
एआई तकनीक और संपादकीय समीक्षा सहित समाचार: अमेरिका की एडटेक कंपनी चेग एआई वित्तीय संकट से जूझ रही है और इसकी कीमत लगभग शून्य के करीब आ गई है। चैटजीपीटी की मुफ्त सेवा और गूगल के जेमिनाई एआई ने चेग के उपयोगकर्ताओं और राजस्व में भारी गिरावट ला दी है। चेग को अपनी सेवाओं में विविधता लाए बिना कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ रही है, जिससे कंपनी के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक और एआई टूल्स के व्यापक उपयोग के साथ विश्व की कई बड़ी कंपनियां संकट में आ गई हैं। इसका ताजा उदाहरण अमेरिका की प्रसिद्ध शैक्षिक तकनीकी (एडटेक) कंपनी चेग है। जो कभी अरबों डॉलर के मूल्य के साथ उभर रही थी, अब लगभग ध्वस्त होती नजर आ रही है और इसका मुख्य कारण एआई का प्रभाव माना जा रहा है।
अमेरिका में कुछ वर्षों पहले तक अध्ययन सहयोग के लिए सबसे पहला नाम चेग ही था। यह कंपनी ऑनलाइन शिक्षा क्षेत्र की एक बड़ी ब्रांड और अमेरिका की सबसे बड़ी एडटेक कंपनी मानी जाती थी। लेकिन पिछले चार वर्षों में इसकी स्थिति अत्यंत कमजोर हो गई है और अब यह ध्वस्त होती जा रही है। स्कूल और कॉलेज के गृहकार्य समाधान, सवाल-जवाब और परीक्षा तैयारी के लिए लाखों छात्र चेग के प्लेटफॉर्म का उपयोग करते थे। लेकिन एआई और विशेषकर चैटजीपीटी के आगमन के बाद चेग संकट में पड़ गया।
सन् 2021 में चेग की सफलता अपने चरम पर थी। उस समय कंपनी का मूल्य लगभग 15 अरब डॉलर आंका गया था। इसके बाद तेज गिरावट शुरू हुई और कुछ वर्षों में कंपनी का मूल्य लगभग शून्य के करीब आ गया। चेग का व्यापार मॉडल इस आधार पर था कि छात्रों को सवालों के जवाब के लिए शुल्क देना होगा। लेकिन सन् 2022 में चैटजीपीटी के आने से छात्र मुफ्त सेवा पाने लगे, जिससे चेग की स्थिति और खराब हो गई। चैटजीपीटी जैसे एआई उपकरण तुरंत और निशुल्क उत्तर देने लगे, जिससे छात्रों को भुगतान करने की जरूरत कम हो गई। इससे चेग के कई उपयोगकर्ता कम हुए, भुगतान मॉडल अप्रभावी हुआ और आय में गिरावट आई। वेबसाइट ट्रैफिक में भी कमी आई। कंपनी के शेयर मूल्य में 40 से 50 प्रतिशत तक गिरावट आई है।
गूगल ने भी चेग को बड़े प्रतिस्पर्धी के रूप में चुनौती दी है। गूगल सर्च में एआई के इस्तेमाल से उपयोगकर्ताओं को उलझन नहीं होती और साइट पर जाने की ज़रूरत कम हो गई है। गूगल का जेमिनाई एआई चेग प्लेटफॉर्म के उपयोगकर्ता संख्या को लगभग शून्य तक ले आया है।
व्यावसायिक दृष्टि से देखें तो, चेग की सबसे बड़ी कमजोरी छात्रों के गृहकार्य सहायता पर निर्भर रहना था। एआई ने ये सेवाएं मुफ्त और तुरंत उपलब्ध कराना शुरू कर दिया, जिससे चेग के टिकने की संभावना समाप्त हो गई। चेग ने अपनी सेवाओं के विविधीकरण या सुधार नहीं किए, जो इसके पतन का एक अन्य कारण है। स्वयं एआई उत्पाद विकसित न कर पाने की वजह से छात्रों का झुकाव चैटजीपीटी जैसे अन्य उपकरणों की ओर बढ़ा जिसने वापसी की गुंजाइश कम कर दी। इसीलिए कंपनी को बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ी। हजारों कर्मचारी निकाले गए और लागत में कटौती के फैसले लेने पड़े। आर्थिक स्थिति दिन-ब-दिन कमजोर हुई है।
पिछले वर्ष सन् 2025 में चेग की आय लगभग 50 प्रतिशत से घट गई है और घाटा बढ़ा है। अंततः कंपनी का अस्तित्व ही संकट में आ गया है। चेग के संकट से स्पष्ट होता है कि एआई तकनीक पारंपरिक प्रौद्योगिकी उद्योग के लिए कितनी बड़ी चुनौती पेश कर रही है।





