गगन-विश्व नेतृत्व वाली पार्टी विद्रोह की वैधता: असंतुष्टों को सम्हालने के उपाय क्या हैं?

४ वैशाख, काठमाडौं। आठ महीने से जारी कांग्रेस के आंतरिक नेतृत्व परिवर्तन विवाद को शुक्रवार रात सर्वोच्च अदालत ने कानूनी रूप से समाप्त कर दिया है। सर्वोच्च अदालत ने गगन थापा नेतृत्व वाले विशेष महाधिवेशन से चुने गए नेतृत्व को वैधता देते हुए कांग्रेस के विवाद का कानूनी समाधान प्रस्तुत किया है। इससे पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन के लिए गगन थापा और विश्वप्रकाश शर्मा जैसे नेताओं द्वारा उठाए गए जोखिम को आधिकारिक मान्यता मिली है।
जेनजी आंदोलन के बाद शेरबहादुर देउवा के नेतृत्व पर व्यापक आलोचना के चलते तत्कालीन महामंत्री गगन थापा और विश्वप्रकाश शर्मा सहित अन्य नेताओं ने पार्टी के भीतर विद्रोह शुरू किया और नेतृत्व परिवर्तन की मांग रखी। उन्होंने विशेष महाधिवेशन की मांग की, लेकिन तत्कालीन नेतृत्व ने इसे अस्वीकार कर दिया। इसके बाद ४० प्रतिशत महाधिवेशन प्रतिनिधियों ने विशेष महाधिवेशन का आवाज उठाया लेकिन संस्थापन पक्ष ने इसे टालने की कोशिश की, जिसका विरोध गगन थापा और विश्वप्रकाश शर्मा ने किया।
भृकुटीमंडप में ५४ प्रतिशत प्रतिनिधियों की उपस्थिति में पार्टी नेतृत्व परिवर्तन और नीति संशोधन का निर्णय लिया गया, जिसे निर्वाचन आयोग ने भी वैध माना। लेकिन आयोग के इस निर्णय के खिलाफ तत्कालीन कार्यवाहक सभापति पूर्णबहादुर खड्का सहित नेताओं ने सर्वोच्च अदालत का रुख किया। फागुन २१ को हुए चुनाव में विशेष महाधिवेशन द्वारा निर्वाचित नेतृत्व के हस्ताक्षर वाले देउवा समूह के नेताओं ने भी भाग लिया। कानूनी सवालों पर आज सर्वोच्च अदालत ने स्पष्टता प्रदान की है।
स्थापित संगठन और नेतृत्व को चुनौती देने वाले गगन थापा जैसे नेताओं के कदम को अदालत ने वैधता देते हुए पार्टी में उठे असंतोष को संवैधानिक रूप से उचित माना है। सर्वोच्च अदालत ने गगन थापा की कांग्रेस को चार आधारों पर आधिकारिकता दी है।
- पहला: पुरानी कार्यसमिति की अवधि खत्म होना केवल तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि नेतृत्व की वैधता का अंत भी था। वैधता समाप्त होने पर निर्णय स्वतः सवाल के घेरे में आते हैं, जिससे विशेष महाधिवेशन का औचित्य मजबूत होता है।
- दूसरा: नियमित महाधिवेशन न करना नेतृत्व की अक्षमताऔर इच्छाशक्ति की कमी बताता है, जिसके लिए न्यायालय का दृढ़ मत है। लोकतांत्रिक पार्टी में समय पर नेतृत्व हस्तांतरण का अभाव न केवल प्रबंधन की कमजोरी है बल्कि लोकतांत्रिक मूल्य पर चोट भी है। इसलिए विशेष महाधिवेशन की मांग आवश्यक हो सकती है।
- तीसरा: देउवा समूह द्वारा उठाए गए कानूनी प्रश्न कमजोर आधार पर हैं, क्योंकि विधान के अनुसार विशेष महाधिवेशन की मांग पर उसे अनिवार्य रूप से संपन्न करना पड़ता है।
- चौथा: सबसे निर्णायक पक्ष है कि विशेष महाधिवेशन से चयनित नेतृत्व ने चुनाव में भाग लेकर जनमत से स्वीकृति प्राप्त की, जिसे अदालत ने स्वीकार किया। यह सिद्ध करता है कि लोकतंत्र में अंतिम निर्णयकर्ता केवल जनता ही हैं।
इस आदेश ने कांग्रेस विवाद को समाप्त करने के साथ भविष्य के लिए नया उदाहरण स्थापित किया है। देउवा समूह ने शुरू में अदालत के निर्णय पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। नेता विमलेन्द्र निधि ने विशेष महाधिवेशन को अभी भी स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा, ‘सर्वोच्च अदालत के निर्णय का सम्मान करता हूं लेकिन विशेष महाधिवेशन को मैं कभी स्वीकार नहीं कर पाऊंगा।’
प्रकाशशरण महत ने भी निर्णय को अप्रत्याशित और अस्वाभाविक बताया और आक्रामक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, ‘अब कांग्रेस कैसे आगे बढ़ेगी इस पर असमंजस है। देश के सामने चुनौती है और कांग्रेस भी उसी स्थिति में है, इसलिए सभी को एकत्रित कर आगे बढ़ना जरूरी है।’
अदालत के आदेश के बाद गगन थापा का नेतृत्व कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त हो गया है, इसलिए पार्टी के अंदर समस्याओं को हल करने की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर आई है। अब देउवा समूह का रास्ता क्या होगा? अदालत के निर्णय को स्वीकार कर नए नेतृत्व के साथ सहयोग करेंगे या राजनीतिक विरोध का नया अध्याय शुरू करेंगे? वे भी अनिश्चितता में हैं। लेकिन निर्णय को अस्वीकार करने से पार्टी विभाजन तक पहुंच सकता है। हालांकि देउवा समूह के नेता कांग्रेस के लोकतांत्रिक और कानून व्यवस्था में विश्वास रखते हैं, इसलिए पार्टी के विभाजन की संभावना कम है।
गगन थापाने अब पार्टी को सम्हालने, विश्वास पुनः स्थापित करने, विभाजन को एकता में बदलने और जनता के साथ संबंध सुधारने की चुनौती ली है। विद्रोह से नेतृत्व तक पहुंचना उपलब्धि है, बावजूद इसके पिछले चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है, इसलिए संभावित विभाजन रोकना उनकी मुख्य जिम्मेदारी होगी।
उपसभापति विश्वप्रकाश शर्मा ने सभी को एक साथ लेकर आगे बढ़ने का संकल्प जताया है। महामंत्री गुरुराज घिमिरे और प्रदीप पौडेल ने भी अदालत के निर्णय के बाद एकता का मार्ग अपनाने की बात कही। महामंत्री गुरुराज घिमिरे ने कहा, ‘सर्वोच्च अदालत का निर्णय न्यायपूर्ण है, जो कांग्रेस सदस्यों द्वारा देश में कानून और नियम के लिए किए गए संघर्ष का परिणाम है। यह निर्णय किसी की जीत या हार नहीं है।’
विशेष महाधिवेशन से चुना गया नेतृत्व फिलहाल अंतरिम है, इसलिए अब मुख्य जिम्मेदारी 15वें महाधिवेशन के आयोजन की है, जो असोज में प्रस्तावित है। अब गगन और विश्व कैसें पार्टी को एक सूत्र में लाएंगे, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।





