
चीन के सिचुआन प्रांत में नई विषैला सर्प प्रजाति ‘ट्रिमेरेसुरस ली’ मिली है, जिसे लंबे समय तक सामान्य प्रजाति समझकर अनदेखा किया गया था। डीएनए विश्लेषण ने इस सर्प की अलग विकासवादी शाखा की पुष्टि की है और इसके सिर के विशिष्ट लक्षण अन्य प्रजातियों से भिन्न हैं। यह सर्प सिचुआन के माउंट एमेई और सिलिंग स्नो माउंटेन क्षेत्र में पाया गया है, जिससे जैविक विविधता के केंद्र में और भी अज्ञात प्रजातियों के होने की संभावना उजागर हुई है।
चीन के सिचुआन प्रांत की कुहास भरी पहाड़ियों में दशकों से छिपा चमकीले हरे रंग का विषैला सर्प (पिटवाइपर) खोजा गया है। वैज्ञानिकों ने इसे पूरी तरह से नई प्रजाति घोषित किया है। इससे पहले इसे सामान्य प्रजाति समझकर नजरअंदाज किया जाता रहा, लेकिन हाल ही में किए गए डीएनए विश्लेषण ने इसकी अलग पहचान की पुष्टि की। ‘जुसिस्टेमेटिक्स एंड इवोल्यूशन’ जर्नल में प्रकाशित इस शोध में दावा किया गया है कि अध्ययन क्षेत्रों में और भी अज्ञात प्रजातियां मौजूद हैं।
चेंगडू इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजी और जाइंट पांडा नेशनल पार्क के शोधकर्ताओं ने इस नई प्रजाति का नाम प्राचीन चीनी दर्शनशास्त्री ‘लाओजी’ के सम्मान में ‘ट्रिमेरेसुरस ली’ यानी ‘हुवाक्सी ग्रीन पिटवाइपर’ रखा है। लाओजी के दर्शन मानव और प्रकृति के सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व पर जोर देते हैं, जो इस सर्प के मिलने वाले राष्ट्रीय अभयारणय के संरक्षण अभियान के साथ मेल खाते हैं।
डीएनए और शारीरिक विशेषताओं के आधार पर यह सर्प दशकों तक अपने सामान्य हरे रंग के कारण ‘बांस पिटवाइपर’ समझा जाता था। लेकिन विस्तृत आनुवंशिक परीक्षणों ने इसकी अलग विकास शाखा होने की पुष्टि की है। शारीरिक रूप से भी इसके सिर के पैटर्न अन्य संबंधित प्रजातियों से स्पष्ट रूप से अलग हैं। इस नई सर्प प्रजाति में नर और मादा का रूप और स्वभाव में भी स्पष्ट अंतर है। दोनों का शरीर चमकीले हरे रंग का होता है, पर नर के शरीर के किनारों पर गहरे लाल और सफेद धब्बे होते हैं और आंखों का रंग एम्बर जैसा होता है। मादा में सामान्य पीले धब्बे और संतरंगी पीले रंग की आंखें होती हैं। लगभग 80 सेंटीमीटर लंबा यह सर्प अत्यंत विषैले गुणों वाला है और काटने पर मनुष्य को गंभीर रूप से बीमार कर सकता है।
जैविक विविधता के इस केंद्र में यह सर्प सिचुआन के माउंट एमेई और सिलिंग स्नो माउंटेन के घने वन क्षेत्र में पाया गया है, जो विश्व के जैविक विविधता संपन्न क्षेत्रों में से एक है। शोध टीम के प्रमुख बो काई के अनुसार, इस खोज ने यह साबित किया है कि वर्षों से अन्वेषण किए जा रहे क्षेत्रों में भी बहुत सी अज्ञात वस्तुएं खोजी जानी बाकी हैं। वैज्ञानिकों ने जैविक विविधता के इन केंद्रों में निरंतर स्थल आधारित सर्वेक्षण जारी रखने पर ज़ोर दिया है।





