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योजना आयोग और नीति अनुसन्धान प्रतिष्ठान को समाप्त नहीं किया जाएगा, बल्कि और मजबूत बनाया जाएगा : प्रधानमंत्री

समाचार सारांश

  • प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने राष्ट्रीय योजना आयोग और नीति अनुसन्धान प्रतिष्ठान को समाप्त न कर उनके सुधार और सुदृढ़ीकरण का निर्देश दिया।
  • उन्होंने नीति अनुसन्धान प्रतिष्ठान के विशेषज्ञों के प्राज्ञिक कार्यों को पूरी तरह अपनाने तथा ठोस योजना और सावधानीपूर्वक कार्यान्वयन की आवश्यकता बताई।
  • अर्थमंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने इसे सुधार का स्वर्णिम अवसर मानते हुए नीति विकास और नवप्रवर्तनात्मक कार्यक्रमों का राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने की योजना की जानकारी दी।

८ वैशाख, काठमाडौं। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने राष्ट्रीय योजना आयोग तथा नीति अनुसन्धान प्रतिष्ठान जैसे संस्थानों को समाप्त करने के बजाय सुधार कर उन्हें और अधिक सुदृढ़ बनाकर सरकार की सेवा प्रदान करने की क्षमता को प्रभावी बनाने पर बल दिया है।

प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद्को कार्यालय में मंगलवार को आयोग के पदाधिकारी एवं कर्मचारियों के साथ हुई चर्चा में शाह ने कहा कि योजना निर्माण और नीतिगत अनुसन्धान प्रणालीगत होने पर ही सरकार की सेवा प्रदान करने में आसानी होगी। उन्होंने कहा, ‘इन संस्थाओं में सुधार किया जा सके तो सरकार के संचालन में बड़ी मदद मिलेगी।’

नीति अनुसन्धान प्रतिष्ठान के संदर्भ में उन्होंने कहा, ‘विशेषज्ञों और अनुसन्धानकर्ताओं का महत्व हम जानते हैं। हमें ऐसी उत्कृष्ट विशेषज्ञता चाहिए, जो जनप्रतिनिधियों से गहरा अध्ययन और दूरगामी सोच प्रस्तुत कर सके। सरकार विशेषज्ञों के प्राज्ञिक कार्यों को पूर्ण रूप से स्वीकार करेगी।’

प्रधानमंत्री शाह ने स्पष्ट किया कि बिना किसी बहाने के परिणाम निकालने के उद्देश्य से दोनों संस्थाओं को कार्य करने का निर्देश दिया गया है। ‘किसी भी कार्य को कराने के लिए ठोस योजना और सजग कार्यान्वयन आवश्यक होता है। विकास में विषय विशेषज्ञ की भूमिका अतुलनीय है। इस तथ्य को आत्मसात कर आगे बढ़ें।’

मंत्रालयों के बीच समन्वय की कमी के दावे को उन्होंने अस्वीकार करते हुए कहा कि एक ही सरकार के अधीन ऐसा कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। साथ ही बजट और कानूनी जटिलताओं को काम न करने के बहाने के रूप में प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। ‘प्रभावी अध्ययन और अनुसन्धान से ही परिणाम संभव है। पुराने नीति और कानूनों पर आधारित काम ५० वर्षों तक हो सकता है, लेकिन जब तक सुधार नहीं होगा तब तक देश समृद्ध नहीं हो सकता,’ प्रधानमंत्री ने कहा।

उसी अवसर पर अर्थमंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने वर्तमान समय को सुधार का स्वर्णिम अवसर मानते हुए बताया कि उच्च राजनीतिक प्रतिबद्धता के तहत कार्य आगे बढ़ेगा। उन्होंने विशेषज्ञों के ज्ञान को सरकारी नीतियों, कार्यक्रमों और बजट में परिवर्तित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि स्पष्ट लक्ष्य, पर्याप्त बजट, निश्चित जिम्मेदारी और मापन योग्य परिणाम सहित प्रस्ताव संबंधित मंत्रालयों के माध्यम से लाना होगा।

अर्थमंत्री वाग्ले ने वर्तमान संस्थागत संरचना के सुदृढ़ीकरण, अप्रासंगिक प्रावधानों की समाप्ति और नई जरूरतों के अनुसार नीति विकास की प्रक्रिया शुरू करने की सूचना दी। उन्होंने नवप्रवर्तनात्मक कार्यक्रमों को ‘पायलट प्रोजेक्ट’ के रूप में शुरू कर सफलता मिलने पर राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने की रणनीति भी साझा की।

चर्चा के दौरान आयोग के पदाधिकारियों ने अपने क्षेत्र के कार्यों की प्रगति, चुनौतियां और बजट की स्थिति पर प्रधानमंत्री को रिपोर्ट प्रस्तुत की। प्रतिष्ठान के कर्मचारियों ने अब तक के अध्ययन- अनुसन्धान से सरकारी कार्य प्रणाली में महत्वपूर्ण योगदान का उल्लेख किया और अधिक जनशक्ति व संसाधनों की आवश्यकता जताई। प्रधानमंत्री के साथ प्रत्यक्ष संवाद से उन्हें और उर्जा और मेहनत के साथ कार्य करने की प्रेरणा मिली है।