
१२ वैशाख, हेटौंडा । बागमती प्रदेश सरकार ने वर्षों से अधूरी रह रही परियोजनाओं और लागत वृद्धि की समस्या से निजात पाने के लिए नई बजट निर्माण निर्देशिका जारी की है। आगामी आर्थिक वर्ष के लिए बजट तैयारी कर रहे आर्थिक मामिला तथा योजना मंत्रालय ने वार्षिक परियोजना प्रस्ताव और चयन से संबंधित नई निर्देशिका, २०८३ जारी की है।
निर्देशिका में स्पष्ट सीमा निर्धारण किया गया है कि सरकार नई पूर्वाधार परियोजनाएं प्रस्तावित करते समय लागत के अनुसार इसे कितने समय में पूरा करना होगा। प्रदेश आर्थिक कार्यविधि नियमावली, २०७६ के नियम १२० के तहत अधिकार का प्रयोग करते हुए आर्थिक मामिला मंत्री प्रभात तामांग ने यह निर्देशिका तैयार की है। बजट एवं कार्यक्रम की योजना को समयानुसार और व्यवस्थित बनाने के लिए यह निर्देशिका आवश्यक है, ऐसा मंत्री तामांग ने बताया।
अब बजट प्रस्ताव करते समय इस निर्देशिका द्वारा निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य होगा। बागमती सरकार ने आगामी आर्थिक वर्ष से नई पूर्वाधार परियोजनाओं के कार्यान्वयन में लागत के आधार पर परियोजना की पूर्णता अवधि तय करते हुए अधिकतम पाँच वर्षों के भीतर कार्य पूरा करने का प्रावधान लागू किया है। निर्देशिका के दफा ४ के अनुसार १० करोड़ रुपये तक की परियोजनाएं दो आर्थिक वर्षों के भीतर पूरी करनी होंगी।
अर्थमंत्री तामांग के अनुसार, १० करोड़ से २० करोड़ रुपये तक की परियोजनाएं अधिकतम तीन वर्षों के भीतर, २० करोड़ से ५० करोड़ रुपये की परियोजनाएं चार वर्षों के भीतर, और ५० करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाएं पाँच वर्षों के भीतर पूर्ण करनी होंगी। इस नियम से लंबे समय तक अधूरी रहने वाली परियोजनाओं पर नियंत्रण मिलेगा, लागत वृद्धि घटेगी तथा सार्वजनिक संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होगा, उन्होंने कहा।





