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प्रधानमंत्री ने उपकुलपतियों को निर्देश – छात्र एवं कर्मचारी राजनीतिक संगठन हटाने का आह्वान

७ वैशाख, काठमाडौं। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने विश्वविद्यालयों एवं स्वास्थ्य संबंधित शैक्षिक संस्थाओं में मौजूद राजनीतिक छात्र और कर्मचारी संगठनों की संरचनाओं को तत्काल किसी भी परिस्थिति में समाप्त करने का निर्देश उपकुलपतियों को दिया है। यह निर्देश उन्होंने सोमवार को प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद्को कार्यालय में नेपालभर के विश्वविद्यालयों और प्रतिष्ठानों के उपकुलपतियों के साथ करीब साढ़े तीन घंटे चली बैठक के दौरान दिया। प्रधानमंत्री शाह ने शैक्षिक संस्थानों में किसी भी बहाने से राजनीति करने की अनुमति न देने को स्पष्ट किया और राजनीतिक संगठनों की संरचनाओं को हटाने में कोई कानून बाधक नहीं होगा, यह भी बताया।

अस्पताल, क्याम्पस और विद्यालय जैसे पवित्र स्थानों पर किसी भी पार्टी का झंडा, प्रभाव या संगठन बनाए जाने की अनुमति न देने का निर्णय बताते हुए, यदि राजनीति करनी है तो पेशेवर जिम्मेदारियों से अलग होकर पूरी तरह राजनीति में संलग्न होने का सुझाव दिया। चर्चा के क्रम में नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रा. डा. धनेश्वर नेपाल ने कहा कि छात्र संगठन हटाने के प्रयास में उन्हें उल्टे धमकियाँ और आक्रमण झेलना पड़ा है। जवाब में प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि राजनीतिक संगठनों की संरचनाएं हटाते समय सुरक्षा से जुड़ी किसी भी समस्या पर संबंधित मंत्रालय या उनके सचिवालय को तुरंत सूचित करें।

प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि सरकार आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था और समर्थन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है और पुलिस प्रशासन अपना कर्तव्य पूरी लगन से निभाएगा। साथ ही उपकुलपतियों से पूरी निश्चितता और भरोसे के साथ जिम्मेदारी निभाने का आग्रह भी किया। उन्होंने शैक्षिक कैलेंडर का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने तथा परीक्षाओं के परिणाम एक माह के अंदर प्रकाशित करने के लिए कड़ा निर्देश दिया। इसी प्रकार, शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री सस्मित पोखरेल ने भी राजनीतिक दलों से संबद्ध संगठनों को समाप्त करने के लिए मंत्रालय की ओर से निर्देश जारी किए जाने की बात कही तथा जोर दिया कि कानून इस राह में बाधा नहीं बनेगा।

चर्चा के दौरान त्रिभुवन विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रा. डा. दीपक अर्याल ने बताया कि जेएनयू आंदोलन और चुनाव के बाद छात्र एवं कर्मचारी संगठन क्रमशः निष्क्रिय हो रहे हैं। मध्यपश्चिम विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रा. डा. ध्रुवकुमार गौतम, पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रा. डा. विजुकुमार थपलिया और सुदूरपश्चिम विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रा. डा. हेमराज पन्त ने कहा कि कुछ आंगिक क्याम्पसों में अभी भी छात्र राजनीति में तनाव बना हुआ है। अन्य विश्वविद्यालयों और प्रतिष्ठानों के उपकुलपतियों ने बताया कि उनके संस्थानों में राजनीतिक गतिविधियां कम हैं और यदि प्रशासन कड़ा रहे तो शैक्षिक क्षेत्र में राजनीति समाप्त हो जाएगी, इस विश्वास का भी इजहार किया।