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बाल अधिकार संरक्षण में निरंतर सतर्कता अनिवार्य

८ वैशाख, काठमाडौं। बाल अधिकार संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए सरकार, संचार माध्यम और नागरिक समाज को लगातार सतर्क रहने की आवश्यकता पर समाजिक हितधारकों ने ज़ोर दिया है। बालबालिका शान्तिक्षेत्र राष्ट्रीय अभियान (सिजप) द्वारा सोमवार आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने बाल अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ लगातार आवाज़ उठाने का आह्वान किया। बाल विवाह, बाल श्रम समाप्ति, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और पोषण जैसे विषयों पर सतर्क रहना आवश्यक बताया गया।

त्रिभुवन विश्वविद्यालय पत्रकारिता तथा आम संचार विभाग के प्रमुख प्रा.डा. कुंदन अर्याल ने बाल अधिकार विषयक कार्यपत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि विश्वस्तर पर १९९० से बाल अधिकारों के लिए आवाज़ उठनी शुरू हुई है, “इस क्षेत्र में निरंतर प्रयासों के कारण कुछ अच्छे अभ्यास सामने आए हैं, परन्तु केवल एक या एक दशक की पहल से बाल अधिकारों का प्रचार संभव नहीं है।” अर्याल ने कहा कि हमेशा वकालत करनी होगी, लिखना होगा और नियोजित तरीके से राज्य पर दबाव डालना होगा।

उनके अनुसार, नेपाल ने वर्ष २०३० तक बाल विवाह समाप्त करने की नीति बनाई है, फिर भी बाल विवाह अभी भी न्यूनीकरण के स्तर पर है। आगामी चार वर्षों में बाल विवाह समाप्त होने का व्यापक विश्वास नहीं है। सभी बाल बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और जन्मदर्ता जैसे अधिकार प्रदान करने के लिए पर्याप्त कार्यक्रमों और बजट की कमी है, उन्होंने जानकारी दी।

बालबालिका शान्तिक्षेत्र अभियान के अध्यक्ष तिलोत्तम पौडेल ने कहा कि बालक-बालिकाओं को सुरक्षित वातावरण में निर्भीक होकर जीने, पढ़ने, खेलने और विकसित होने के अधिकार सुनिश्चित करना सभी पक्षों का दायित्व है। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण के अधिकार सुरक्षित करने में नागरिक समाज, संचार माध्यम, स्थानीय तह और सरकार की भूमिका पर विचार व्यक्त किए।

पौडेल ने बालक-बालिकाओं से संबंधित विभिन्न कानूनों को एकीकृत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बाल अधिकार सम्बन्धी कानून, बाल श्रम सम्बन्धी कानून और अन्य कानूनों में असामंजस्य की वजह से क्रियान्वयन में बाधाएँ आती हैं और इसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ता है। साथ ही, लैंगिक और यौन अल्पसंख्यक, अंतरलिंगी बालबालिकाओं एवं आवश्यक संरक्षण के लिए एक अलग आयोग या उच्च स्तरीय निकाय बनाना आवश्यक है, जिसमें वे मजबूती से विश्वास करते हैं।

उन्होंने राष्ट्रीय बाल अधिकार परिषद को संसाधन-सम्पन्न बनाने और स्थानीय तहों में बच्चों के लिए अलग बजट सहित आवश्यक संरचनाएँ स्थापित करने के लिए संचार माध्यम से निगरानी की भूमिका निभाने पर भी ज़ोर दिया। कार्यक्रम में इन्सेक नेपाल के सूचना अधिकारी कृष्ण गौतम, पत्रकार प्रकाश सिलवाल, संचारकर्मी पुष्पा अधिकारी, सफलता भंडारी, संतोष पौडेल, देवी सापकोटा और प्लान इंटरनेशनल नेपाल के नीति पैरवी प्रबंधक इर्साद अन्सारी ने भी अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए।