
जिराफ अफ्रीका के सवाना क्षेत्रों में रहते हैं और नेपाल में प्राकृतिक रूप से नहीं पाए जाते। यह पृथ्वी का सबसे ऊंचा जानवर है, जिसकी गर्दन २ मीटर लंबी होती है। जिराफ पृथ्वी के सबसे अनोखे, सुंदर और आकर्षक जीवों में से एक हैं। उनकी लंबी गर्दन, ऊंचा शरीर और धब्बेदार त्वचा के साथ-साथ उनका शांत स्वभाव हमेशा लोगों का ध्यान आकर्षित करता है। नेपाल में जिराफ प्राकृतिक रूप से नहीं पाए जाते। वे मुख्य रूप से अफ्रीका के सवाना क्षेत्रों में ही मिलते हैं। अफ्रीका के खुले मैदानों में जिराफ की असली सुंदरता देखी जा सकती है। जिराफ न केवल सुंदर हैं बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे ऊंचे पेड़ों के पत्ते खाते हैं और वनस्पति की वृद्धि को नियंत्रित करते हैं तथा दूर से किसी खतरे को देख कर अन्य जानवरों को भी सतर्क करते हैं।
१. अफ्रीका के सवाना क्षेत्रों में निवास: जिराफ मुख्यतः अफ्रीका के शुष्क सवाना, खुले मैदान और हल्की जंगलों में रहते हैं। इन क्षेत्रों में एकेसिया पेड़ और झाड़ियाँ प्रचुर मात्रा में होती हैं, जो उनके मुख्य भोजन और आश्रय का स्रोत हैं। नेपाल या अन्य एशियाई देशों में जिराफ प्राकृतिक रूप से नहीं पाए जाते। वे अफ्रीका के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों (जैसे केन्या, तंजानिया, बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका) में अधिक देखे जाते हैं। खुले वातावरण से उन्हें दूर तक देखने और शिकारी से बचने में आसानी होती है। मौसम के अनुसार वे अपने आवास को भी बदलते हैं।
२. दुनिया का सबसे ऊँचा जानवर: जिराफ पृथ्वी पर सबसे ऊंचे जानवर हैं। एक नर जिराफ की ऊंचाई ५.५ मीटर (१८ फीट) तक हो सकती है, जिसमें गर्दन अकेले २ मीटर लंबी होती है। रोचक बात यह है कि उनकी गर्दन में हड्डियों की संख्या इंसानों के समान ७ होती है, लेकिन हर हड्डी अत्यंत लंबी और मजबूत होती है। इस ऊंचाई से वे पेड़ों की ऊपरी पत्तियां आसानी से खा पाते हैं। जिराफ की ऊंचाई ही उनकी प्रमुख सुरक्षा प्रणाली है। वे दूर से शेर, हाइना या अन्य शिकारी देख सकते हैं। उनकी दृष्टि बहुत तेज होती है और खतरा देख कर ५० किलोमीटर प्रति घंटे की गति से दौड़ सकते हैं। मजबूत पैरों से वे शिकारी को चोट पहुँचा सकते हैं।
३. बड़ी मात्रा में भोजन करने वाले जीव: जिराफ पूर्ण शाकाहारी हैं। उनका मुख्य आहार एकेसिया पेड़ के पत्ते और कोपिला होता है। ५० सेंटीमीटर लंबी जीभ से वे ऊंचे स्थान के पत्ते आराम से तोड़ लेते हैं। वे दिन का आधा से ज्यादा समय भोजन में बिताते हैं। प्रतिदिन वे ४५ किलो तक पत्तियां खा सकते हैं। अधिक भोजन खाने के बावजूद उनका विशेष पाचन तंत्र इसे आसानी से पचा लेता है और आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है जिससे उनका शरीर बड़ा और मजबूत रहता है। जिराफ की जीभ गाढ़े काले या बैंगनी रंग की होती है क्योंकि इसमें मेलानिन प्रचुर मात्रा में होता है, जो तेज धूप के विकिरण से जीभ को जलने से बचाता है।
४. कम पानी से जीवित रहने की क्षमता: जिराफों को अधिक पानी पीने की जरूरत नहीं होती। उनका आवश्यक पानी का अधिकांश हिस्सा पत्तियों से ही प्राप्त होता है। वे कई दिन पानी न पिए बिना भी आराम से जीवित रह सकते हैं, जो शुष्क सवाना क्षेत्रों में जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
५. सामाजिक और समूह में रहने वाले: जिराफ सामाजिक स्वभाव के होते हैं। उनके समूह को ‘टावर’ कहा जाता है। प्रत्येक टावर में आमतौर पर १० से २० सदस्य होते हैं, जिसमें मादा और छोटे बच्चे अधिक होते हैं। समूह में रहने से वे एक-दूसरे को खतरों के बारे में सूचित करते हैं।
६. ‘नेकिंग’ नामक अनोखी लड़ाई: नर जिराफों के बीच शक्ति और प्रजनन अधिकार के लिए ‘नेकिंग’ नामक लड़ाई होती है। वे अपनी लंबी गर्दन और सिर से एक-दूसरे पर जोर से वार करते हैं। यह लड़ाई आमतौर पर घातक नहीं होती, और हारने वाला जिराफ पीछे हट जाता है। मजबूत नर मादा पर नियंत्रण रखते हुए अपनी जोड़ी बनाते हैं।
७. जोड़ी बनाना और प्रजनन प्रक्रिया: जिराफों की प्रजनन प्रक्रिया बहुत ही अनोखी और रोचक होती है। प्रजनन का मौसम निश्चित नहीं होता और वे वर्ष भर जोड़ी बना सकते हैं। नर जिराफ मादा के प्रजनन संकेत जानने के लिए उसके पास जाकर घुटने टेक कर मूत्र पिलाते हैं। जब मादा मूत्र करती है तब नर उसकी जीभ से चखता है और ‘फ्लेमेन रेस्पॉन्स’ दिखाता है, जिसमें सिर उठाकर ऊपर के होंठ को घुमाता है। इससे मूत्र में मौजूद हार्मोन और रासायनिक संकेतों से पता चलता है कि मादा प्रजनन योग्य है या नहीं। यह जिराफ की मेटिंग प्रक्रिया में सबसे अनोखी बात होती है। घोड़ा, शेर और हाथी जैसे अन्य जानवरों में भी फ्लेमेन रेस्पॉन्स देखा जाता है, लेकिन जिराफ में मूत्र चखने का व्यवहार विशेष है।
८. जन्म प्रक्रिया भी अनोखी: मादा जिराफ खड़े होकर बच्चे को जन्म देती हैं। नवजात की ऊंचाई लगभग १.५ से २ मीटर होती है और वजन लगभग १०० किलो होता है। जन्म के समय बच्चा लगभग १.५ मीटर की ऊंचाई से गिरता है। कुछ घंटों के भीतर बच्चा उठकर चलना और मां का दूध पीना सीख जाता है, जो शिकारी से जल्दी बचने में मदद करता है।
९. जीवनकाल, दीर्घायु और संरक्षण: जंगली परिस्थितियों में जिराफ की औसत आयु २५ वर्ष होती है जबकि चिड़ियाघर में वे ४० वर्ष तक जीवित रह सकते हैं। हाल के वर्षों में वनों की कटाई, शिकार और जलवायु परिवर्तन के कारण जिराफों की संख्या कम हुई है। विश्वभर में लगभग १ लाख ४० हजार जिराफ बचे हैं और कुछ प्रजातियां संकट में हैं। संरक्षण प्रयास से कुछ क्षेत्रों में उनकी संख्या बढ़ रही है।




