१०० रुपये से अधिक मूल्य के सामानों पर लगने वाले कर के बाद सीमा क्षेत्र के जीवन पर प्रभाव

सरकार ने भारत से आयात होने वाले १०० रुपये के बराबर या उससे अधिक मूल्य वाले सामानों पर अनिवार्य सीमा शुल्क लगाने का निर्णय लिया है। इसके कारण कैलाली के गौरीफंटा सीमा पर आने-जाने और व्यापार में कमी आई है। सशस्त्र पुलिस के आंकड़ों के अनुसार वैशाख महीने की शुरुआत से गौरीफंटा सीमा पर दैनिक वाहनों की आवागमन आधा घट गया है। कैलाली उद्योग वाणिज्य संघ के अध्यक्ष पुष्करराज ओझा ने कहा कि कर की सीमा बढ़ाने से सरकार की राजस्व वृद्धि होगी और अवैध आयात रोका जा सकेगा। ७ वैशाख, धनगढ़ी।
कैलाली के गौरीफंटा सीमा पर पहले जैसे चहल-पहल कम होने लगी है। सुबह से शाम तक खरीदारी के झोले लेकर आने-जाने वाले लोगों की संख्या घटी है। सीमा के दूसरी ओर भारत की गौरीफंटा बाजार और नेपाल की डोकेबाजार दोनों में व्यापार धीमा पड़ गया है। सरकार द्वारा भारत से लाए जाने वाले न्यूनतम १०० रुपये मूल्य वाले सामानों पर भी सीमा शुल्क अनिवार्य करने के बाद सीमा क्षेत्र के जनजीवन पर इसका प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ा है, ऐसा स्थानीय व्यापारियों ने बताया।
छोटे चप्पल खरीद के लिए भारत जाने वाली नेपाली जनता अब कम हो गई है, जिससे सीमा क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियाँ स्थिर हो गई हैं। खरीदारी में कमी आने से व्यापार पर असर पड़ा है, यह कञ्चनपुर के पुनर्वास नगरपालिका–११ स्थित डोकेबाजार में खुदरा दुकान चलाने वाले दलबहादुर विक के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा, ‘सरकार ने १०० रुपये तक के सामानों पर भी कर लगाया है, इसलिए खरीदारी के लिए भारत जाने वाले लोग कम हो गए हैं। इससे हमारा व्यापार भी प्रभावित हुआ है।’
सशस्त्र पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक १ वैशाख को गौरीफंटा सीमा पर २३४ चार-पहिया वाहनों ने आवागमन किया था। २ वैशाख को २३२, ३ वैशाख को १९७ और ४ वैशाख को केवल २०७ वाहन ही देखे गए। सशस्त्र पुलिस ने कहा कि नई व्यवस्था से अवैध आयात पर नियंत्रण में मदद मिली है।
कैलाली उद्योग वाणिज्य संघ के अध्यक्ष पुष्करराज ओझा ने कहा, ‘हर सामान पर कर देकर ही आयात करना बेहतर व्यावसायिक अभ्यास है। कर की सीमा बढ़ाकर अवैध आयात को पूरी तरह रोकना चाहिए।’ साथ ही उन्होंने सुदूर पश्चिम के मजदूरों की सहज आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता भी बताई।





