
भौतिकशास्त्रियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग कर प्रकृति में छिपे नए नियमों को खोजने में बड़ी सफलता हासिल की है। एमोरी यूनिवर्सिटी की अनुसंधान टीम ने विशेष रूप से डिजाइन किए गए न्यूरल नेटवर्क और डस्टी प्लाज्मा के कणों के सूक्ष्म त्रि-आयामी ट्रैकिंग संयोजन के जरिए कणों के बीच जटिल अंतःक्रियाओं के छिपे पैटर्नों का खुलासा किया है। पदार्थ की चौथी अवस्था मानी जाने वाली प्लाज्मा, अंतरिक्ष से लेकर पृथ्वी की अग्नि तक मौजूद रहस्यमय अवस्था है। इस अध्ययन का सबसे रोचक पहलू यह है कि एआई ने केवल आंकड़ों का विश्लेषण ही नहीं किया, बल्कि वर्षों से स्थापित भौतिकशास्त्र की मान्यताओं को चुनौती देते हुए नए सत्य खोजे हैं।
प्लाज्मा वह अवस्था है जहां गैस आयनीकृत होकर स्वतंत्र इलेक्ट्रॉन और आयन बन जाते हैं, जिससे यह विद्युत चालकता जैसे विशिष्ट गुण दिखाता है। हमारे दृश्य ब्रह्माण्ड का लगभग ९९.९ प्रतिशत भाग प्लाज्मा से भरा हुआ है। डस्टी प्लाज्मा में ये आयन के साथ-साथ छोटे धूल के कण भी होते हैं, जो शनि ग्रह के घेरे से लेकर पृथ्वी के आयोनमंडल तक पाए जाते हैं। अनुसंधानकर्ताओं ने प्रयोगशाला में वैक्यूम चैंबर के अंदर लेजर और उच्च गति कैमरों के माध्यम से इन कणों की गति को अत्यंत सूक्ष्म रूप से रिकॉर्ड किया। संकलित आंकड़ों को एआई मॉडल में डालने पर, इसने कणों के बीच होने वाली ‘गैर–पारस्परिक बल’, अर्थात् नॉन–रेसिप्रोकल फोर्सेस, को ९९ प्रतिशत से अधिक सटीकता के साथ व्याख्यायित किया।
गैर–पारस्परिक बल की संकल्पना अत्यंत जटिल है। इसमें एक कण का दूसरे कण पर प्रभाव और दूसरे कण की प्रतिक्रिया भिन्न होती है। अनुसंधान टीम ने इसे ताल में चलती दो नावों के उदाहरण से समझाया है, जहां आगे वाली नाव की लहर पीछे वाली नाव को खींचती है, पर पीछे वाली नाव आगे वाली को धकेलती है। डस्टी प्लाज्मा में भी ऐसा ही अनूठा व्यवहार देखा गया जहाँ आगे का कण पीछे को आकर्षित करता है, लेकिन पीछे का कण हमेशा आगे को विकर्षित करता है। पुराने सिद्धांत कण के विद्युत आवेश और आकार के बीच संबंध को सरल मानते थे, लेकिन एआई ने स्पष्ट किया कि यह संबंध प्लाज्मा के घनत्व और तापमान पर निर्भर एक जटिल प्रक्रिया है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह एआई विधि कोई ‘ब्लैक बॉक्स’ नहीं है, बल्कि मानव द्वारा आसानी से समझी और व्याख्यायित की जा सकने वाली तकनीक है। यह कणों की गति को तीन मुख्य प्रभावों में विभाजित करके अध्ययन करती है: गति से उत्पन्न अवरोध, गुरुत्वाकर्षण जैसे पर्यावरणीय बल, तथा कणों के बीच पारस्परिक बल। यह तकनीक केवल भौतिकशास्त्र तक सीमित नहीं रहकर बायोइंजीनियरिंग और जीवविज्ञान जैसे क्षेत्रों में भी प्रभावी हो सकती है। उदाहरण के लिए, यह समझने के लिए कि कैंसर कोशिकाएँ एक स्थान से दूसरे स्थान तक कैसे फैलती हैं, या पक्षियों के झुंड और मनुष्यों के समूह में सामूहिक व्यवहार कैसे विकसित होता है, यह नई दिशा प्रदान करेगी। यह शोध एआई को केवल एक उपकरण नहीं बल्कि प्रकृति के नए नियमों को खोजने वाला सहयात्री के रूप में स्थापित करता है।





