
10 वैशाख, काठमांडू। संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मंत्रालय ने निजामती कर्मचारियों की उम्र सीमा 60 वर्ष करने के प्रस्ताव के साथ संघीय निजामती विधेयक का मसौदा तैयार किया है। मंत्रालय की टीम द्वारा तैयार यह मसौदा सुझाव के लिए सार्वजनिक करने की तैयारी में है। संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मंत्री प्रतिभा रावल ने बताया कि निजामती कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति उम्र 60 वर्ष तक रखने के लिए विधेयक तैयार किया गया है। उनके अनुसार, विधेयक संघीय संसद से पारित होने के बाद पहले वर्ष में 59 वर्ष और दूसरे वर्ष से 60 वर्ष की उम्र सीमा लागू होगी। उन्होंने कहा, “हमने मंत्रालय के कर्मचारियों और विशेषज्ञों के साथ विधेयक पर विस्तार से चर्चा कर ली है, लेकिन सामाजिक मीडिया पर चल रहे अफवाहें और हल्ले विधेयक में शामिल नहीं हैं,” उन्होंने कहा, “डिजिटल सेवा-प्रणालीमुखी बनाने और कर्मचारियों की क्षमता तथा दक्षता के आधार पर प्रोत्साहन की नीति को प्राथमिकता देते हुए विधेयक तैयार किया गया है।”
मंत्रालय द्वारा तैयार विधेयक के अनुसार, निजामती कर्मचारियों की उम्र सीमा 60 वर्ष निर्धारित की जाएगी और इसे दो चरणों में लागू किया जाएगा। प्रमुख सचिव (चौदहवें स्तर) की पद अवधि दो वर्ष की करने का प्रस्ताव है, जबकि वर्तमान में यह तीन वर्ष है। सचिव (तेरहवें स्तर) की पद अवधि भी दो वर्ष रहेगी, लेकिन आवश्यक होने पर सरकार इसे एक वर्ष और बढ़ा सकती है। सामाजिक मीडिया पर सहसचिवों की अधिकतम सेवा अवधि और अलग उम्र सीमा होने की अफवाहें फैली हैं, लेकिन सहसचिवों की सेवा अवधि और उम्र सीमा में कोई बदलाव नहीं होगा। सहसचिव सचिव पद पर पदोन्नत होने तक 60 वर्ष तक सेवा कर सकेंगे और पदोन्नति के बाद सचिव की निर्धारित अवधि के अनुसार सेवानिवृत्त होंगे। अन्य निम्न स्तर के कर्मचारियों की सेवा अवधि और उम्र सीमा यथावत रहेगी।
प्रवेश की उम्र सीमा और कूलिंग पीरियड में भी बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है। नए प्रस्ताव के अनुसार, पुरुषों के लिए यह 32 वर्ष के भीतर निजामती सेवा में प्रवेश आवश्यक होगा, जबकि महिलाओं के लिए सीमा 35 वर्ष और विकलांग व्यक्तियों के लिए 39 वर्ष निर्धारित है। इससे पहले पुरुषों की उम्र सीमा 35 वर्ष और महिलाओं की 40 वर्ष थी। विधेयक में सेवा निवृत्ति के बाद कम से कम दो वर्षों तक किसी भी प्रकार की नियुक्ति न मिलने का प्रावधान है। इसके अलावा, इस अवधि में चुनावी उम्मीदवार बनने या निर्वाचित होने पर भी रोक लगेगी। पिछली बार राज्यव्यवस्था समिति में कूलिंग पीरियड विषय पर विवाद हुआ था, लेकिन कोई निष्कर्ष पर पहुंचा नहीं था।
विधेयक में सचिव स्तर के कार्यकारी पद का भी प्रावधान है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के योग्य व्यक्ति निश्चित परीक्षण या प्रतिस्पर्धा के माध्यम से सीधे नियुक्त किए जा सकेंगे। उनकी पद अवधि निजामती सेवा के सचिव या चौदहवें स्तर के कर्मचारियों की तरह दो वर्ष की होगी और एक वर्ष विस्तार का विकल्प भी मौजूद होगा।
स्वार्थ द्वंद्व संबंधी व्यवस्था भी विधेयक में शामिल की गई है, जिसके अनुसार निजामती कर्मचारियों को अपने स्वार्थ संबन्धी मामलों का खुलासा कर अभिलेख रखना होगा और ऐसी स्थिति में वे निर्णय नहीं ले सकेंगे। स्वार्थ द्वंद्व में फंसे कर्मचारियों द्वारा निर्णय लेने पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। साल 2079 में कानून मंत्रालय ने इस संबंध में दो मसौदे तैयार किए थे, लेकिन उनका कार्यान्वयन नहीं हो सका। निजामती सेवा में प्रवेश की तैयारी के लिए आयोजित परीक्षात्मक और तैयारी कक्षाओं में वर्तमान निजामती कर्मचारी शामिल न हों, इस प्रस्ताव को भी इसमें शामिल किया गया है।
स्थानीय स्तर पर प्रमुख प्रशासनिक अधिकृत की व्यवस्था को लेकर लंबे समय से चर्चा चली आ रही है। विधेयक में संघीय स्तर से सीधे प्रदेश मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रमुख प्रशासनिक अधिकृत नियुक्त करने का प्रस्ताव है। अब तक नियुक्त प्रमुख प्रशासनिक अधिकृतों को मुख्यमंत्री कार्यालय के माध्यम से प्रत्येक स्थानीय तह में भेजा जाएगा। ऐसे अधिकृतों की सेवा अवधि कानून लागू होने के बाद पांच वर्ष होगी। प्रदेश स्तर पर भी अलग-अलग पदसंख्या निर्धारित कर कुछ कर्मचारियों को संघीय स्तर से स्थानांतरित करने का प्रस्ताव है। दो स्थानीय तह में सहमति होने पर कर्मचारियों का तबादला किया जाएगा, लेकिन तबादले वाले कर्मचारियों की पूरी जिम्मेदारी स्थानीय सरकार द्वारा ली जाएगी। प्रदेश सेवा के कर्मचारियों के लिए भी समान व्यवस्था होगी।





