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चौँरीगोठ से निकली अल्ट्रा धाविका आङ फुर्बा

आमतौर पर ‘अर्ली ट्वेन्टिज’ यानि बीस की उम्र के आसपास अल्ट्रा खिलाड़ी बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं। लेकिन आङ फुर्बा ने तो दो दशक की उम्र पूरी होने को आई है और वह अल्ट्रा दौड़ में चमकदार सितारे के रूप में उभरी हैं। २० वर्षीय शेर्पा धाविका आङ फुर्बा ने मञ्जुश्री ट्रेल रेस १०० मील महिलाओं की श्रेणी में ३३ घंटे १३ मिनट ०६ सेकेंड में जीत हासिल की। उन्होंने अल्ट्रा ट्रेल में पिछले चार वर्षों में नेपाल और विदेशों के विभिन्न रेसों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। आङ फुर्बा ने स्वयं अपने सारे खर्च वहन किए हैं क्योंकि उन्हें स्पॉन्सरशिप नहीं मिली है और अंतरराष्ट्रीय रेसों में भाग लेने में सहयोग की आवश्यकता जताई है।

११ वैशाख, काठमांडू। २० वर्षीया आङ फुर्बा शेर्पा ने हाल ही में संपन्न हुए नेपाल के प्रसिद्ध मञ्जुश्री ट्रेल रेस (एमटीआर) में १०० मील अर्थात लगभग १६० किलोमीटर की दूरी की दौड़ जीती। उन्होंने निर्धारित दूरी ३३ घंटे १३ मिनट ०६ सेकेंड में पूरी कर पहला स्थान प्राप्त किया। उन्होंने विदेशी खिलाड़ी व पूर्व विजेता अनिता राई को पीछे छोड़ा। नीदरलैंड्स की अन्ने माई बान ३३ घंटे ५१ मिनट ४१ सेकेंड के साथ दूसरे और नेपाल की ही अनिता राई तीसरे स्थान पर रहीं। अनिता ने इस दूरी को पूरा करने में ३८ घंटे १८ मिनट २३ सेकेंड का समय लिया।

सोलुखुम्बु की सोलु दूधकुण्ड नगरपालिका–२ के फेराकी निवासी आङ फुर्बा ने इससे पहले भी अल्ट्रा ट्रेल में कई उपलब्धियां हासिल की थीं, लेकिन वे ज्यादा चर्चित नहीं थीं। काठमांडू उपत्यका में होने वाली मञ्जुश्री दौड़ जीतने के बाद उनकी पहचान और लोकप्रियता में वृद्धि हुई है। उन्होंने १८ वर्ष की आयु में पहली बार मञ्जुश्री ट्रेल में भाग लिया था। इस रेस में तीसरी बार भाग लेकर वह चैंपियन बनीं। इससे पहले दो बार भाग लेने पर वे तीसरे स्थान पर रहीं। पिछले वर्ष रेस पूरी नहीं कर पाईं थीं।

आङ फुर्बा ने वर्ष २०२२ में एवरेस्ट ट्रेल रेस से शुरुआत की थी। शुरुआत में उन्हें अल्ट्रा ट्रेल के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। लेकिन उनके बड़े भाई निमा टेन्डी शेर्पा ने रेस की जानकारी दी, जिससे उनकी रुचि बढ़ी। उन्होंने कहा, “दाइन ने इंटरनेट पर देख-देख कर इस रेस के बारे में मुझे बताया। उसके बाद मुझे भी इसे ट्राई करने का मन हुआ।” उन्होंने चार वर्षों में सोलुखुम्बु से काठमांडू, मनास्लु से जुम्ला तक विभिन्न रेसों में भाग लिया है।

आङ फुर्बा ने कहा, “मेरा लक्ष्य विदेश जाकर अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप में भाग लेना है।” उन्होंने स्पॉन्सरशिप की कमी के कारण अंतरराष्ट्रीय रेसों में भाग लेने में कठिनाइयों का जिक्र किया। “अगर स्पॉन्सर नहीं मिलेगा तो हमारे लिए बहुत मुश्किल हो जाएगा। अच्छी स्पॉन्सरशिप मिले तो अंतरराष्ट्रीय दौड़ों में भाग लेना आसान हो जाएगा,” उन्होंने कहा।