चुकीं उन्होंने मजबूती से भूमिका निभाई है।

समावेशिता और अधिकारों पर जोर देने वाली उनकी समिति महिला, बालबालिका, वरिष्ठ नागरिक मंत्रालय, राष्ट्रीय महिला आयोग, दलित आयोग, समावेशी आयोग, आदिवासी, मधेसी, थारू और मुस्लिम आयोगों के कामकाज की निगरानी करेगी।

जेनजी आंदोलन की सड़क से उठाई गई आवाज को संसदीय प्रक्रिया में लेकर सरकार को सार्थक प्रतिक्रिया देने की नई नेतृत्व से उम्मीद की जा रही है।