
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आर्मेनियाई नरसंहार को 20वीं सदी की सबसे भयानक त्रासदी बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है। पुतिन ने कहा कि जातीय और धार्मिक घृणा, राष्ट्रवाद और जेनोफोबिया ने तत्कालीन सभ्य दुनिया को स्तब्ध कर दिया था। वर्ष 1915 से 1923 तक ऑटोमन साम्राज्य द्वारा 10 लाख से 15 लाख आर्मेनियाई लोगों की सुनियोजित सामूहिक हत्या की गई थी। 11 वैशाख, काठमाण्डू।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आर्मेनियाई नरसंहार के 111वें स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में एक विशेष संदेश के माध्यम से इस घटना को 20वीं सदी की सबसे भयावह त्रासदी के रूप में वर्णित किया है। शुक्रवार को जारी संदेश में पुतिन ने नरसंहार के हजारों पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए निर्दोष लोगों की सामूहिक ह्त्या और देश निकाला की कड़ी निंदा की है।
अपने संदेश में पुतिन ने जातीय और धार्मिक घृणा, राष्ट्रवाद एवं जेनोफोबिया से उत्पन्न खतरनाक परिणामों ने तत्कालीन पूरी सभ्य दुनिया को चकित कर दिया था, उल्लेख किया। इसके साथ ही उन्होंने याद दिलाया कि सन 1915 में रूस, ब्रिटेन और फ्रांस ने संयुक्त रूप से इसे मानवता के खिलाफ अपराध के रूप में निंदा की थी और रूस का रुख हमेशा सजीव एवं स्पष्ट रहा है।
आर्मेनियाई नरसंहार प्रथम विश्व युद्ध के दौरान (1915 से 1923) ऑटोमन साम्राज्य (आज के तुर्की) द्वारा अपने अधीनस्थ अल्पसंख्यक आर्मेनियाई नागरिकों पर की गई सुनियोजित और व्यवस्थित सामूहिक हत्या तथा जातीय सफाई थी। इस दुखद घटना में अनुमानित 10 लाख से 15 लाख आर्मेनियाई लोगों की हत्या कर दी गई।





