
समाचार सारांश संशोधित संस्करण। बैतडी के पाटन से जुड़े गांवों में पानी, सड़क और शिक्षा की कमी के कारण 15 वर्षों में 158 परिवारों का पलायन हुआ है। नमुना शहर पाटन में 15 साल बीत जाने के बाद भी बुनियादी ढांचे और विकास योजनाएं अधर में हैं और अधिकांश संरचनाएं खंडहर जैसी स्थिति में हैं। नए शहर की योजना के मुख्य हिस्से लैंड पुलिंग (जमीन का एकीकरण) कार्यान्वयन से दुर हैं और कार्यालय को इसके संचालन में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। बैतडी, 10 वैशाख। समथर फ्शाट, खेतों के सिरानी पर बड़ी बस्तियाँ। ये वह दृश्य हैं जहां सरकार ने देश के 10 नमुना शहर घोषित किए हैं, जिनमें बैतडी के पाटन के आसपास के गांव शामिल हैं। यहां पारिपाटन, लोर्खा, मेल्तडा, टुणेगैर, डोबरा, पौडी, बेडौती जैसे गांव आते हैं, जो नमुना शहर पाटन नगरपालिका के वार्ड नं 6 पाटन बाजार से जुड़े हैं। नमुना शहर घोषित होने के 15 वर्ष पूरे होने को हैं, लेकिन ये गांव आंतरिक रूप से सूनापन अनुभव कर रहे हैं। आर्थिक वर्ष 2066-067 में यहां विकास के लिए नमुना शहर घोषित किया गया था। विकास की अपेक्षा के अनुसार निर्माण ना होने, सड़क, सिंचाई, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण गांव लगातार अपनी जनसंख्या खो रहे हैं। मेल्तडा गांव में पहले 35 परिवार थे, जो अब घटकर केवल 14 रह गए हैं। स्थानीय दानबहादुर चंद के अनुसार लगभग 20 परिवार तराई की ओर बस गए हैं। चंद कहते हैं, ‘यहां सड़क नहीं है, पानी की कमी है, सिंचाई के लिए नहर है लेकिन पानी नहीं है। लोग यहां क्यों रहें?’ मेल्तडा में आधे से अधिक घर खाली हैं और धान की खेती की भूमि बेकार पड़ी है। स्थानीय शांति चंद बताते हैं कि जन्ती मलामी (मृतक के अंतिम संस्कार) के लिए लोग ही नहीं मिलते और सैकड़ों रोपनी भूमि बंजर हो गई है। बेडौती गांव में भी लगभग 20 परिवारों में से अब केवल 6 परिवार ही बचे हैं। स्थानीय लवदेव चंद के अनुसार दर्जनों परिवार बाहर चले गए हैं और गांव लगभग खाली हो चुका है। मेल्तडा के शिक्षक रामबहादुर चंद कहते हैं कि अगर पानी, सिंचाई और बुनियादी संरचना उपलब्ध होती तो पलायन की संख्या कम होती, लेकिन नए शहर के कार्यालय से अपेक्षित काम नहीं हो पाया है। ‘पानी, बुनियादी संरचना, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में अपेक्षित काम नहीं हुआ है। निर्माण कार्य वर्षों से रूका हुआ है, विकास का अनुभव कैसे होगा?’ चंद का सवाल है। पाटन नगरपालिका-6 के वार्ड सचिव नवीन बिष्ट के अनुसार पिछले 10 वर्षों में 158 परिवार पलायन कर चुके हैं, जिनमें से पिछले 5 वर्षों में 134 परिवार ही हैं। वार्ड अध्यक्ष राजेंद्र बिष्ट कहते हैं, ‘रोजगार की कमी और विकास न होने के कारण युवा लगातार बाहर जा रहे हैं।’ नए शहर के कार्यालय का लैंड पुलिंग कार्यान्वयन में विलंब होने से स्थानीय लोगों को विकास का अनुभव नहीं हो पाया है। पांच से अधिक वर्षों तक योजनाएं अधर में रहीं और कार्यान्वयन संभव नहीं हो पाया। पूर्वप्रमुख केशवबहादुर चंद के अनुसार बजट की कमी के कारण योजनाएं ठप हैं। पहले घोषित 10 शहरों में से अधिकांश अभी तक कार्यान्वयन से दूर हैं। लैंड पुलिंग की योजना भी पूरी नहीं हुई और जमीन उपलब्ध कराने में बाधाएं हैं। नए बुनियादी ढांचे का निर्माण और नमुना शहर के रूप में विकास धीमा है। योजनाएं सड़क, जल निकासी, कचरा प्रबंधन, पानी की आपूर्ति, विद्युतीकरण और अस्पताल निर्माण जैसी थीं। सरकार का उद्देश्य 10 नमुना शहरों में लगभग एक लाख लोगों की आबादी बसाने का था। पाटन नमुना शहर में अभी तक अपेक्षित ‘नमुना’ विकास नहीं हुआ है। कुछ सीमित बुनियादी ढांचे, सौर ऊर्जा और खुला मैदान निर्माण तक सीमित है। नगर विकास समिति के पूर्व अध्यक्ष जयसिंह बिष्ट कहते हैं, ‘टुकड़ों में योजनाएं हैं, पहाड़ी इलाकों के गांवों को रोकने के लिए कोई ठोस योजना नहीं है। कार्यालय और स्थानीय प्रतिनिधियों को समन्वय बनाकर योजना को आगे बढ़ाना होगा।’ पाटन नए शहर के अधिकांश निर्माण ङराखण्डित और टूटे हुए हैं। आर्थिक वर्ष 2071/072 में शुरू हुआ नमुना बसपार्क संचालन में आने में असमर्थ रहने के कारण जीर्ण स्थिति में है। हिरापुर मनोरंजन पार्क भी विकास नहीं होने के कारण खराब हो चुका है। एकीकृत कचरा प्रबंधन केंद्र का निर्माण भी शुरू नहीं हुआ, जिससे बाजार क्षेत्र में कचरा प्रबंधन समस्याएं बढ़ी हैं। लैंड पुलिंग (जमीन एकीकरण) का काम शुरू नहीं हो पाया है। स्थानीय चर्चा नक्शा तैयार कर सख्त सड़क, जल निकासी, खुले स्थान और सामुदायिक केंद्र की व्यवस्था हेतु जमीन सर्वे किया गया है। इससे विद्युत, जल, संचार, स्वास्थ्य, बैंक तथा खरीदारी परिसर जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। कार्यालय अब सघन शहरी परियोजना में सम्मिलित किया गया है और वित्त वर्ष में मात्र 3 करोड़ का बजट है, जो अत्यंत सीमित है। परियोजना प्रमुख झंकबहादुर थापाका अनुसार, ‘इस वर्ष एकीकृत सभाहाल निर्माण का कार्यक्रम है, पर बजट की कमी के कारण कार्य रुका हुआ है।’





